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उत्तराखंड : आयुर्वेद में है इलाज तो खोल दें कोविड सेंटर, रामदेव के 25 सवालों पर संतों और चिकित्सकों ने कसे तंज

Wed, 26 May 2021 09:42 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 26 May 2021 09:42 AM IST
सार

योगाचार्य और डॉक्टरों ने कहा है कि बाबा जी यह समय सवाल पूछने का नहीं, बल्कि साथ मिलकर काम करके राष्ट्र को कोरोना से मुक्त करने का है।

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uttarakhand news : saint and doctors says to ramdev, if treatment is available in ayurveda then open covid center
योग गुरु बाबा रामदेव - फोटो : ANI

विस्तार

एलोपैथी पद्धति से कोविड समेत अलग-अलग बीमारियों के इलाज को लेकर योग गुरु बाबा रामदेव के आईएमए और फार्मा कंपनियों से 25 सवाल पूछे जाने पर हरिद्वार के संतों और चिकित्सकों ने तीखे तंज कसने के साथ ही रामदेव को सुझाव भी दिए हैं।

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योगाचार्य और डॉक्टरों ने कहा है कि बाबा जी यह समय सवाल पूछने का नहीं, बल्कि साथ मिलकर काम करके राष्ट्र को कोरोना से मुक्त करने का है। जो सवाल बाबा रामदेव पूछ रहे हैं, क्या उनके पास आयुर्वेद में इलाज है। ऐसा है तो कोविड के इलाज के लिए आयुर्वेदिक कोविड सेंटर खोले जाएं। रामदेव के सवालों ने कोविड इलाज में जुटे एलोपैथी चिकित्सकों का मजाक भी उड़ाया है। 
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स्वामी रामदेेव का योग और आयुर्वेद के क्षेत्र में योगदान स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में एलोपैथी के डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ का जो अभूतपूर्व सहयोग है, वह भगवान का ही साक्षात स्वरूप है। उनका मनोबल किसी भी रूप में गिराना रोगियों के और राष्ट्र हित में नहीं है। स्वामी रामदेव से अनुरोध है कि आप इस प्रकार के संदेश सोशल मीडिया पर प्रसारित न करें और देशहित और चिकित्सा पद्धतियों के हित में उन्हें हटा दें। बिना किसी पूर्वाग्रह से मामला समाप्त भी करें।
- बिपिन जोशी, योगाचार्य 

जब आयुर्वेद पद्धति पर इतना विश्वास है तो आचार्य बालकृष्ण एम्स में क्यों भर्ती हुए थे। उन्होंने तो कई प्रकार की संजीवनी बताई जाने वाली औषधियां खाई थीं। बालकृष्ण ने क्यों नहीं आयुर्वेद पद्धति से उपचार कराया। यह जरूर है कि 100 साल पहले केवल आयुर्वेद पद्धति थी, लेकिन इनके यहां वह भी नहीं है। ये लोग कभी डिग्री विवाद में रहते तो कभी ऐसे विवाद खड़े करते हैं। कोरोना काल में जिस पद्धति से मरीज की जान बच जाए, वह सभी विधि अच्छी हैं। तभी जाकर राष्ट्र कोरोना से जीत पाएगा। इस प्रकार के बयान देकर डॉक्टरों का मनोबल गिराने का काम किया जा रहा है, जो फिलहाल के समय में राष्ट्रहित में नहीं है।
- स्वामी अच्युतानंद तीर्थ महाराज, भूमापीठाधीश्वर  

रामदेव जी अहंकार में...

रामदेव जी अहंकार में आ गए हैं। एलोपैथी और आयुर्वेद दोनों का महत्व है। अगर एलोपैथी का महत्व नहीं है तो आचार्य बालकृष्ण क्यों एम्स में गए थे। आयुर्वेद में कोविड का कारगर इलाज है तो उनको कोविड सेंटर खोलने चाहिए। कहने से कुछ नहीं होता, करके दिखाएं। एलोपैथिक पर सवाल खड़े करना अनुचित है। व्यापार और अहंकार को छोड़कर सबके साथ मिलकर कोरोना जैसी महामारी से लड़ने में  सहयोग दें।
- स्वामी शिवानंद सरस्वती, परमाध्यक्ष, मातृसदन 

कोई भी पैथी पूर्ण नहीं है। एलोपैथी के डॉक्टर इस समय सैनिकों की तरह कार्य कर रहे हैं। वे अपने परिवार और छोटे-छोटे बच्चों को छोड़कर कोरोना मरीजों के बीच रहकर उनका जीवन बचा रहे हैं। ऐसे समय में रामदेव को डॉक्टरों का मनोबल गिराने की बजाय उनका हौसला बढ़ाना चाहिए ताकि देश से कोरोना से जीत सके।
- डॉ. संध्या शर्मा, पूर्व अध्यक्ष एएमए

एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी सबकी अपनी गरिमा और सीमाएं हैं। कोई भी शत प्रतिशत नहीं है। दुकानदारी के चक्कर में गलत न कहें। आपके हिसाब से तो यह वैक्सीन भी फर्जी है। 1000 से ज्यादा मेडिकल वाले इस महामारी से लड़ने में प्राण गवां चुके हैं तो कोरोनिल लेने वाले क्या बच गए। रामदेव ने जो सवाल पूछे हैं क्या वे स्थायी इलाज का दावा कर सकते हैं। आप कुछ भी दावा करने के शौकीन हैं, जबकि आपकी सलाह पर विश्वास करने पर कई लोगों की मृत्यु समय से पहले हो गई।
- डॉ. दिनेश सिंह, अध्यक्ष, आईएमए

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