उत्तरांचल: मांगों को लेकर रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने 15 जुलाई से दी हड़ताल की चेतावनी
यूनियन के प्रांतीय महामंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि तीन जुलाई को निगम प्रबंधन को एक मांगपत्र दिया गया था लेकिन उस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने वेतन काटने सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर परिवहन निगम को आंदोलन नोटिस दे दिया है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि 15 जुलाई को 24 घंटे का कार्यबहिष्कार करेंगे। इसके बाद भी मांग न मानी तो 20 जुलाई को बैठक बुलाकर अनिश्चितकालीन कार्यबहिष्कार पर फैसला लिया जाएगा।
यूनियन के प्रांतीय महामंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि तीन जुलाई को निगम प्रबंधन को एक मांगपत्र दिया गया था लेकिन उस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब निगम ने बोर्ड बैठक में वेतन कटौती सहित कई कर्मचारी विरोधी फैसले लिए हैं। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। अभी भी कर्मचारियों का चार माह का वेतन लंबित है।
उन्होंने निगम के प्रबंध निदेशक को एक मांग पत्र और आंदोलन का नोटिस दे दिया है। सभी कर्मचारी 15 जुलाई की मध्य रात्रि से 16 जुलाई तक 24 घंटे पूर्ण कार्यबहिष्कार करेंगे। इसके बाद भी मांगें न मानी तो 20 जुलाई को दोपहर 12 बजे प्रांतीय कार्यकारिणी की वर्चुअल बैठक बुलाकर अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया जाएगा।
यह हैं मांगें
-निगम की पांच जुलाई को हुई बोर्ड बैठक में आधा वेतन देने का निर्णय हुआ है। इसे तत्काल निरस्त किया जाए।
-बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णय कर्मचारियों से वेतन से कटौती न कर ऋण समितियों को भुगतान न करने के निर्णय को निरस्त किया जाए।
-कर्मचारियों के लम्बित वेतन एवं अन्य देयकों का भुगतान किया जाये।
-परिवहन निगम में कार्यरत् समस्त विशेष श्रेणी एवं संविदा कर्मियों को उच्च न्यायालय नैनीताल के निर्देशानुसार नियमित कर्मियों की भांति समान काम, समान वेतन तथा अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएं। रिक्त पदों पर संविदा या विशेष श्रेणी के कर्मियों का वरिष्ठता के आधार पर नियमितीकरण किया जाए।
-कर्मचारी यूनियन की ओर से तीन जुलाई को दिए गए मांगपत्र पर सकारात्मक कार्रवाई की जाए।
-मुख्यालय स्तर से एसीपी के संबंध में हुए निर्णय में अनुशासनिक प्रकरणों में दंडित हुये कर्मचारियों के भविष्य प्रभाव सहित दण्ड एवं बिना भविष्य प्रभाव सहित दंड स्वरूप की जा रही वेतन कटौती तथा इसी प्रकार उन पदोन्नतियों के संबंध में जिनमें कर्मचारी का वेतनबैंड या ग्रेड-पे उच्चीकृत नहीं होता है, के संबंध में की जा रही वेतन कटौती के निर्णय को निरस्त किया जाए।
परिवहन निगम कर्मियों का वेतन कटेगा नहीं, आधा-आधा मिलेगा
-निगम के एमडी ने बोर्ड बैठक में हुए फैसले के तहत शासन को भेजा बजट का प्रस्ताव
अब सरकार को लेना है बजट पर फैसला, चार माह से लटका हुआ है वेतन
परिवहन निगम के कर्मचारियों का वेतन निगम काटेगा नहीं बल्कि आधा-आधा देगा। वेतन देने के लिए निगम ने बुधवार को शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। शासन से बजट जारी होने के बाद वेतन जारी कर दिया जाएगा। घाटे से जूझ रहे परिवहन निगम में तंगी की वजह से चार माह से कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल पाया है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद निगम ने पहले जनवरी फिर फरवरी माह का वेतन जारी कर दिया था।
अब पांच जुलाई को हुई बोर्ड बैठक में वेतन और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के भुगतान के लिए शासन से 151 करोड़ 88 लाख रुपये लेने का प्रस्ताव पास किया गया था। निगम ने बुधवार को इस बजट की मांग के लिए शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। उधर, निगम ने स्पष्ट किया है कि सभी कर्मचारियों को पूरा वेतन दिया जाएगा। अप्रैल, मई, जून का आधा वेतन देने के बाद निगम अपनी कमाई के साथ ही बाकी का आधा वेतन एरियर के तौर पर भुगतान करेगा।
हमने शासन को बजट के लिए प्रस्ताव भेज दिया है। किसी भी कर्मचारी का वेतन काटा नहीं जाएगा। केवल आधा वेतन पहले दिया जाएगा और आधा वेतन एरियर के तौर पर भुगतान किया जाएगा। -अभिषेक रोहेला, प्रबंध निदेशक, परिवहन निगम
बजट न होने से अटकी मरम्मत, पहाड़ों में रोडवेज बस सेवा लड़खड़ाई
कोविड कर्फ्यू से आर्थिक रूप से पस्त हुए परिवहन निगम की बस सेवा पर असर नजर आने लगा है। पहाड़ों में रोडवेज की बस सेवा लड़खड़ा गई है। पर्वतीय डिपो की 30 से अधिक बसों के पहिये मेंटिनेंस न हो पाने की वजह से थम गए हैं। इससे मसूरी सहित पहाड़ों में जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थापना के बाद से ही घाटे में चल रहे परिवहन निगम को कोरोना की पहली लहर में लगाए गए लॉकडाउन ने जोर का आर्थिक झटका दिया था। दूसरी लहर में भी लंबे कोविड कर्फ्यू ने इस घाटे को और बढ़ा दिया।
पैसा न होने की वजह से निगम जहां चार माह से कर्मचारियों को वेतन भी नहीं दे पा रहा है। बसों की मरम्मत के लिए भी पैसा भी नहीं बचा है। कई बसों के पार्ट्स लगने हैं। टायर भी बदले जाने हैं लेकिन निगम के पास पैसा न होने की वजह से यह काम समय से नहीं हो पाए।
मसूरी के लिए कई घंटे इंतजार के बाद मिली बसें
मसूरी जाने वाले यात्रियों को 30 से 40 मिनट में बस मिल जाती थी। वहीं, बुधवार को कई-कई घंटे इंतजार करना पड़ा। मसूरी बस स्टैंड पर यात्रियों की भारी भीड़ गर्मी में बिलबिलाती नजर आई।
निगम के पास बजट की कमी थी, जिस वजह से बसों के पार्ट्स और टायर नहीं आ पाए थे। अब टायरों का भुगतान कर दिया गया है। उम्मीद है कि एक-दो दिन में बस सेवा सुचारु हो जाएगी।
-दीपक जैन, महाप्रबंधक संचालन, परिवहन निगम