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अच्छी खबर: उत्तराखंड में चीन सीमा से जुड़ी दो सीमांत सड़कों के निर्माण का रास्ता साफ

Tue, 02 Aug 2022 12:30 AM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 02 Aug 2022 12:30 AM IST
सार

सीमांत उत्तरकाशी की नेलांग वैली में चीन से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पहली सड़क सुमला से थांगला तक कुल लंबाई 11.85 किमी बननी है। इसके लिए 30.39 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरित की जानी है।

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Uttarakhand news: National Board of Wildlife approved for two frontier roads connected to China border
चीन सीमा तक सड़क - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

उत्तराखंड में उत्तरकाशी जिले के गंगोत्री नेशनल पार्क में चीन सीमा से जुड़ी दो सीमांत सड़कों के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। इसी सप्ताह महाराष्ट्र में हुई राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक में इन सड़कों के निर्माण के लिए भूमि हस्तांतरण को मंजूरी दी गई है। वहीं, केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोपवे के प्रस्तावों पर तकनीकी दिक्कतों के चलते चर्चा नहीं हो पाई।

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सीमांत उत्तरकाशी की नेलांग वैली में चीन से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पहली सड़क सुमला से थांगला तक कुल लंबाई 11.85 किमी बननी है। इसके लिए 30.39 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरित की जानी है। इस सड़क का इस्तेमाल आईटीबीपी बार्डर तक जाने के लिए पैदल ट्रैक रूट के तौर पर करती है। दूसरी सड़क मंडी से सांगचोक्ला तक कुल लंबाई 17.60 किमी बननी है।
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इसके लिए 31.76 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरित की जानी है। राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक में इन सड़कों के सामरिक महत्व को देखते हुए वन भूमि हस्तांतरण के साथ निर्माण को मंजूरी दी गई है। इससे पूर्व 29 जून 2020 को तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई उत्तराखंड राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक में इन सड़कों के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई थी। 
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मंजूरी मिलने के बाद बॉर्डर तक जाने वाली दोनों सड़कों के निर्माण के लिए गंगोत्री नेशनल पार्क की करीब 62 हेक्टेयर वन भूमि की स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भूमि स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी होते इन दोनों सामरिक महत्व की सड़कों के निर्माण का काम शुरू कर दिया जाएगा।

इसके बाद भारतीय सेना की पहुंच आसानी से सीमा तक हो सकेगी।  बोर्ड बैठक में केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोपवे निर्माण के महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी रखे गए थे। लेकिन, कुछ औपचारिकताएं अधूरी रहने के कारण दोनों प्रस्तावों पर चर्चा नहीं हो पाई। इन दोनों प्रस्तावों को अब अगली बोर्ड बैठक का इंतजार करना होगा।  बैठक में प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन समीर सिन्हा सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। 

आसान नहीं होगा शीत मरूस्थलीय क्षेत्र में सड़क बनाना 

गंगोत्री नेशनल पार्क के भीतर चीन सीमा से लगी भारतीय सीमा में जिन दो सड़कों के निर्माण को को मंजूरी दी गई, यह पूरा क्षेत्र हाई एल्टीट्यूड में आता है। इसे शीत मरूस्थल भी कहा जाता है। यहां सड़क निर्माण करना किसी चुनौती से कम नहीं है। वृक्ष विहीन इस पूरे क्षेत्र में वायु के कम दबाव के कारण सांस लेने में भी परेशानी होती है। इन क्षेत्रों में अत्यधिक बर्फबारी के कारण यहां काम के लिए बहुत कम समय मिलता है। घाटी में मौजूद एक छोटी नदी को छोड़ दिया जाए तो दूर-दूर तक यहां पानी का नामोनिशान नहीं होता।

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