Uttarakhand: 31 लाख आभा आईडी बनीं, फिलहाल किसी काम की नहीं, अपलोड नहीं हुई मेडिकल और जांच रिपोर्ट
राज्य में सवा करोड़ लोगों की आयुष्मान भारत हेल्थ अकांउट (आभा आईडी) बनाई जानी है। इसमें अभी तक 31 लाख से अधिक लोगों की आभा आईडी बन चुकी है।
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आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के तहत उत्तराखंड में 31 लाख लोगों की आभा आईडी बन चुकी हैं। फिलहाल ये आईडी किसी काम की नहीं हैं। मरीजों की मेडिकल और जांच रिपोर्ट अपलोड न होने के कारण आभा आईडी का कोई फायदा नहीं है। सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की मेडिकल संबंधित जानकारी आभा आईडी में अपलोड करने के लिए सॉफ्टवेयर भी नहीं है। वहीं, सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों के पास लैपटॉप और टैबलेट तक नहीं है।
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राज्य में सवा करोड़ लोगों की आयुष्मान भारत हेल्थ अकांउट (आभा आईडी) बनाई जानी है। इसमें अभी तक 31 लाख से अधिक लोगों की आभा आईडी बन चुकी है। साथ ही 2352 चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ, 824 सरकारी व निजी अस्पताल भी पंजीकरण किया गया, लेकिन अभी तक अस्पतालों में मरीजों की मेडिकल रिपोर्ट अपलोड करने के लिए सॉफ्टवेयर नहीं बन पाया है। जिन निजी अस्पतालों के पास खुद का सॉफ्टवेयर है, वे भी आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से नहीं जुड़ पाए है।
नियुक्ति पत्र न होने पर भी चिकित्सक करा सकते हैं पंजीकरण
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन में चिकित्सकों को भी आभा आईडी में पंजीकरण करना है। इसके लिए डॉक्टरों को मेडिकल काउंसिल का रजिस्ट्रेशन नंबर, शैक्षिक योग्यता प्रमाणपत्र, नियुक्तिपत्र या ट्रांसफर के आदेश से अपना पंजीकरण करा सकते हैं।
जिला आभा आईडी की संख्या
देहरादून 673818
नैनीताल 401181
हरिद्वार 292385
ऊधमसिंहनगर 236602
पौड़ी 185914
अल्मोड़ा 144167
टिहरी 124428
पिथौरागढ़ 96219
चमोली 79644
बागेश्वर 71859
चंपावत 65837
उत्तरकाशी 59281
रुद्रप्रयाग 29300
बिना जिला 648821
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के पहले चरण में सभी लोगों की आभा आईडी बनाई जा रही है। दूसरे चरण में सरकारी और निजी अस्पतालों के लिए एक केंद्रीय सॉफ्टवेयर राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की ओर से तैयार किया जा रहा है। जो भी अस्पताल अपना सॉफ्टवेयर इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें आयुष्मान डिजिटल मिशन से जोड़ा जाएगा।
- अरुणेंद्र सिंह चौहान, राज्य नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन