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Uttarakhand Landslide: भूस्खलन का जहां इतिहास नहीं रहा...अब वहां भी दरक रहे हैं पहाड़, खतरा और चुनौती बरकरार
Sun, 08 Sep 2024 06:42 PM IST
अलका त्यागी
अंकित गर्ग, अमर उजाला, देहरादून
अंकित गर्ग, अमर उजाला, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Sun, 08 Sep 2024 06:42 PM IST
सार
पिछले एक से दो साल के दौरान विकसित हुए कुछ भूस्खलन क्षेत्र तो ऐसे हैं, जिसमें कई लोग अपनी जान तक गंवा चुके हैं। इतने ही लोग लापता हैं।
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भूस्खलन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दरकती जमीन और खिसकते पहाड़ों के बीच सक्रिय हो रहे भूस्खलन के नए क्षेत्र खतरा और चुनौती बनकर सामने आ रहे हैं। जमीनी हकीकत बता रही है कि विभिन्न जिलों में पहाड़ों पर 50 से अधिक ऐसी जगह हैं, जहां कभी भूस्खलन का इतिहास नहीं रहा लेकिन अब जान-माल की हानि का कारण बन रहे हैं।
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पिछले एक से दो साल के दौरान विकसित हुए कुछ भूस्खलन क्षेत्र तो ऐसे हैं, जिसमें कई लोग अपनी जान तक गंवा चुके हैं। इतने ही लोग लापता हैं। कुमाऊं में भी नए जोन सक्रिय हुए हैं। इनमें से एक तो सितंबर की शुरुआत में ही मुनस्यारी (पिथौरागढ़) के रलगाड़ी में हुआ। यह ऐसी जगह हुआ है जहां पहले कभी भूस्खलन नहीं हुआ था, लेकिन सबसे ज्यादा भयावह स्थिति गढ़वाल मंडल में हैं। यदि हम अब भी नहीं जागे तो यह तस्वीर आने वाले वर्षों में और भी खतरनाक हो सकती है।
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अनियोजित विकास से बिगड़ी पहाड़ों की सेहत
ऑलवेदर रोड के निर्माण के लिए पर्यावरण को साइड लाइन पर रखकर पहाड़ काटने के जो तरीके अपनाए गए हैं उसने पर्वतों की सेहत को खराब कर दिया है। विभिन्न पर्यटक स्थलों पर अनियोजित और अंधाधुंध तरीके से बहुमंजिला इमारतों के निर्माण ने पर्वतों की बीमारी में और इजाफा किया है। रही सही कसर आबादी के कारण ध्वस्त होती ड्रेनेज व्यवस्था ने कर दी है।
जहां-जहां भी भूस्खलन हो रहा है, वहां पर जरूरी कार्य कराए जा रहे हैं। जोशीमठ में राहत एवं निर्माण कार्यों के लिए केंद्र सरकार ने बजट स्वीकृत कर दिया है, जो जल्द मिलने की उम्मीद है। इसके बाद कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।
- विनोद कुमार सुमन, सचिव आपदा प्रबंधन