हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा, पंचायत चुनाव में धांधली रोकने को क्या उपाय किए?
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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा है कि ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों के चुनावों में होने वाली खरीद फरोख्त और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए पंचायत राज एक्ट में क्या उपाय किए गए हैं।
इन चुनावों में होने वाले भ्रष्टाचार मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने इसकी जानकारी 19 सितंबर तक कोर्ट में शपथपत्र के माध्यम से देने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में देहरादून निवासी विपुल जैन की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।
याचिका में कहा गया था कि जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख के चुनावों में सदस्यों की बड़ी बोली लगती है और वोट खरीदे जाते हैं। वोट के नाम पर जिला पंचायत के सदस्यों को देश-विदेश के टूर पर भेजा जाता है और चुनाव जीतने के बाद प्रत्याशी भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाते हैं।
इस दौरान पंचायत सदस्यों का अपहरण भी किया जाता है जिससे प्रदेश की कानून व्यवस्था बिगड़ती है। पुलिस राजनीतिक दबाव में मामले को दबा देती है। याचिकाकर्ता की ओर से चुनाव व्यवस्था को सुधारने के लिए सरकार को दिशा निर्देश जारी करने की मांग की गई थी।
पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा है कि पंचायत राज एक्ट में चुनाव में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए क्या प्रावधान किए गए हैं। कोर्ट ने इसकी जानकारी 19 सितंबर तक कोर्ट में शपथपत्र के माध्यम से पेश करने को कहा है।