उत्तराखंड: आईआईटी रुड़की निदेशक व अन्य पर एफआईआर दर्ज करने का सीजेएम का आदेश हाईकोर्ट ने किया खारिज
आईआईटी के कनिष्ठ सुपरिंटेंडेंट धीरज उपाध्याय पर आरोप था की उन्होंने एक करोड़ पांच लाख रुपये का गबन किया है, जिसे उपाध्याय ने स्वीकार भी कर लिया था।
विस्तार
नैनीताल हाईकोर्ट ने आईआईटी रुड़की के निदेशक और विभिन्न अधिकारियों के खिलाफ गबन के मामले में एफआईआर दर्ज कराने के सीजेएम रुड़की के आदेश को खारिज कर दिया है।
एक करोड़ पांच लाख रुपये के गबन का आरोप
न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। आईआईटी के कनिष्ठ सुपरिंटेंडेंट धीरज उपाध्याय पर आरोप था की उन्होंने एक करोड़ पांच लाख रुपये का गबन किया है, जिसे उपाध्याय ने स्वीकार भी कर लिया था। आईआईटी प्रशासन ने दिसंबर 2000 में उपाध्याय की सेवाएं समाप्त करते हुए उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
बाद में आईआईटी के एक पूर्व कर्मचारी मनपाल शर्मा ने मामले में निदेशक अजीत चतुर्वेदी, सहायक रजिस्ट्रार जीतेंद्र डिमरी तथा डीन मनीष श्रीखंडे के खिलाफ भी प्राथमिकी किए जाने की मांग करते हुए सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया गया था जिस पर कोर्ट ने इन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए थे।
किसी एक मामले में दो बार एफआईआर नहीं की जा सकती
इस आदेश को 23 दिसंबर को इन अधिकारियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। 28 दिसंबर 2020 को हाईकोर्ट ने इस आदेश को स्थगित कर दिया था। मामले की सुनवाई के दौरान आईआईटी के निदेशक अजीत चतुर्वेदी की ओर से अधिवक्ता विपुल शर्मा ने चर्चित टीवी एंकर अर्नब गोस्वामी के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि किसी एक मामले में दो बार एफआईआर नहीं की जा सकती।
जबकि इस प्रकरण में पूर्व में ही आईआईटी प्रशासन की ओर से गबन के आरोपी के खिलाफ एफआईआर की जा चुकी थी ऐसे में इसी मामले में अब दूसरी एफआईआर नहीं की जा सकती। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने एफआईआर कराए जाने के निचली अदालत के आदेश को खारिज कर दिया।