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Uttarakhand : सरकारी और निजी सभी स्कूलों में साल में दस दिन रहेगा बैग फ्री डे, कराई जाएंगी ये गतिविधियां

Wed, 10 Jan 2024 02:30 AM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 10 Jan 2024 02:30 AM IST
सार

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की सिफारिश के आधार पर सभी तरह के विद्यालयों में साल में 10 दिन बस्ता मुक्त दिवस मनाए जाने की मंजूरी दी गई है।

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स्कूल जाते छात्र - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

उत्तराखंड के सरकारी और निजी विद्यालयों में बस्ते के बोझ को कम करने के लिए साल में दस दिन बस्ता मुक्त दिवस रहेगा। शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत के मुताबिक हर महीने के अंतिम शनिवार को यह योजना लागू होगी। इस योजना के तहत छात्र-छात्राएं बिना बस्ते के स्कूल जाएंगे। जहां वह अपनी रूचि के अनुसार विभिन्न गतिविधियों में प्रतिभाग कर सकेंगे।

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप प्रदेश के सभी विद्यालयों में बस्ता मुक्त दिवस योजना लागू की जा रही है। योजना उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा छह से कक्षा-12 वीं तक लागू की जाएगी। प्रदेश के राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में यह योजना पहले से ही ‘प्रतिभा दिवस’ के रूप में संचालित की जा रही है। जिसके तहत भाषा, गणित विज्ञान, खेलकूद, कला, क्राफ्ट, श्रम के कार्य व व्यायाम, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अभिरूचि की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की सिफारिश के आधार पर सभी तरह के विद्यालयों में साल में 10 दिन बस्ता मुक्त दिवस मनाए जाने की मंजूरी दी गई है। जिसका प्रमुख उद्देश्य बच्चों के बस्ते के बोझ को कम करना, विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से छात्रों में निहित प्रतिभाओं का समुचित विकास करना, स्थानीय व्यवसायों एवं हस्त शिल्प संबंधी कौशल विकास के साथ ही श्रम के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना है। शिक्षा मंत्री के मुताबिक विभागीय प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस संबंध में शासनादेश होते ही योजना लागू की जाएगी। जिसकी जिम्मेदारी हर जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी की होगी।
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बस्ता मुक्त दिवस पर ये गतिविधियां होंगी
बस्ता मुक्त दिवस पर स्कूलों में मुख्य रूप से तीन तरह के कार्य होंगे। जिसमें जैविक रूप, मशीन और सामग्री एवं मानवीय सेवाएं शामिल हैं। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में जैविक रूप की गतिविधियों में छात्र-छात्राओं को मृदा प्रबंधन और मिट्टी के प्रारंभिक कार्य, कृषि, बागवानी की विभिन्न पद्धतियां सिखाई जाएंगी। इसी तरह मशीन और सामग्री के तहत छात्रों को कागज, लकड़ी, मिट्टी, कपड़ा, पेंट, स्याही जैसी सामग्रियों का उपयोग करके हस्तशिल्प कार्य एवं आधुनिक मशीनों सहित प्रारंभिक मशीनों का उपयोग करना बताया जाएगा।

जबकि मानवीय सेवाओं के तहत कुशल संवाद की अभिरूचि और टीमों में काम करने की योग्यता, स्वास्थ्य देखभाल और आतिथ्य के आधार सहित बुनियादी सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी कौशल सिखाया जाएगा। माध्यमिक विद्यालयों में जैविक रूप कार्यों के तहत प्रकृति अनुकूल कृषि, प्रकृति संरक्षण, नर्सरी प्रबंधन, पशुधन पालन, वित्तीय सेवाएं, सौंदर्य और व्यक्तिगत देखभाल एवं उद्योग संबंधी जानकारी छात्र-छात्राओं को दी जाएगी।

मशीन व सामग्री के तहत छात्रों को सिलाई, बढ़ईगिरी, वेल्डिंग और कास्टिंग, मिट्टी के बर्तन, स्थानीय कला व रोबोटिक मशीनों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। मानवीय सेवाओं के तहत छात्रों को स्वास्थ्य देखभाल, बिजली का काम, परिवहन सेवाएं, विक्रय और विपणन, आतिथ्य और पर्यटन, इंटरमीडिएट सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी कौशल का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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