दलेर मेहंदी विवाद: मंच पर दिखाई दिलेरी, विरोध के बाद नरम पड़े मंत्री के तेवर, बोले-मुझे लगा था नशे में हैं
सोशल मीडिया पर अभिनेता अनुपम खेर का बयान वायरल हो रहा है। उन्होंने कहा, कैबिनेट मंत्री मंच पर दलेर मेहंदी को बहुत कुछ कह रहे हैं लेकिन मैं दलेर को 25 से 30 साल से जानता हूं। वे एक बड़े कलाकार है। कार्यक्रम में मौजूद नहीं था, हो सकता है कि दलेर जी ने लिप्सिंग की हो।
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कुंजापुरी मेले में गायक दलेर मेहंदी को मंच पर फटकार लगाने के मामले में बॉलीवुड के विरोध के बाद कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के तेवर नरम पड़ गए हैं। अभिनेता अनुपम खेर व राजपाल यादव ने सोशल मीडिया पर दलेर मेहंदी के पक्ष में खड़े होकर कैबिनेट मंत्री के व्यवहार पर विरोध जताया है।
सोशल मीडिया पर अभिनेता अनुपम खेर का बयान वायरल हो रहा है। उन्होंने कहा, कैबिनेट मंत्री मंच पर दलेर मेहंदी को बहुत कुछ कह रहे हैं लेकिन मैं दलेर को 25 से 30 साल से जानता हूं। वे एक बड़े कलाकार है। कार्यक्रम में मौजूद नहीं था, हो सकता है कि दलेर जी ने लिप्सिंग की हो। पिछले दो-तीन साल से उनकी तबीयत ठीक नहीं है। कार्यक्रम में प्रस्तुति देने के लिए अपने वादे के अनुसार आना पड़ा लेकिन सार्वजनिक रूप से आरोप लगाना ठीक नहीं है।
राजपाल यादव के सोशल मीडिया पर वायरल बयान के अनुसार मंच पर एक गायक के साथ अशोभनीय शब्दों व मारपीट की बात कहना शोभा नहीं देता। ऐसा लग रहा जैसे मंत्री ने कला को खरीद लिया लेकिन कला कभी खरीदी नहीं जाती है। कला एक जीवन है। जीवन का सम्मान होना चाहिए। दलेर शराब नहीं पीते, उनका स्वास्थ्य खराब चल रहा है। दलेर मेहंदी के मामले में बॉलीवुड के कई कलाकारों ने मंत्री के व्यवहार का विरोध जताया है।
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बाद में पता लगा कि उनकी तबीयत खराब है-उनियाल
उधर, दलेर मेहंदी को मंच पर फटकार लगाने के बाद कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल का बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें कह रहे मुझे लगा दलेर मेहंदी नशे में है। वो नशा किस चीज का है, ये मैं नहीं जानता। इतने बड़े कलाकार का मेडिकल नहीं करा सकता। बाद में मुझे बताया गया कि उनकी तबीयत खराब थी। यदि उनकी तबीयत ठीक नहीं थी तो कार्यक्रम में मौजूद लोगों को बता देते या कार्यक्रम में नहीं आना चाहिए था।
कार्यक्रम में आने के लिए 35 लाख रुपये लिए और होटल में ठहरने की अलग से व्यवस्था कराई गई। मेरा मकसद संगीत को बदनाम करना नहीं था लेकिन जब 45 मिनट तक परफॉर्मेंस नहीं कर पाए तो जनप्रतिनिधि होने के नाते मैंने उन्हें टोका। जबकि मेरी ऐसी भावना नहीं थी। कलाकार का सम्मान होना चाहिए लेकिन कलाकार को अपने सम्मान के प्रति ध्यान देना चाहिए।