उत्तराखंड : अंतरधार्मिक विवाह प्रोत्साहन योजना का आदेश होगा निरस्त, मंत्रिमंडल में लाया जा सकता है प्रस्ताव
प्रदेश सरकार समाज कल्याण विभाग में अंतरधार्मिक विवाह प्रोत्साहन योजना का आदेश निरस्त करने की तैयारी में है। आवश्यक हुआ तो इस संबंध में एक प्रस्ताव प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में लाया जा सकता है। इधर, मुख्य सचिव ने सचिव (समाज कल्याण) एल फैनई से रिपोर्ट मांगी है।
बता दें कि टिहरी के प्रभारी समाज कल्याण अधिकारी ने एक प्रेस नोट जारी कर अंतरजातीय व अंतरधार्मिक विवाह प्रोत्साहन योजना के लिए आवेदन मांगें थे। प्रेस नोट को लेकर एक अधिवक्ता ने मुख्यमंत्री से लिखित तौर पर शिकायत की। इस शिकायत पर मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को जांच के आदेश दिए। अब यह पत्र सचिव समाज कल्याण के पास पहुंच गया है। इसी आदेश पर मुख्य सचिव ने सचिव को रिपोर्ट देने और इस संबंध में वार्ता करने को कहा है।
उधर, सरकार अंतरधार्मिक विवाह प्रोत्साहन योजना से संबंधित आदेश को निरस्त करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। सचिव समाज कल्याण को इस संबंध में कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश अंतरजातीय व अंतरधार्मिक विवाह प्रोत्साहन नियमावली 16 जुलाई 1976 से लागू है।
सचिव समाज कल्याण से रिपोर्ट मांगी
इस नियमावली के तहत 2014 में तत्कालीन सरकार ने प्रोत्साहन राशि को 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार किया था। राज्य गठन के बाद से ही यूपी की यह नियमावली उत्तराखंड में भी लागू है।
जानकारों के मुताबिक, नियमावली को निरस्त करने के लिए राज्य सरकार को इससे संबंधित अधिनियम में संशोधन करना होगा, यानी सरकार को इसका प्रस्ताव मंत्रिमंडल की बैठक में भी लाना पड़ सकता है। उधर समाज कल्याण विभाग की नजर उत्तर प्रदेश में लव जिहाद रोकने को लाए गए अध्यादेश पर भी लगी है।
अंतरधार्मिक विवाह प्रोत्साहन योजना से जुड़े प्रकरण में मैंने सचिव समाज कल्याण से रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
- ओम प्रकाश, मुख्य सचिव
हमारी सरकार यूपी से पहले ही उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम बना चुकी है। इस अधिनियम के आने के बाद अंतरधार्मिक विवाह प्रोत्साहन योजना का कोई वजूद नहीं होना चाहिए। इसे सरकार निरस्त करेगी। जरूरत होगी तो कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा।
- मदन कौशिक, शासकीय प्रवक्ता व कैबिनेट मंत्री