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उत्तराखंड पंचायत चुनाव : दो बच्चों की शर्त पर जोर आजमाइश जारी, सरकार पहुंची है सुप्रीम कोर्ट
Sun, 22 Sep 2019 01:35 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sun, 22 Sep 2019 01:35 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में दो बच्चों की शर्त पर जोर आजमाइश जारी है। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची, तो इस मामले में उससे दो दो हाथ करने को पंचायत जनाधिकार संगठन ने भी कैविएट दाखिल कर दी। पंचायत जनाधिकार संगठन ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि बच्चों से जुड़ी शर्त पर कोई फैसला देने से पूर्व उनका पक्ष भी सुन लिया जाए।
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दूसरी तरफ, संगठन का प्रतिनिधिमंडल शनिवार को राज्य निर्वाचन आयुक्त चंद्रशेखर भट्ट से भी मिला। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि दो बच्चों की शर्त पर हाईकोर्ट के फैसले को गलत ढंग से पेश किया जा रहा है, ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की नामांकन प्रक्रिया के दूसरे दिन शनिवार को भी दो बच्चों की शर्त पर असमंजस की स्थिति बनी रही। हालांकि विभिन्न पदों के लिए दो से ज्यादा बच्चों वाले दावेदारों के नामांकन जमा होने में कहीं दिक्कत नहीं आई। इन स्थितियों के बीच, इस मामले में सरकार से कानूनी लड़ाई लड़ रहे पंचायत जनाधिकार संगठन ने शनिवार को दो स्तरों पर मोर्चा संभाला। एक, दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट में संगठन की ओर से एडवोकेट आयुष नेगी ने कैविएट दाखिल की।
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विदित हो कि हाईकोर्ट ने अपने फैसले में राज्य सरकार के उस फैसले को पलटा है, जिसमें पंचायत चुनाव में दो बच्चों वालों के ही प्रतिभाग करने की व्यवस्था दी गई है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि 25 जुलाई 2019 से पहले जिनके दो से ज्यादा बच्चे भी रहे हों, वह पंचायत चुनाव में भाग ले सकते हैं। इसके खिलाफ शुक्रवार को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रिट दाखिल की थी।
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शनिवार को जनाधिकार संगठन ने दूसरा मोर्चा राज्य निर्वाचन आयोग में संभाला। संगठन के संयोजक जोत सिंह बिष्ट की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल राज्य निर्वाचन आयुक्त से मिला। प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्यों ने कहा कि हाईकोर्ट ने पंचायतीराज संस्थाओं के संबंध में फैसला सुनाया है। इसे गलत ढंग से पेश किया जा रहा है और कहा जा रहा है कि सिर्फ ग्राम पंचायत सदस्य और प्रधान के चुनाव के लिए ही बच्चों की शर्त पर हाईकोर्ट ने फैसला दिया है, जबकि असल स्थिति ये है कि वह फैसला ग्राम पंचायत के अलावा क्षेत्र और जिला पंचायतों के मामले में भी एक साथ लागू होता है। प्रतिनिधिमंडल में संजय भट्ट, शांति रावत और रेनू नेगी भी शामिल रहे।
नामांकन के समय पूछताछ करने वालों पर कार्रवाई करें
राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों से कहा है कि नामांकन फार्म भरते समय यदि किसी से पूछताछ की जाती है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। आयोग को ये शिकायतें मिल रही है कि कई जगहों पर निर्वाचन अधिकारियों के स्तर पर नामांकनपत्रों की बिक्री और उसे जमा करते समय पूछताछ की जा रही है। आयोग ने इसे गंभीरता से लिया है। आयोग की ओर से सचिव रोशनलाल ने शनिवार को जिला निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर निर्देश दिए हैं कि कई जगहों से ये शिकायतें आ रही हैं कि नामांकनपत्रों की बिक्री और उन्हें जमा करते वक्त दावेदारों से पंचायती राज एक्ट और उसमें हुए संशोधन की जानकारी मांगी जा रही है। ऐसा करना उचित नहीं है। दावेदारों से सिर्फ जांच के वक्त पूछताछ की जा सकती है। जिला निर्वाचन अधिकारियों से कहा कि ऐसा करने वाले अफसरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, दो बच्चों की शर्त पर सरकार के संशोधन और उस पर आए हाईकोर्ट के फैसले के बाद मतदाताओं और सरकारी मशीनरी दोनों के सामने असमंजस की स्थिति पेश आ रही है। सभी तरह के नामांकन फार्म हालांकि शामिल करने के निर्देश दिए हैं, इसके बावजूद ग्राम पंचायत और क्षेत्र-जिला पंचायत की व्यवस्था को अलग अलग करके देखा जा रहा है।