उत्तराखंड: हर जिले की सड़कों पर लटकी हादसों की तलवार, रोकने के लिए किसी के पास नहीं इंतजाम, पढ़ें ये खास रिपोर्ट
Road Accident in Uttarakhand: परिवहन विभाग के आंकड़े बता रहे हैं कि पिछले छह सालों में सितंबर महीने तक उत्तराखंड में 7993 हादसे हो चुके हैं, जिनमें 5028 लोगों की जान चुकी है।
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विस्तार
रविवार को देहरादून के चकराता में हुए हादसे ने सड़क सुरक्षा पर सरकार के तमाम दावों की पोल खोल दी। इस हादसे में 13 लोगों की जान चली गई। पहाड़ की घुमावदार सड़कों पर हादसों की जांच के बाद सरकार मरने वालों के आश्रितों को मुआवजा तो दे देगी लेकिन हादसे ही न हों इसके लिए प्रभावशाली कदम उठाए जाने की दरकार है। कहने को भारी-भरकम अमला है वाहनों-लाइसेंस की जांच और ओवरलोडिंग रोकने के लिए लेकिन हर बार हादसों के बाद सरकार जांच के बाद मुआवजे बांटने के बाद अपनी आंखें बंद कर लेती हैं। हालात पहले जैसे रहते हैं और वे वजहें भी बदस्तूर मौजूद रहती हैं जिनसे हादसे होते हैं।
ये हैं पांच वजह
1. ओवरलोडिंग
2. वाहन की फिटनेस न होना
3. तेज रफ्तार
4. चालक की लापरवाही
5. पैराफिट का न होना
पांच साल में सात हजार दुर्घटनाएं, 4511 मौतें
सड़क सुरक्षा के तमाम दावों के बावजूद उत्तराखंड की सड़कों पर हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। शायद ही साल का कोई महीना हो, जब ऐसे हादसे नहीं हो रहे हैं। राज्य की ग्रामीण सड़कें तो बेहद घातक और जानलेवा साबित हो रही हैं। सड़कों हादसों के आंकड़ों पर नजर दौड़ाते हैं, वह चिंता में डालते हैं। परिवहन विभाग के आंकड़े बता रहे हैं कि पिछले छह सालों में सितंबर महीने तक उत्तराखंड में 7993 हादसे हो चुके हैं, जिनमें 5028 लोगों की जान चुकी है। पिछले पांच सालों का तुलनात्मक अध्ययन करने पर पता चलता है कि उत्तराखंड हर साल औसत 1322 सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिनमें 838 लोग मारे जा रहे हैं।
सड़क दुर्घटनाएं और मारे गए लोगों की संख्या
वर्ष दुर्घटनाओं की संख्या मृतकों की संख्या
2016 1591 962
2017 1603 942
2018 1468 1047
2019 1353 886
2020 1041 674
2021 876 517
कुल 7932 5028
दुर्घटना राहत निधि का प्रावधान
सड़क हादसों में मारे जाने वाले के आश्रित को एक लाख रुपये देने का प्रावधान है। गंभीर रूप से घायल को 40 हजार और साधारण घायल को 10 हजार रुपये देने की व्यवस्था है। हादसे में मुख्यमंत्री ने मृतकों के आश्रितों के लिए 50-50 हजार रुपये और घायलों के लिए 25-25 हजार की घोषणा की है।
आज आएगी हादसे की तकनीकी जांच रिपोर्ट
परिवहन आयुक्त दीपेंद्र चौधरी के मुताबिक, सड़क दुर्घटना की टेक्निकल जांच के आदेश दे दिए थे। उप परिवहन आयुक्त सुधांशु कुमार से रिपोर्ट मांगी गई है। एक जांच टीम मौके के लिए रविवार को ही रवाना हो गई थी। रिपोर्ट मंगलवार तक विभाग को प्राप्त हो जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद विभाग आगे की कार्रवाई तय करेगा। इस मामले के देहरादून के जिलाधिकारी ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश पहले ही दे दिए हैं।
ये है गढ़वाल के जिलों का हाल
देहरादून के पहाड़ी क्षेत्रों में भी स्थिति खराब
राजधानी दून में चकराता, त्यूणी और मसूरी वाला पर्वतीय क्षेत्र है, जहां आए दिन सड़क दुर्घटनाओं में लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। पिछले एक वर्ष के दौरान तीन दर्जन से ज्यादा लोगों ने सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाई। दुर्घटनाओं के बावजूद प्रशासन जागने को तैयार नहीं है। मसूरी क्षेत्र में ज्यादातर सड़कों पर सुरक्षा के लिए पैराफिट तक नहीं है। तेज ढ़लान और मोड़ वाली सड़क पर लोगों के लिए गाड़ी चलाना आसान नहीं होता। चकराता क्षेत्र में हुई सड़क दुर्घटना के बाद भी धड़ल्ले से ओवरलोडिंग की जा रही है। इन क्षेत्रों में सड़क पर क्रैश बैरियर भी नहीं लगाए गए हैं। मसूरी सीओ नरेंद्र पंत ने बताया कि ओवर लोडिंग के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। वहीं, एआरटीओ रश्मि पंत ने कहा कि यातायात नियम तोड़ने वालों के खिलाफ पहले भी अभियान चलाया गया था।
हरिद्वार: नवंबर में 20 लोग बने काल का ग्रास
जिले में हाइवे समेत अन्य संपर्क मार्गों पर नवंबर माह में 100 से ज्यादा सड़क दुघर्टनाएं हुई है। जिसमें 20 लोग काल का ग्रास बने हैं। अधिकतर हादसे हाइवे पर हुए हैं और हादसों की वजह ओवरस्पीड, गलत साइड, शराब के नशे एवं चलते वाहन पर मोबाइल का इस्तेमाल है। जिले में 10 ब्लैक स्पॉट हैं। हादसों को रोकने के लिए हाइवे पर बने अवैध कट को बंद किए गए जिससे हालात कुछ हद तक सुधरे। लोगों को यातायात नियमों का पालन करने के लिए समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। इसके साथ ही स्कूलों व कॉलेजों में जाकर छात्र-छात्राओं को हेलमेट लगाने के लिए जागरूक किया जाता है। वाहन चेकिंग के दौरान फिटनेस-लाइसेंस चेक किया जाता है।
चमोली: सड़कों पर नहीं सुरक्षा के इंतजाम
जनपद में चमोली-लासी-सरतोली, गोपेश्वर-घिंघराण, बिरही-निजमुला, हेलंग-उर्गम, जोशीमठ-सेलंग-सलूड़ डुंग्रा, चमोली-खैनुरी, गोपेश्वर-पोखरी, घाट-स्यांरी-बंगाली, घाट-रामणी, कांडई-बैरासकुंड मोटर मार्ग के साथ ही कई ग्रामीण संपर्क मार्गों पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। वर्ष 2016 में चमोली-लासी मार्ग पर वाहन खाई में गिर जिसमें चार लोगों की मौत हुई जबकि 17 अक्तूबर को बदरीनाथ हाईवे पर पैरापिट न होने के कारण वाहन खाई में गिरा जिसमें तीन यात्रियों की मौत हो गई थी।
पौड़ी: पैराफिट न होने से खाई गिर रहे वाहन
जिले में 24 हादसों में 12 लोगों की मौत हुई, जबकि 28 लोग घायल हुए । कारण तेज रफ्तार, चालक की लापरवाही रही है। पर्वतीय क्षेत्र में सड़क हादसों का कारण खस्ताहाल सड़क, पैरापिट न होना, सड़क पर मलबा होना, पुश्ता टूटना रहा हैं। जनपद में कुल 263 डेंजर जोन हैं, जिनमें से 207 पर सुधारीकरण कार्य हो रहा है। पुलिस एक्टिव है। जनवरी से अभी तक ओवर लोडिंग में 628, डंक एंड ड्राइव में 230, मोबाइल के उपयोग में 204 चालान किए गए। 168 वाहन अनफिट मिले हैं।
नई टिहरी: एक माह में चार हादसे, पांच की मौत
बीते अक्तूबर माह में जिले में चार अलग-अलग वाहन दुर्घटनाओं में पांच लोगों की मौत हुई और सात गंभीर रूप से घायल हुए। पुलिस जांच में दो वाहन दुर्घटना का कारण ओवर टेक करते वक्त तेज रफ्तार सामने आया है। तंगहाल सड़क भी एक प्रमुख वजह होती है। चेकिंग के दौरान ओवर लोडिंग मिलने पर अक्तूबर माह में 13 वाहनों के चालान किए गए है।ग्रामीण संपर्क मोटर मार्गो के किनारे पैराफिट नहीं है जो वाहन दुर्घटनाओं का बड़ा कारण है।
रुद्रप्रयाग: पिछले डेढ़ माह में एक हादसा
पिछले डेढ़ माह में जिले में एक सड़क हादसा हुआ था, जिसमें एक मजदूर की मौत हो गई थी। बीते 21 सितंबर को सोनप्रयाग-त्रियुगीनारायण मोटर मार्ग पर ऊर्जा निगम का सामान ले जा रही एक ओवरलोड पिकप अनियंत्रित होकर पलट गई थी, जिससे सवार 14 मजदूर घायल हो गए थे। एक मजदूर की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
उत्तरकाशी: 10 माह में 18 हादसों में 17 की मौत
जिले में 10 महीनों में 18 हादसे हुए जिसमें 17 लोगों की मौत हुई और 30 घायल हुए। इसका कारण प्रशासन पहाड़ी रास्तों पर ड्राइविंग के प्रति जागरूक न होना मानता है। एसपी मणिकांत मिश्र के अनुसार लोग यातायात निमयों की अनदेखी कर रहे हैं। पुलिस जल्द नियमों के पालन के लिए लोगों को जागरूक करेगी। वहीं एआरटीओ जितेंद्र चंद का मानना है कि सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण के लिए पूरे प्रयास किए जाते हैं। विभाग ने रात्रि गश्त भी बढ़ा दी है
कुमाऊं में ये है स्थिति
उधमसिंह नगर: नौ महीनों में गई 173 लोगों की मौत
ऊधमसिंह नगर में हादसों की बड़ी वजह ओवरस्पीड, ओवरटेक, गलत दिशा में वाहन चलाना है। खराब सड़कें भी वजह रही हैं। बीते नौ महीनों में जिले में 173 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 156 पुरुष और 17 महिलाएं शामिल हैं। अकेले सितंबर में ही 18 लोगों की जान सड़क हादसे में गई। हादसों में जान गंवाने वाले लोगों में सबसे ज्यादा दोपहिया वाहन सवार हैं।
बागेश्वर: पांच महीने में सात लोगों की जान
जिले में बीते पांच महीने में पांच सड़क हादसों में सात लोगों की मौत हुई और 13 लोग घायल हुए। कपकोट हादसे का कारण ओवरस्पीड रहा। रवाईखाल के पास कार हादसे की वजह रात में तेज रफ्तार रही। 27 अक्तूबर को बंगाली पर्यटकों का वाहन कपकोट में खाई में गिरने का कारण भी ओवरस्पीड रहा। इसमें पांच सैलानियों की मौत हो गई थी। 10 लोग घायल हुए थे।
अल्मोड़ा: इस साल 18 दुर्घटनाओं में 16 की गई जान
जिले में इस साल अब तक 18 वाहन दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें 16 लोगों की मौत हुई जबकि 63 लोग घायल हुए। कई स्थानों में अब भी पैरापिट नहीं होने से दुर्घटनाएं हुई हैं। जांच में चालक की लापरवाही भी सामने आई है। यातायात पुलिस मोटरमार्गों का निरीक्षण कर पैरापिट लगाने के लिए संबंधित विभाग को रिपोर्ट भेजती है। संवाद
नैनीताल: 10 माह में 147 दुर्घटनाएं, 59 की मौत
जिले में इस साल जनवरी से अब तक 10 माह में 147 वाहन दुर्घटनाएं सामने आई हैं। इन हादसों में 59 लोगों की मौत हुई है। एसएसपी प्रीति प्रियदर्शिनी ने बताया कि नैनीताल जिले में ज्यादातर सड़क दुर्घटनाएं वाहन चालकों की लापरवाही और वाहन की गति तेज होने के कारण हुई हैं। इसके अलावा कई दुर्घटनाएं वाहन फिटनेस न होने से होती हैं।
पिथौरागढ़ :छह माह में चार दुर्घटनाओं में 11 की मौत
जिले में पिछले छह माह में चार सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 11 लोगों की मौत हुई। मई में हुई कार दुर्घटना में एक महिला सहित दो लोगों की मौत हुई थी। इनमें किसी के पीछे चालक की लापरवाही तो कहीं ओवरस्पीड या सड़कों पर पैरापिट न होना कारण रहा। थल-पिथौरागढ़ सड़क में हुई कार दुर्घटना में पांच लोगों की मौत हुई।
चंपावत: 11 दुर्घटनाओं में सात की मौत
जिले में महीने भर में कोई बड़ा सड़क हादसा नहीं हुआ है। हालांकि इस साल अक्तूबर तक 11 सड़क दुर्घटनाओं में सात लोगों की जान गई है। मृतकों में सहकारी समिति के सचिव, एक पुलिस कर्मी और एक चालक भी शामिल हैं जबकि नौ लोग घायल हुए हैं। चार हादसे तेज गति, दो दुर्घटनाएं शराब पीकर वाहन चलाने और शेष पांच दुर्घटनाएं खराब सड़क की वजह से हुए हैं।