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उत्तराखंड: सभी निगम-निकाय क्षेत्रों में सर्किल रेट से जुड़ा हाउस टैक्स, अब ऐसे तय होगा शुल्क

Mon, 15 Feb 2021 08:45 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 15 Feb 2021 08:45 PM IST
सार

  • कोई भी निकाय एक साल में 0.1 से एक प्रतिशत तक ही बढ़ा सकेगा हाउस टैक्स
  • विधानसभा में लाया जाएगा विधेयक, शहरी विकास निदेशालय नियमावली बनाने में जुटा
  • पुराने भवनों पर नए नियम के हिसाब से टैक्स कम हुआ तो पुराना ही टैक्स लगेगा

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Uttarakhand News:  House tax linked to circle rate Now
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

उत्तराखंड के सभी निगम-निकाय क्षेत्रों में हाउस टैक्स को सर्किल रेट से जोड़ दिया गया है। राज्य सरकार इसके लिए अध्यादेश लाई है। राज्यपाल ने भी इस पर मुहर लगा दी है। शहरी विकास विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। इसके तहत निकायों में सर्किल रेट के हिसाब से 0.1 से एक प्रतिशत तक हाउस टैक्स लगेगा। इसकी सीमा इससे अधिक नहीं हो सकेगी। शहरी विकास निदेशालय अब इसकी नियमावली बनाने में जुट गया है।

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केंद्र सरकार ने राज्य से वित्तीय वर्ष 2020-21 में कुछ सुधार करने के आधार पर सकल राज्य घरेलू उत्पाद(जीएसडीपी) का दो प्रतिशत ऋण देने की बात कही है। इसी क्रम में सरकार ने पूरे प्रदेश में हाउस टैक्स को सर्किल रेट से जोड़ दिया है। इसके लिए पहले कैबिनेट बैठक में मुहर लगी थी। इसके बाद सरकार उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959) अध्यादेश 2020 लेकर आई है। इस पर राज्यपाल ने मुहर लगा दी है, जिसके बाद शहरी विकास सचिव शैलेश बगोली ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है।
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अब यह अध्यादेश पूरे प्रदेश में लागू हो गया है। अब छह महीने के भीतर विधानसभा में विधेयक पास हो जाएगा। राज्य सरकार आगामी एक मार्च से गैरसैंण(भराड़ीसैंण) विधानसभा में शुरू होने जा रहे बजट सत्र के दौरान यह संशोधित विधेयक ला सकती है। इसके तहत बड़े स्तर पर कवायद भी तेज कर दी गई है। शहरी विकास निदेशालय इसकी नियमावली बनाने में जुट गया है।

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ऐसे होगी आपके हाउस टैक्स की गणना

अभी तक कारपेट एरिया के हिसाब से हाउस टैक्स की गणना होती थी लेकिन अब नया कानून आने के बाद इसकी कैलकुलेशन का तरीका बदल जाएगा। जिस क्षेत्र में जो भी सर्किल रेट होगा, उसका 0.1 प्रतिशत से एक प्रतिशत तक हाउस टैक्स होगा। मसलन, अगर कहीं सर्किल रेट के हिसाब से किसी प्रॉपर्टी की कीमत एक करोड़ रुपये है तो उसका टैक्स 0.1 प्रतिशत यानी 10 हजार रुपये से लेकर एक प्रतिशत यानी एक लाख रुपये तक होगा।

कोई भी निगम-निकाय इससे अधिक या कम टैक्स की वसूली नहीं कर सकेगा। अब सवाल यह है कि जो लोग पहले से टैक्स दे रहे हैं, उस हिसाब से टैक्स बढ़ेगा या घटेगा? इसमें यह साफ कर दिया गया है कि अगर सर्किल रेट की कैलकुलेशन के बाद किसी का पुराना टैक्स एक प्रतिशत से अधिक यानी एक लाख रुपये से ज्यादा बैठ रहा है तो उसे पुराना टैक्स ही देना होगा। अगर किसी का टैक्स पहले कम था और सर्किल रेट के आधार पर ज्यादा बन रहा है तो उसी हिसाब से नई दरों पर टैक्स जमा कराना होगा। अगले पांच वर्षों में इसमें पांच प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी नहीं की जा सकेगी।

निगमों की प्रॉपर्टी का डाटा हुआ ऑनलाइन, निकायों की कवायद तेज
प्रदेश में हाउस टैक्स का नया पैटर्न लागू होने के चलते प्रॉपर्टी का ऑनलाइन रजिस्टर तैयार किया जा रहा है। शहरी विकास निदेशालय की कोशिशों के बाद सभी आठ निगमों में प्रॉपर्टी का पूरा डाटा ऑनलाइन हो गया है। निकायों में भी काफी बड़ी संख्या में प्रॉपर्टी की जानकारी ऑनलाइन हो रही है।

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