Rishikesh Aiims: नहीं लगानी होगी दिल्ली की दौड़, आधे खर्च पर होगा रक्त वाहिकाओं की जटिल बीमारियों का उपचार
एम्स के रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष ब्रिगेडियर प्रो. सुधीर सक्सेना ने बताया कि एंडोवस्कुलर एओर्टिक रिकंस्ट्रकशन जैसी नवीनतम तकनीक से उपचार की सुविधा भी अब संस्थान में मरीजों को मिलना शुरू हो गई है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अब रक्त वाहिकाओं से जुड़ी गंभीर समस्याओं के लिए उपचार के लिए दिल्ली की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। एम्स में एंडोवस्कुलर एओर्टिक रिकंस्ट्रकशन तकनीक से उपचार की सुविधा शुरू कर दिया है। एम्स में यह सुविधा बड़े अस्पतालों के मुकाबले आधे खर्च में मिलेगी। अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने रक्त वाहिकाओं में रक्त संचार की समस्या से जूझ रहे 82 वर्षीय मरीज का सफल उपचार किया है।
एम्स के रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष ब्रिगेडियर प्रो. सुधीर सक्सेना ने बताया कि एंडोवस्कुलर एओर्टिक रिकंस्ट्रक्शन जैसी नवीनतम तकनीक से उपचार की सुविधा भी अब संस्थान में मरीजों को मिलना शुरू हो गई है। इस विधि से संस्थान के इंटरवेंशन रेडियोलॉजी विभाग के चिकित्सकों ने एक 82 वर्षीय बुजुर्ग का सफलतापूर्वक उपचार किया है।
Pithoragarh: बरामदे में कट रही मरीजों की सर्द रातें, बढ़ रही रोगियों की संख्या, अस्पताल के पास नहीं व्यवस्था
उन्होंने बताया कि अब तक इन इलाज के लिए मरीजों को दिल्ली के अस्पतालों में जाना पड़ता था। लेकिन अब इस सुविधा के एम्स ऋषिकेश में शुरू होने से अब उत्तराखंड और आसपास के राज्यों के लोगों को इलाज के लिए दिल्ली नहीं जाना होगा। उन्होंने बताया कि संस्थान जटिल समस्या से जूझ रहे मरीजों को आगे भी ऐसी उच्च स्तरीय सुविधाओं का लाभ पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रहा है। संस्थान की इस उपलब्धि पर एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने चिकित्सकीय टीम की प्रशंसा की।
कैसे किया मरीज का उपचार
प्रो.सुधीर सक्सेना ने बताया कि 82 वर्षीय मरीज शरीर की सबसे बड़ी रक्त वाहिका हृदय से शरीर के विभिन्न हिस्सों को रक्त संचार करने वाली रक्त वाहिका से जुड़ी समस्या से लंबे समय से ग्रस्त थे। अस्पताल में उपचार के लिए आए मरीज की जांच के बाद ईवीएआर विधि से उसका उपचार करने का निर्णय लिया गया। मरीज के पैर में एक छोटा चीरा लगाकर, छोटी नस से शरीर में प्रवेश कर हृदय से शरीर को रक्त आपूर्ति करने वाली सबसे बड़ी रक्त वाहिका अयोटा में तीन ग्राफ्ट लगाए गए।
जटिल तकनीक से मरीज को दिया जीवनदान
एम्स के इंटरवेंशन रेडियोलॉजिस्ट डा. उदित चौहान ने बताया कि मरीज के शरीर में रक्त आपूर्ति करने वाली अयोटा रक्त वाहिका उम्र के हिसाब से काफी कमजोर हो गई थी। रक्त वाहिका इतनी कमजोर थी कि कभी भी फट सकती थी। टीम ने रक्त वाहिका में ग्राफ्ट लगाकर शरीर को मजबूती दी।
टीम में यह रहे शामिल
इन्वरवेंशन रेडियोलॉजी विभाग के चिकित्सकों की टीम के साथ ही सीटीवीएस विभाग के डॉ. अनीष गुप्ता, एनेस्थीसिया विभाग से डा. गौरव जैन व उनकी टीम के सदस्य शामिल थे।
बड़े अस्पतालों में महंगा उपचार
डॉ.उदित चौहान ने बताया कि अब तक दिल्ली, मुंबई आदि बड़े महानगरों में ही एंडोवस्कुलर एओर्टिक रिकंस्ट्रकशन तकनीक से उपचार की सुविधा उपलब्ध थी। उत्तराखंड व पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मरीजों को उपचार के लिए महानगरों के अस्पतालों का रुख करना पड़ता था। डॉ. उदित ने बताया कि बड़े निजी अस्पतालों में इस तकनीक से उपचार पर 12 से 14 लाख रुपये तक खर्च आता है। जबकि एम्स में पांच से छह लाख तक के खर्च में उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।