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उत्तराखंड : होटलों, आश्रमों, धर्मशाला संचालकों को देना होगा 18 साल का जुर्माना

Mon, 24 Aug 2020 03:44 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 24 Aug 2020 03:44 PM IST
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Uttarakhand news: Hotels, ashrams, dharamshala to be fined 18 years
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में 31 दिसंबर तक पंजीकरण नहीं कराने वाले होटल, आश्रम और धर्मशाला संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है । 31 दिसंबर तक पंजीकरण नहीं कराने वाले संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कराई जाएगी, साथ उनसे 18 साल का सहमति शुल्क भी वसूला जाएगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।

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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रावधानों के तहत राज्य के सभी होटलों, आश्रमों और धर्मशालाओं को पंजीकरण के दायरे में लाना है। इन सभी को जल एवं वायु प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम की धारा 25 के तहत बोर्ड में पंजीकरण कराना व निर्धारित सहमति शुल्क जमा कराना है। फिलहाल कोरोना संकट के मद्देनजर सरकार और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 31 दिसंबर तक के लिए पंजीकरण की स्थिति में सहमति शुल्क माफ करने का निर्णय लिया है। इसके बावजूद संचालकों ने अपने प्रतिष्ठानों को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पंजीकरण नहीं कराया जा रहा है। 
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बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अमित पोखरियाल का कहना है कि होटल, आश्रम और धर्मशाला संचालकों की ओर से 31 दिसंबर तक पंजीकरण नहीं कराया जाता है तो ऐसे सभी संचालकों से वर्ष 2002 से लेकर 2020 तक का सहमति शुल्क वसूला जाएगा। सहमति शुल्क की गणना वर्ष 2002 से अथवा स्थापना साल जो भी अधिक हो उससे की जाएगी।
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ऐसे में यदि संचालकों को भारी सहमति शुल्क जमा कराने से बचना है तो उन्हें 31 दिसंबर से पहले पंजीकरण करा देना चाहिए। पंजीकरण कराने वाले संचालकों को अपनी ईमेल आईडी, आधार कार्ड, पैन कार्ड, प्रोजेक्ट रिपोर्ट की बैलेंस शीट, प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्थाओं का विवरण, भवन का नक्शा, बिजली बिल, पर्यटन प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र, आश्रम-धर्मशाला के संचालित वर्ष का प्रमाणपत्र और नदी से दूरी का ब्योरा देना होगा। 


क्षेत्रीय अधिकारी अमित पोखरियाल का कहना है कि फिलहाल संचालकों के पास अभी लंबा वक्त है ऐसे में उन्हें अपने प्रतिष्ठानों को बोर्ड में पंजीकृत करा लेना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।

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