उत्तराखंड: जंगल की आग से प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर अभी तस्वीर साफ नहीं
- पर्यावरण नियंत्रण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने किया इनकार
- दिल्ली पर कोई प्रभाव संभव नहीं लगता: प्रमुख सचिव वन
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उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग से दिल्ली के वायु की गुणवत्ता के प्रभावित होने से राज्य पर्यावरण नियंत्रण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इनकार किया है। बोर्ड का कहना है कि प्रदेश में हवा की गुणवत्ता के प्रभावित होने का मामला अभी तक सामने नहीं आया है।
उत्तराखंड में आग से सर्दियों में ही जंगल सुलगने शुरू हो गए थे। अब तक 1600 हेक्टेयर से ज्यादा जंगल वनाग्नि से प्रभावित हो चुका है। बीच-बीच में बारिश होने से जंगल में आग बुझाने में वन विभाग को सफलता मिल भी रही है।
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दूसरी ओर, बारिश कम होने से नए वन क्षेत्रों के आग की चपेट में आने के मामले भी सामने आ रहे हैं। इतना होने पर भी प्रदेश में प्रदूषण के बढ़ने का मामला सामने नहीं आया है। पर्यावरण नियंत्रण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस पर निगरानी भी रखे हुए है। बोर्ड के अध्यक्ष और प्रमुख सचिव वन आनंद वर्द्धन के मुताबिक वनाग्नि से दिल्ली का पर्यावरण प्रभावित होने की जानकारी अभी सामने नहीं आई है। उत्तराखंड में भी जंगल की आग से पर्यावरण के प्रदूषित होने का मामला सामने नहीं आया है।
पराली जलाने पर रहती है सुप्रीम कोर्ट की निगाह
उत्तराखंड में पराली जलाने के मामले अधिकतर ऊधमसिंह नगर जिले में सामने आते हैं। पंजाब में इस तरह की समस्या अधिक है, लेकिन ऊधमसिंह नगर के मामलों को देखते हुए उत्तराखंड को भी इसमें शामिल किया गया है। पंजाब और आसपास के क्षेत्रों में पराली जलाने से दिल्ली की हवा प्रभावित होती है। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है।
भयावह होती जा रही जंगलों की आग
हल्द्वानी वन विभाग और ग्रामीणों के तमाम प्रयासों के बावजूद जंगलों की आग पर काबू होता नहीं दिख रहा है। जंगलों की आग दिन ब दिन भयावह होती जा रही है। बुधवार को भी कुमाऊं में कई जगहों पर जंगलों में आग धधकती रही। कई स्थानों पर आबादी क्षेत्र तक यह आग पहुंच गई।
चंपावत वन प्रभाग के अंतर्गत बाराकोट, लोहाघाट और पाटी क्षेत्र के जंगलों में 24 घंटों में आग की 11 घटनाओं में तीन हेक्टेयर वन संपदा नष्ट हो गई है। इस दौरान आठ गोशालाएं जंगल की आग की चपेट आईं। चंपावत के पास चौड़ा, राजपुरा, गौड़ी, पाटी के रीठा साहिब, लोहाघाट के गंगनौला, मायावती और फर्नहिल के जंगल आग की चपेट में हैं। मायावती आश्रम के पास के जंगलों में वक्त पर आग पर काबू किए जाने से वन्य जीव सुरक्षित हैं।
लोहाघाट क्षेत्र में आग की घटनाओं की रोकथाम के लिए मां पूर्णागिरि मेले से अग्निशमन इकाई को वापस बुलाने से तीन दिन के भीतर आग की आठ घटनाओं पर काबू पाया गया। चंपावत जिले में इस बार फायर सीजन में अब तक की 49 घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें 40.05 हेक्टेयर जंगल जले हैं।
बागेश्वर के गढ़खेत रेंज के रौल्याना के जंगल में मंगलवार की रात आग लग गई। आग से वनस्पति को खासा नुकसान पहुंचा है। डीएफओ बीएस शाही के अनुसार शीतकाल से अब तक जिले में जंगल में आग लगने की 125 से अधिक घटनाएं हो चुकीं हैं। इनमें 180 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुए हैं।
नैनीताल में पंतनगर बायोटेक्नोलॉजी संस्थान तक पहुंची जंगल की आग
नैनीताल के समीप पटवाडांगर क्षेत्र के जंगल बुधवार को आग से धधक गए। आग पंतनगर बायोटेक्नोलॉजी संस्थान के चारों ओर फैल गई। पूरे दिन संस्थान के लगभग 40 कर्मचारियों व वन विभाग की दो टीमों ने आग को संस्थान तक पहुंचने से रोका। जंगल की आग संस्थान के पुराने भवनों के समीप पहुंच चुकी थी। गरमपानी से मिली जानकारी के मुताबिक ग्राम पंचायत छियोड़ी धूरा के जंगलों में बुधवार को लगी आग आबादी क्षेत्र तक आ पहुंची। आग छियोड़ी धूरा में एक गोशाला तक पहुंच गई जिस पर बमुश्किल काबू पाया गया।