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परिवार प्रबोधन कार्यक्रम: मोहन भागवत ने पढ़ाया मानवता का पाठ, कुटुंब के लिए दिए छह मंत्र
Sun, 10 Oct 2021 10:40 PM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी
Published by: अलका त्यागी
Updated Sun, 10 Oct 2021 10:40 PM IST
सार
आम्रपाली संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि घर में अपनी भाषा बोलनी चाहिए। हालांकि, कोई अन्य भाषा भी सीखने का चलन बढ़ना चाहिए। कोई पर्व, त्योहार है तो अपने पारंपरिक वेषभूषा धारण करें।
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मोहन भागवत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सर संघचालक मोहन भागवत ने रविवार को परिवार प्रबोधन कार्यक्रम में कुटुंब के लिए छह मंत्र दिए। उन्होंने भाषा, भोजन, भजन, भ्रमण, भूषा और भवन के जरिये अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश दिया। कहा कि जैसे यहां पर परिवार प्रबोधन हो रहा है, उसी तरह सप्ताह में सभी परिवार कुटुंब प्रबोधन करें। इसमें एक दिन परिवार के सभी लोग एक साथ भोजन ग्रहण करें, इसमें अपनी परंपराओं, रीति रिवाजों की जानकारी दें। फिर आपस में चर्चा करें और एक मत बनाएं और उस पर कार्य करें।
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आम्रपाली संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि घर में अपनी भाषा बोलनी चाहिए। हालांकि, कोई अन्य भाषा भी सीखने का चलन बढ़ना चाहिए। कोई पर्व, त्योहार है तो अपने पारंपरिक वेषभूषा धारण करें। भागवत ने कहा कि हमारे देश में करीब 800 प्रकार के भोजन हैं, इनका सेवन करें। उत्तराखंड के कई प्रकार के भोजन हैं, उनका सेवन करना चाहिए। कभी-कभार बाहर का भोजन तो ठीक है, लेकिन सामान्य तौर पर अपनी आबोहवा के अनुकूल भोजन ग्रहण करें।
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भागवत ने भ्रमण पर कहा कि पूरी दुनिया देखनी चाहिए, लेकिन काशी, चित्तौड़गढ़ से लेकर हल्दीघाटी, जलियांवाला बाग भी देखना चाहिए। अपने घर के अंदर महात्मा गांधी, भगत सिंह, डॉ. आंबेडकर, वीर सावरकर आदि के चित्र लगाने चाहिए। घर पर वेलकम शब्द क्यों? सुस्वागत क्यों नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि रामायण में कुटुंब की कहानी है, इससे प्रेरणा लेनी चाहिए। कुटुंब बनेगा तो उससे समाज बनेगा। इससे सोया हुआ राष्ट्र जागेगा और भारत विश्व गुरु बनेगा। उन्होंने कहा कि गृहस्थ आश्रम में रहने वालों के ऊपर पूरे समाज की जिम्मेदारी होती है। अपने परिवार के साथ आसपास के लोगों की भी चिंता करें।
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इससे पहले सर संघचालक मोहन भागवत, क्षेत्र संघचालक डॉ. राम उजागर, प्रांत संघचालक डॉ. राकेश भट्ट, विभाग संघचालक सूर्य प्रकाश टोंक, जिला संचालक डॉ. नीलांबर भट्ट, नगर संचालक विवेक कश्यप ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। संबोधन सुनने के लिए एक हजार परिवारों के लोग पहुंचे थे। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण भी किया गया।
छोटे-छोटी बातों के जरिये बड़ा संदेश
भागवत ने करीब एक घंटे तक संबोधन दिया। उन्होंने छोटी- छोटी बातों और उदाहरणों के जरिये बड़ा संदेश देने की कोशिश की। उन्होंने पर्यावरण, जल संरक्षण से लेकर दकियानूसी विचारों पर अपनी बात रखी। कहा कि हरित घर बनाएं। परिवार के लोग एक पौधा जरूर लगाएं। हरियाली की वृद्धि करें। पर्यावरण को जीतना नहीं है, उसे देते भी रहना है। पानी को बचाना चाहिए। उन्होंने छुआछूत जैसी दकियानूसी बातों से दूर रहने के लिए कहा। कहा कि छुआछूत को नकारें। यह भी कहा कि भारत माता के सब लाल हैं। हममें कोई भेद नहीं है। उन्होंने सामाजिक समरसता की बात कही।