फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   uttarakhand news: brain haemorrhage patients went Doon to Chandigarh hospital, did not get treatment treatment not found, died

उत्तरकाशी: दून से चंडीगढ़ तक काटे अस्पतालों के चक्कर, नहीं मिला इलाज, चली गई ब्रेन हैमरेज पीड़ित की जान

Sun, 05 Sep 2021 01:00 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यजू डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी
न्यजू डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 05 Sep 2021 01:00 AM IST
सार

यह घटना बीते शुक्रवार की है। बिहार के लौरिया गांव निवासी कमलेश शर्मा (38) ज्ञानसू की दुकान में कारपेंटर का काम करता था। शुक्रवार को दिन में करीब साढ़े बारह बजे वह अचानक बेहोश हो गया। आसपास के लोग उसे तत्काल जिला अस्पताल ले गए। यहां उसका इलाज नहीं हो पाया और उसे दून अस्पताल रेफर कर दिया गया।

विज्ञापन
uttarakhand news: brain haemorrhage patients went Doon to Chandigarh hospital, did not get treatment treatment not found, died
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पहाड़ की बदहाल स्वास्थ्य सेवा एक व्यक्ति के लिए जानलेवा साबित हुई। ब्रेन हैमरेज से पीड़ित व्यक्ति को जिला अस्पताल से दून अस्पताल रेफर किया गया। वहां तक पहुंचने के लिए तीन बार एंबुलेंस बदलनी पड़ी। किसी तरह वह दून अस्पताल पहुंचा तो वहां से उसे वापस ऋषिकेश एम्स रेफर कर दिया गया। लेकिन, वहां भी उसका इलाज नहीं हो पाया। बाद में उसे चंडीगढ़ ले जाया गया और इसी बीच उसकी मौत हो गई।

विज्ञापन


यह घटना बीते शुक्रवार की है। बिहार के लौरिया गांव निवासी कमलेश शर्मा (38) ज्ञानसू की दुकान में कारपेंटर का काम करता था। शुक्रवार को दिन में करीब साढ़े बारह बजे वह अचानक बेहोश हो गया। आसपास के लोग उसे तत्काल जिला अस्पताल ले गए। यहां उसका इलाज नहीं हो पाया और उसे दून अस्पताल रेफर कर दिया गया। आपातकालीन 108 एंबुलेंस सेवा से उसे देहरादून भेजा गया।
विज्ञापन


मरीज को पहले चिन्यालीसौड़, फिर अलमस और मसूरी के पास तीन बार एंबुलेंस बदलनी पड़ी। ऐसे में उसे रात नौ बजे दून अस्पताल पहुंचाया जा सका। लेकिन, यहां से उसे वापस एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया। रात करीब साढ़े दस बजे पीड़ित को ऋषिकेश एम्स पहुंचाया गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

अस्पतालों के बीच समन्वय जरूरी

एक अस्पताल से दूसरे या हायर सेंटर रेफर होने वाले मरीज के लिए सरकारी अस्पतालों के बीच समन्वय होना जरूरी है। लेकिन ज्यादातर सरकारी अस्पताल मरीज को रेफर करने से पहले हायर सेंटर में मरीज के लिए जरूरी संसाधनों का पता नहीं करते।

जिसके चलते रेफर होकर जाने वाले मरीज और परिजनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सीएमएस डा.एसडी सकलानी का कहना है कि जब किसी मरीज के परिजन मांग करते हैं तो हायर सेंटर में मरीज के लिए आवश्यक इलाज के बारे में पता किया जाता है। 

वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं होने पर एम्स प्रबंधन ने भी उसे भर्ती करने से इनकार कर दिया। बाद में परिचित उसे चड़ीगढ़ ले गए, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर उसने दम तोड़ दिया। कमलेश के साथ गए दुकान स्वामी अशोक शर्मा का कहना है कि कमलेश को समय पर इलाज मिल जाता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। 

मेरे पास एंबुलेंस के लिए कोई नहीं आया। वे फ्री के चक्कर में 108 एंबुलेंस सेवा से गए होंगे। लंबे रास्ते पर तीन जगह एंबुलेंस बदल जाना तो 108 सेवा का नियम है। लेकिन कोई मांग करता है तो 108 सेवा भी गंभीर मरीज को सीधे हायर सेंटर लेकर जाती है।
-डा. एसडी सकलानी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक उत्तरकाशी

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed