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उत्तराखंड : विधायकों की राय से लिया था गैरसैंण मंडल का फैसला - त्रिवेंद्र सिंह रावत
Sun, 11 Apr 2021 09:16 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sun, 11 Apr 2021 09:16 AM IST
सार
- कैबिनेट के फैसले से असहज पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा गैरसैंण के भावी विकास के लिए जरूरी था मंडल बनाया जाना, गढ़वाल और कुमाऊं की संस्कृति का प्रयाग बनाने की थी कोशिश
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त्रिवेंद्र सिंह रावत
- फोटो : अमर उजाला (File Photo)
विस्तार
गैरसैंण को मंडल बनाए जाने के फैसले को ठंडे बस्ते में डालने से पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत असहज हैं। हालांकि, उन्होंने इसे नई सरकार की अपनी सोच करार दिया है। त्रिवेंद्र ने कहा कि गैरसैंण मंडल की घोषणा करने से पहले उन्होंने वहां के विधायकों की राय ली थी। क्योंकि उन्हें इस बात आशंका थी कि मंडल बनाए जाने से इस तरह के सवाल उठेंगे।
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पूर्व मुख्यमंत्री ने मंडल बनाए जाने के अपने फैसले के समर्थन में तर्क दिया कि ग्रीष्मकालीन राजधानी परिक्षेत्र के सुनियोजित विकास और भविष्य की सोच के साथ यह घोषणा की गई थी। वह चाहते थे कि गैरसैंण मंडल गढ़वाल और कुमाऊं की मिलीजुली संस्कृति का नया संगम बने।
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त्रिवेंद्र डिफेंस कालोनी स्थित आवास पर शनिवार को मीडिया कर्मियों से बातचीत कर रहे थे। तीरथ मंत्रिमंडल की बैठक में गैरसैंण मंडल के फैसले को स्थगित करने से जुड़े सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, तब सभी ने कहा कि किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। क्योंकि गैरसैंण उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी है। गैरसैंण के भावी विकास की दृष्टि से भी यह जरूरी था। गैरसैंण राजधानी परिक्षेत्र के सुनियोजित विकास के लिए उन्होंने 10 साल के लिए 25 हजार करोड़ का रोडमैप बनाया था। उस पर काम भी शुरू हो गया है।
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गैरसैंण भराड़ीसैंण में नियमित रूप से विधानसभा सत्र होंगे, वहां पर कानून व्यवस्था बनाने, प्रदेश की जनता की मांगों के त्वरित निपटारे और राजधानी परिक्षेत्र के सुनियोजित विकास के लिए वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस के नियमित रूप से वहां बैठने के लिए गैरसैंण को कमिश्नरी बनाने की सोच थी। सोच यही थी कि धीरे-धीरे राजधानी परिक्षेत्र का सुनियोजित और तेजी से विकास हो सके।
उन्होंने कहा कि कुछ लोगों का कहना था कि मंडल में पिथौरागढ़ को शामिल करना चाहिए था। इस पर हमने विचार करने की बात कही थी। जहां तक गढ़वाल और कुमाऊं की अलग-अलग संस्कृति का सवाल है। अल्मोड़ा को कुमाऊं के एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र के रूप में जाना जाता है। संस्कृति गंगा की तरह है कि जो भी उसमें मिलता है वह कभी अपना रूप नहीं बदलती है। बल्कि उसे आत्मसात कर लेती है। गंगा में जितने भी संगम मिलते हैं वह गंगा ही रहती है। इसी तरह से संस्कृति होती है। जहां तक कैबिनेट और सरकार का मंडल को स्थगित करने का निर्णय है, उस पर वह कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। यह सरकार की अपनी सोच और निर्णय है।
मंडल स्थगित करना जनभावनाओं के अनुरूप : भट्ट
नैनीताल-ऊधमसिंह नगर के भाजपा सांसद अजय भट्ट ने कहा कि गैरसैंण मंडल को स्थगित करने के तीरथ सरकार के फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से कुमाऊं मंडल के बागेश्वर और अल्मोड़ा जिले में काफी विरोध हो रहा था। प्रदेश मंत्रिमंडल का यह फैसला जनभावनाओं के अनुरूप है। उन्होंने मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत का आभार व्यक्त किया। उन्होंने जनप्रतिनिधि होने के नाते जनभावनाओं को सरकार के सामने रखा था। ब्यूरो