AI Cyber Comics: रोमांच के साथ अपराध से बचना सिखाएंगी 'सुपर कॉप' चक्रेश की कहानियां, पढ़ें क्या होगा खास
वर्तमान में एआई का जमाना है और अपराधी भी इसी का उपयोग कर नए-नए अपराध कर रहे हैं। ऐसे में पुलिस ने भी जागरूकता के लिए एआई को ही माध्यम बनाया है।
विस्तार
उत्तराखंड पुलिस ने साइबर अपराध के प्रति जागरूक करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) आधारित साइबर कॉमिक्स की शुरुआत की है। इस कॉमिक्स में रोमांच से भरपूर सुपर कॉप चक्रेश की कहानियों को शामिल किया गया है।
उत्तराखंड राज्य देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने एआई आधारित साइबर कॉमिक्स तैयार की है। इस कॉमिक्स में कहानियों की शृंखला हर सोमवार को प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद इसे सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित किया जाएगा। एसएसपी एसटीएफ आयुष अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान में साइबर अपराधी नए-नए तरीके अपना रहे हैं। पुलिस अपराधियों को पकड़ भी रही है, लेकिन इससे बचने का सबसे कारगर तरीका केवल जागरूकता है।
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वर्तमान में एआई का जमाना है और अपराधी भी इसी का उपयोग कर नए-नए अपराध कर रहे हैं। ऐसे में पुलिस ने भी जागरूकता के लिए एआई को ही माध्यम बनाया है। इस कड़ी में डीएसपी साइबर अंकुश मिश्रा ने अपनी टीम के साथ मिलकर उत्तराखंड साइबर कॉमिक्स की शुरुआत की है।
इसमें एक काल्पनिक चरित्र सुपर कॉप चक्रेश बनाया गया है। इस कॉमिक्स की कहानियों के माध्यम से बताया जाएगा कि जब व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होता है तो पुलिस किस तरह से काम करती है। कैसे अपराधियों को पकड़ा जाता है।
इसके लिए सुपर कॉप चक्रेश को जांच करते बताया जाएगा। पुलिसकर्मी चक्रेश की ये कहानियां लोगों को साइबर क्राइम से बचने के लिए जागरूक करेंगी। इन कहानियों में रोमांच का भी ध्यान रखा गया है। उन्होंने बताया कि पहले सोमवार को इस कॉमिक्स की पहली कहानी को तैयार किया गया है। इसे सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित भी किया जा रहा है। अगले सोमवार को भी इसी तरह की कहानी प्रकाशित की जाएगी।
एआई है इस वक्त सबसे बड़ा हथियार
साइबर अपराधी इस वक्त एआई को सबसे बड़ा हथियार बनाकर अपराध कर रहे हैं। एआई के जरिये वह लोगों की आवाज का क्लोन तैयार कर रहे हैं। इससे वह संबंधित व्यक्ति के परिचितों को फोन कर उनसे मदद मांग रहे हैं। इस तरह लोग अपनी गाढ़ी कमाई जरा से डर के लिए साइबर ठगों के खाते में जमा कर रहे हैं। यही नहीं ऐसे भी कई मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें साइबर अपराधी लोगों के चेहरे को ही स्वैप कर वीडियो कॉल कर रहे हैं। कॉल सुनने वाले को अपने परिचित का चेहरा दिखाई देता है। इससे विश्वास भी हो जाता है कि उसी ने फोन किया होगा और वह असल में मुसीबत में है। इस तरह से भी ठगी हो रही है।