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उत्तराखंड: हरे-भरे पहाड़ का गम कृषि भूमि हो रही कम, 20 साल में पर्वतीय क्षेत्रों में घटी 29970 हेक्टेयर

Mon, 06 Sep 2021 03:48 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal भूपेंद्र राणा, अमर उजाला, देहरादून
भूपेंद्र राणा, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 06 Sep 2021 03:48 PM IST
सार

वर्ष 2000-2001 में पर्वतीय क्षेत्रों में कुल 517628 हेक्टेयर कृषि भूमि थी। जो वर्ष 2019-20 में घट कर 487658 हेक्टेयर हो गई है। यानी 29970 हेक्टेयर कृषि भूमि कम हुई है। लगातार कम हो रही कृषि भूमि को बचाने के लिए प्रदेश में सख्त भू-कानून बनाने की आवाज उठ रही है।

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uttarakhand news: Agricultural land decreasing in uttarakhand
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

राज्य गठन के बाद से पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि योग्य भूमि का क्षेत्रफल लगातार कम हो रहा है। 20 सालों में पहाड़ों में 29970 हेक्टेयर कृषि भूमि घटी है। कृषि रकबा कम होने से सख्त भू-कानून की मांग उठ रही है। जिससे कृषि भूमि का सुरक्षा कवच मिल सके। हालांकि सरकार ने भू-कानून को लेकर उच्च स्तरीय समिति गठित की है।

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प्रदेश में 6.48 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में कृषि की जा रही है। इसमें 3.50 लाख हेक्टेयर पर्वतीय और 2.98 लाख मैदानी क्षेत्र के अधीन हैं। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 14.25 लाख परिवार रह रहे हैं। इसमें 8.81 लाख (61.84 प्रतिशत) परिवारों की आजीविका खेती किसानी पर निर्भर है। 
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वर्ष 2000-2001 में पर्वतीय क्षेत्रों में कुल 517628 हेक्टेयर कृषि भूमि थी। जो वर्ष 2019-20 में घट कर 487658 हेक्टेयर हो गई है। यानी 29970 हेक्टेयर कृषि भूमि कम हुई है। लगातार कम हो रही कृषि भूमि को बचाने के लिए प्रदेश में सख्त भू-कानून बनाने की आवाज उठ रही है। राज्य गठन के बाद अवस्थापना विकास और पलायन के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि का रकबा घटा है। परती भूमि (जिस पर पहले खेती होती थी) का क्षेत्रफल 1.07 लाख हेक्टेयर से बढ़ कर 1.77 लाख हेक्टेयर हो गया है।  
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पहाड़ों से पलायन एक गंभीर समस्या है, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि क्षेत्रफल कम हुआ है। सरकार की ओर से परती व बंजर भूमि को कृषि उपयोग में लाने का प्रयास किया जा रहा है। क्लस्टर आधारित खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

-सुबोध उनियाल, कृषि एवं उद्यान मंत्री

प्रदेश में 881305 कृषि जोत
वर्ष 2015-16 की कृषि गणना के आधार पर प्रदेश में कुल 881305 जोत हैं। इसके तहत 7.47 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल आता है। पर्वतीय क्षेत्रों में बिखरी कृषि जोत होने से 10 हेक्टेयर से अधिक जोतों की संख्या 888 है। जबकि एक हेक्टेयर से कम कृषि जोत की संख्या 659062 और दो हेक्टेयर कम जोतों की संख्या 148815 हेक्टेयर है। इससे जाहिर है कि पहाड़ों में छोटे किसानों की संख्या ज्यादा है। जिनकी आजीविका कृषि आधारित है। 

प्रदेश में कृषि क्षेत्र के तहत शुद्ध बोया गया क्षेत्रफल
जिला      -     शुद्ध बोया गया क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)
चमोली    -        31250
देहरादून   -        35357
हरिद्वार      -    114077
पौड़ी          -       44951
रुद्रप्रयाग     -     19329
टिहरी         -      50656
उत्तरकाशी    -    28893
अल्मोड़ा   -        68578
बागेश्वर       -     22356
चंपावत      -      15891
नैनीताल     -     41498
पिथौरागढ़    -    37209
ऊधमसिंह नगर-  137743
कुल-                 647788

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