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कार्यपालिका की जवाबदेही के लिए एक एसओपी तैयार हो: ओम बिरला

Fri, 08 Jan 2021 11:30 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 08 Jan 2021 11:30 PM IST
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uttarakhand news : panchayat introduction seminar in dehradun today
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस परिचय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे - फोटो : पीटीआई (file photo)

लोक सभा के अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि पंचायतों सहित सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं का दायित्व है कि वे कार्यपालिका के कार्यों पर नियंत्रण रखते हुए उनकी जवाबदेही तय करें। इसके लिए उन्होंने पूरे देश में एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) तैयार करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि इस एसओपी का अनुसरण देश की सभी लोकतांत्रिक संस्थाएं करें। वह शुक्रवार को देहरादून के एक होटल में उत्तराखंड की जिला पंचायतों के लिए ‘पंचायती राज व्यवस्था: विकेंद्रीकृत लोकतंत्र का सशक्तीकरण’ विषय पर आयोजित सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे। बिरला ने कहा कि पंचायती राज संस्थाएं लोकतंत्र के सबसे मजबूत स्तंभ हैं। इनके सदस्य जनता के बीच से चुन कर आते हैं और इनसे जनता की अत्यधिक अपेक्षाएं और आकांक्षाएं होती हैं।

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उन्होंने सुझाव दिया कि ग्राम सभा की बैठक को और प्रभावी बनाने के लिए कुछ नियमों का विकास करने की आवश्यकता है। जैसे ग्रामसभा की बैठक की अग्रिम सूचना गांव के सभी लोगों को सात दिन या जितनी अवधि आवश्यक हो, उतनी पहले दी जाए। ग्राम सभा की साल में कम से कम चार बैठकें हों। साथ ही गांव के विकास के लिए एक साल की अल्पकालिक एवं पांच साल की दीर्घकालिक योजनाओं का निर्धारण किया जाए। एक ग्राम पंचायत में विशेषकर उन गांवों का चुनाव किया जाए, जो पिछड़े हों तथा जहां सुविधाओं का अभाव हो।
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इसके अलावा निधियों के उपयोग के संबंध में भी व्यापक चर्चा के बाद निर्णय लिए जाएं कि विकास के किन महत्वपूर्ण कार्यों पर धन का व्यय करना है। प्रत्येक बैठक में लिए निर्णयों में हुई प्रगति की अगली बैठक में समीक्षा की जाए। क्षेत्रीय पंचायत की बैठक का पहला घंटा उच्च सदन के प्रश्न काल की तरह हो। अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे नवाचारों को एक दूसरे से साझा करें। कार्यक्रम में उत्तराखंड की पंचायती राज संस्थाओं के लगभग 42000 प्रतिभागियों ने वर्चुअल भागीदारी की। इस कार्यक्रम में सांसद अजय टम्टा, लोकसभा के महासिचव उत्पल कुमार, प्रभारी सचिव पंचायती राज हरिचंद्र सेमवाल समेत जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लाक प्रमुख व पंचायती राज संस्थाओं के सदस्य भी शामिल हुए। 

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पंचायतों की आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका : त्रिवेंद्र

वर्चुअल माध्यम से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि पंचायतें आज लोकतंत्र की मूलभूत इकाइयां हैं, जो सामाजिक न्याय के साथ आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। विशेषकर देवभूमि में लोगों तक विकास पहुंचाने और उसमें सबकी सहभागिता सुनिश्चित करने में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत एक मजबूत लोकतंत्र है। इसकी मजबूती का रास्ता ग्राम पंचायत से होकर आता है। इसलिए हमें गांवों के आर्थिक हालातों को और मजबूत करना होगा। ग्राम विकास में भी पंचायतों की विशेष भूमिका है। उन्होंने ग्राम प्रधानों को सुझाव दिया कि उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों में सुरक्षा करने वाले प्रहरियों से जाकर मिलें और उनका मनोबल बढाएं। --

भारत को श्रेष्ठ बनाना है तो सोच बड़ी रखनी होगी : निशंक
केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि यदि हमें गांवों, समाज और भारत को श्रेष्ठ बनाना है तो हमें बड़ी सोच रखनी पड़ेगी। वह सम्मेलन के दूसरे सत्र उत्तराखंड के प्राकृतिक संसाधनों और उनके संरक्षण संवर्द्धन में पंचयायती राज संस्थाओं की भूमिका विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने ऑनलाइन जुड़े जनप्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे प्रधानमंत्री के सुझाए आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए ईमानदारी, पारदर्शिता के जज्बे के साथ जुटें।

पंचायतों में ई गर्वनेंस का प्रयोग जरूरी : प्रेमचंद
विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था के माध्यम से हम विकेंद्रीकृत लोकतंत्र को अत्यधिक बलशाली बना सकते हैं। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का आज के युग में तेजी से प्रयोग किया जा रहा है। देश की सभी विधायिका में ई-विधान सभा लागू की जा रही है। पंचायतों के कार्यों में भी ई-गवर्नेंस के प्रयोग से यह संस्थाएं और बल प्राप्त करेंगी।

पंचायत से संसद तक लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों के प्रति लोगों की अपेक्षाएं एवं आकांक्षाएं बढ रही हैं और साथ ही उनके दायित्व भी बढ़े हैं।
- अरविंद पांडेय, पंचायती राज मंत्री, उत्तराखंड 

जनप्रतिनिधियों को अपने दायित्वों, अधिकारों और पंचायतीराज की क्रियाविधि को गहराई से समझना होगा, ताकि वे बेहतर ढंग से कार्य कर सकें।
- डॉ. धनसिंह रावत, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री

पंचायत प्रतिनिधियों में नेतृत्व का विकास करने के लिए उन्हें प्रबंधन, संसधानों की मैपिंग और नियोजन की जानकारी भी देनी होगी। 
- मुन्ना सिंह चौहान, विधायक

जल, जंगल और वायु जीवनदायी त्रिवेणी हैं, हमें इन्हें संजोना होगा। साथ ही गांव की संस्कृति, विरासत, परंपरागत उत्पाद, बीज, बोली भाषा पर आए संकट को समझना होगा और उसका निदान करना होगा। 
- पद्मश्री डॉ.अनिल जोशी, गांव बचाओ आंदोलन के सूत्रधार

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