फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   uttarakhand news : Effect of inflation in pulses prices at government ration shops

Uttarakhand : सरकारी राशन की दुकानों पर मिल रही दाल के दामों में महंगाई का असर, तीन महीने में छह से 12 रुपये बढ़े दाम

Sat, 30 Jan 2021 12:17 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 30 Jan 2021 12:17 PM IST
विज्ञापन
uttarakhand news : Effect of inflation in pulses prices at government ration shops
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला (File Photo)

सरकारी राशन की दुकानों पर मिल रही दाल के दामों में महंगाई का असर दिखने लगा है। पिछले तीन महीने में दाल के दामों में 6 से 12 रुपये का इजाफा हुआ है। बाजार और सरकारी राशन की दुकानों पर दालों के दामों में अब ज्यादा अंतर नहीं रहा है। महंगे दाम के चलते अब लोग भी दाल लेने से बच रहे हैं। वहीं, सरकारी राशन विक्रेताओं के लिए महंगी दर पर दाल खपाना सिर दर्द साबित हो रहा है।

विज्ञापन


दरअसल, सरकार ने करीब एक साल पहले से सरकारी राशन की दुकानों में गेहूं-चावल के साथ दाल भी सस्ती दरों पर उपलब्ध कराना शुरू किया था। शुरू में दाल बाजार भाव से 20 से 30 रुपये सस्ती दर पर मुहैया कराई जा रही थी, लेकिन पिछले तीन महीने से दाल के दाम में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। दाल की मात्रा भी एक किलो से बढ़ाकर दो किलो कर दी गई है। वर्तमान में राशन की दुकानों में प्रत्येक कार्डधारक को एक-एक किलो मसूर व साबुत उड़हद की दाल दी जा रही है। 
विज्ञापन


मसूर दाल का दाम 62 रुपये किलो है, जो अक्तूबर 2020 में करीब 50 रुपये मिलती थी। जबकि, साबुत उड़द नवंबर 2020 में 65 रुपये थी, जो अब 71 रुपये किलो मिल रही है। राशन विक्रेताओं का कहना है कि कई लोग महंगी होने के कारण दाल लेने से इनकार कर रहे हैं। वहीं, विभाग की तरफ से दाल को खपाने का दबाव है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


विभाग जबरन थोप रहा ज्यादा कोटा

राशन विक्रेताओं का आरोप है कि विभाग उन्हें नवंबर 2020 की यूनिटों के आधार पर दाल आवंटित कर रहा है। जबकि, पिछले दो महीने में सभी दुकानों में कई राशन कार्ड निरस्त किए गए हैं। ऐसे में दाल का कोटा आवश्यकता से कहीं अधिक दिया जा रहा है। कहा कि विभाग ने कार्डधारकों को दाल देना अनिवार्य किया है। वहीं लोग पहले ही दाल लेने से मना कर रहे हैं। ऐसे में विक्रेताओं को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए सस्ती दरों पर दाल मुहैया कराई है। लोग इसका लाभ भी ले रहे हैं, लेकिन दाल के दाम को लेकर कुछ राशन विक्रेताओं की तरफ से शिकायत मिली है। दाल के दाम पैकेट में छपे आते हैं। दाम निर्धारित करने में विभाग की कोई भूमिका नहीं है। हालांकि, राशन विक्रेताओं को दो चरणों में दाल का कोटा उठाने का विकल्प दिया जा सकता है। - जसवंत सिंह कंडारी, डीएसओ


पिछले दो-तीन महीने में दाल के दामों में इजाफा हुआ है। सरकारी राशन की दाल और बाजार की दाल में मामूली अंतर रह गया है। लोग इसकी गुणवत्ता को लेकर भी शिकायत कर रहे हैं। अधिक संख्या में लोग दाल लेने से मना कर रहे हैं। दाल पड़ी रहने के कारण विक्रेताओं को घाटा उठाना पड़ रहा है। - हेमंत अग्रवाल, जिला महासचिव, उत्तराखंड उचित दर राशन विक्रेता एसोसिएशन

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed