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उत्तराखंड: प्रदेश में बनेगा 160 किमी लंबा रोपवे नेटवर्क, 51 परियोजनाओं से जुड़ेंगे धार्मिक और पर्यटन स्थल

Mon, 21 Sep 2026 05:52 PM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Mon, 21 Sep 2026 05:52 PM IST
सार

पहाड़ों में सफर को आसान बनाने के लिए अब सड़कों के साथ रोपवे नेटवर्क पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार की योजना से तीर्थस्थलों और पर्यटन क्षेत्रों तक पहुंच बेहतर होने के साथ स्थानीय रोजगार और कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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Uttarakhand Plans 160 Km Ropeway Network with 51 Proposed Projects Under Parvatmala Scheme Read All Updates
बैठक - फोटो : सूचना

विस्तार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर रोपवे परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए काम में तेजी लाई जा रही है। प्रदेश की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए रोपवे बेहतर वैकल्पिक परिवहन का साधन है। इससे जहां धार्मिक और पर्यटन स्थलों की पहुंच आसान होगी, वहीं तीर्थाटन, पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कार्यदायी संस्थाओं को आगामी नौ नवंबर तक रोपवे परियोजनाओं के कार्य धरातल पर शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

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उत्तराखंड में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बीते वर्ष 2025 में छह करोड़ से अधिक पर्यटक व तीर्थयात्री पहुंचे हैं। पर्यटक व धार्मिक स्थलों तक सुगम,सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन व्यवस्था के लिए सरकार का रोपवे योजनाओं पर फोकस है। जिस प्रकार से सड़कों पर यातायात के दबाव के साथ वाहन प्रदूषण बढ़ रहा है, उसका बेहतर विकल्प रोपवे व्यवस्था बन सकती है। दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों, जहां सड़क का निर्माण नहीं किया जा सका है, उन क्षेत्रों की मुश्किलें भी रोपवे बनने से कम होंगी।

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सरकार ने रोपवे परियोजनाओं के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल), उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन, शहरी स्थापना एवं भवन निर्माण निगम और पर्यटन विभाग को जिम्मेदारी सौंपी है। पहले चरण में सोनप्रयाग से केदारनाथ, गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब, रानीबाग से हनुमानगढ़ी-कैची धाम, कनकचौरी से कार्तिक स्वामी, जोशीमठ से औली-गोरसों, रैथल से दयारा बुग्याल का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा पुरुकुल से मसूरी तक लगभग 5.2 किमी लंबे रोपवे प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य चल रहा है।

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मेट्रो रेल को हस्तांतरित कीं रोपवे परियोजनाएं

प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं के लिए सरकार ने रोपवे परियोजनाएं मेट्रो रेल निगम को हस्तांतरित कर दी हैं। इसमें रानीखेत से चौबटिया, कसारदेवी से अल्मोड़ा, अल्मोड़ा से द्वाराहाट दूनागिरी, द्वाराहाट से कुकुछीना-पांडुखोली, चौखुटिया से तरगताल-कुकुछीना, चौघानपाटा से बेस अस्पताल, बेस अस्पताल से नवीन कलक्ट्रेट, नवगढ़ क्लब तल्लीताल बाजार से गंगनाथ मंदिर शामिल हैं।

नीलकंठ और हरिद्वार रोपवे पर फोकस

सचिव आवास डॉ. आर राजेश कुमार ने बताया कि सबसे पहले ऋषिकेश त्रिवेणी घाट से नीलकंठ मंदिर और हरिद्वार के इंटीग्रेटेड रोपवे पर फोकस किया जा रहा है। नीलकंठ रोपवे की लंबाई छह किमी होगी। पहले चरण में 4.1 किलोमीटर लंबा रोपवे त्रिवेणी घाट से नीलकंठ महादेव मंदिर तक बनाया जा रहा है। इस परियोजना के पूर्ण होने पर ऋषिकेश में यातायात का दबाव काफी कम हो सकेगा। चंडी देवी से मनसादेवी रोपवे परियोजना के तहत मौजूदा अलाइनमेंट के अतिरिक्त दो समानांतर नए अलाइनमेंट विकसित किए जा रहे हैं।

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उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए रोपवे कनेक्टिविटी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे न केवल धार्मिक और पर्यटन स्थलों की पहुंच आसान होगी, बल्कि सड़कों पर यातायात का दबाव कम होने के साथ ही पर्यावरण की सुरक्षा भी हो सकेगी। पर्यटन गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।  -पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

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