{"_id":"66dd9ef3d108034ddc089d78","slug":"earth-vibration-will-tell-when-landslide-will-occur-early-warning-system-will-made-for-that-2024-09-08","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Early Warning System: धरती के कंपन से पता चलेगा कब होगा भूस्खलन...बचाव के लिए मिलेगा समय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Early Warning System: धरती के कंपन से पता चलेगा कब होगा भूस्खलन...बचाव के लिए मिलेगा समय
Sun, 08 Sep 2024 06:27 PM IST
अलका त्यागी
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Sun, 08 Sep 2024 06:27 PM IST
सार
वैज्ञानिक प्रो. एमएल शर्मा ने बताया कि जमीन में जहां भी हरकत होती है उससे वाइब्रेशन पैदा होता है। सिस्मोग्राफ पर दर्ज कंपन के आधार पर वापस सिग्नल के पीछे जाकर पता किया जाता है कि ये सिग्नल भूकंप का था या भूस्खलन का।
विज्ञापन
भूस्खलन
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
धरती के भीतर हो रही हलचल आपदा की आहट होती है लेकिन अब इसी कंपन के जरिये एक अलर्ट सिस्टम विकसित किया जा रहा है। इसके जरिये भूस्खलन का पता 30 मिनट से लेकर दो दिन पहले तक लगा लिया जाएगा। टिहरी में 18 ब्रॉडबैंड स्टेशन लगाए गए हैं जहां इस सिस्टम का परीक्षण किया जा रहा है।
विज्ञापन
वैज्ञानिक प्रो. एमएल शर्मा ने बताया कि जमीन में जहां भी हरकत होती है उससे वाइब्रेशन पैदा होता है। सिस्मोग्राफ पर दर्ज कंपन के आधार पर वापस सिग्नल के पीछे जाकर पता किया जाता है कि ये सिग्नल भूकंप का था या भूस्खलन का। इसका अध्ययन करके यह भी पता लगाया जा सकता है कि भूस्खलन कितने समय बाद होगा। रॉक थोड़ा सा भी खिसकती है तो उसके दो तीन दिन बाद बड़ी मात्रा में मलबा खिसककर नीचे आने की आशंका होती है।
विज्ञापन
इस सिस्टम के लिए टिहरी के चारों ओर लगे ब्राडबैंड स्टेशन से हाल ही में चमोली में आई त्रासदी के दौरान भी कुछ सिग्नल रिकार्ड किए गए। उन्होंने बताया कि छह माह पहले आईआईटी रुड़की के भूकंप विभाग के वैज्ञानिक एवं शोधार्थियों ने टिहरी में लगे 18 ब्राडबैंड स्टेशनों के जरिये इसका अध्ययन शुरू किया है। करीब एक साल में तैयार होने वाले इस अर्ली वार्निंग सिस्टम से पूर्वानुमान शुरू कर दिया जाएगा। इसके बाद इसे राज्य के किसी भी हिस्से में स्थापित किया जा सकता है।
विज्ञापन
India China Border: वाहनों की आवाजाही के लिए तीसरे दिन खुला मलारी हाईवे, सेना और आईटीबीपी के जवानों को राहत
सिक्किम में कम्यूनिटी बेस्ड अर्ली वार्निंग सिस्टम
प्रो. शर्मा ने बताया कि सिक्किम में पहाड़ के ऊपर एक प्वॉइंटर लगा दिया जाता है। यहां पर कोई हलचल होती है तो भूस्खलन का पता पहले ही चल जाता है। इसके अलावा लेजर लाइट से भी खतरे का पता चलता है। पिछले दिनों वायनाड में आई आपदा के समय गृहमंत्री अमित शाह ने बताया था कि अर्ली वार्निंग देने वाले दुनिया में सिर्फ चार देश है, जिनमें भारत एक है। इसके जरिये सिर्फ भारी वर्षा, तेज गर्मी, तूफान और चक्रवात के लिए अलर्ट किया जा सकता है।