उत्तराखंड: इगास पर्व पर 15 नवंबर को रहेगा राजकीय अवकाश, आदेश जारी, क्यों खास है यह त्योहार, पढ़ें
दिवाली के 11 दिन बाद पहाड़ में एक ओर दिवाली मनाई जाती है, जिसे इगास कहा जाता है। इस दिन सुबह मीठे पकवान बनाए जाते हैं और शाम को भैलो जलाकर देवी-देवताओं की पूजा की जाती है।
विस्तार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 14 नवंबर इगास (बूढ़ी दिवाली) पर राजकीय अवकाश की घोषणा की है। जिसका आदेश शुक्रवार को जारी कर दिया गया है। हालांकि आदेश में इगास पर्व पर आगामी 15 नवंबर को राजकीय अवकाश घोषित किया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि 14 नवंबर को रविवार का दिन पड़ रहा है। और इसे ध्यान में रखते हुए 15 नवंबर को अवकाश दिया गया है।
बलूनी ने जताया आभार
राज्यसभा सांसद व भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी सांसद अनिल बलूनी ने इगास पर छुट्टी घोषित करने पर मुख्यमंत्री धामी का आभार व्यक्त किया है। बलूनी पिछले कुछ वर्षों से गांवों में जाकर इगास (बूढ़ी दिवाली) मनाने की मुहिम चला रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘मित्रों मैं इगास (बुड़ दिवाली) पर अपने गांव जाकर उत्सव मनाने वाला हूं। आप सबसे आग्रह है कि आप भी अपने गांव जाकर इगास बूढ़ी दिवाली मनाएं।’
इगास पर्व मनाने गांव पहुंचेंगे सांसद बलूनी
अनिल बलूनी इगास बनाने के लिए गांव पहुंचेंगे। उन्होंने 2018 में प्रदेशवासियों व प्रवासियों से इगास पर्व गांव में मनाए जाने की अपील की थी। राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी अपने पैतृक गांव नकोट (पौड़ी) में इगास मनाने पहुंच रहे हैं। नकोट गांव जनपद पौड़ी के विकास खंड कोट में स्थित है। राज्यसभा सांसद बलूनी ने वर्ष 2018 में उत्तराखंड वासियों व प्रवासियों से ईगास पर्व अपने पैतृक गांव में मनाए जाने की अपील की थी।
इसके बाद उन्हें कैंसर की शिकायत होने पर वे गांव नहीं आ पाए थे, तब पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल उनके साथ 2019 के इगास मनाने के लिए बलूनी के पैतृक गांव पहुंचे थे। सांसद प्रतिनिधि संजय बलूनी ने बताया कि भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी 13 नवंबर को गांव पहुंचेंगे। 14 नवंबर को इगास पर्व ग्रामीणों के साथ मनाने के बाद लौट जाएंगे।
14-15 को मना सकते हैं इगास
इगास पर्व 14 के साथ ही 15 नवंबर को भी मनाया जा सकता है। ज्योतिषाचार्य भाष्कर बहुगुणा ने बताया कि इस वर्ष प्रबोधनी स्मार्थ एकादशी है। जो 14 नवंबर की सुबह 6.40 बजे शुरू होकर 15 नवंबर को 12. 47 मिनट बजे तक रहेगी। उन्होंने बताया कि इगास पर्व का मुख्य दिवस 14 नवंबर है, लेकिन एकादशी के दो दिनों तक जाने के चलते 15 नवंबर को भी मनाई जा सकती है।
14 नवंबर को है रविवार
मुख्यमंत्री इगास (बूढ़ी दिवाली) पर्व पर सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है। उस दिन रविवार है। हालांकि सोमवार एक बजे तक इगास पर्व मनाया जाएगा।
यह है मान्यता
दिवाली के 11 दिन बाद पहाड़ में एक ओर दिवाली मनाई जाती है, जिसे इगास कहा जाता है। इस दिन सुबह मीठे पकवान बनाए जाते हैं और शाम को भैलो जलाकर देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। पूजा-अर्चना के बाद ढोल-दमाऊं की थाप पर भैलो (भीमल या चीड़ की लकड़ी का गट्ठर) जलाकर घुमाया जाता है और नृत्य किया जाता है।
मान्यता है कि भगवान राम के लकां विजय कर अयोध्या पहुंचने की सूचना पहाड़ में 11 दिन बाद मिली थी। इसीलिए दिवाली के 11 दिन बाद इगास (बूढ़ी दिवाली) मनाया जाता है।
भट्ट ने बताया बढ़ा फैसला
केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट ने कहा कि इगास (बूढ़ी दिवाली) पर सार्वजनिक अवकाश की घोषणा पर मैं सरकार को हृदय से बधाई देता हूं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार कि उन्होंने यह बड़ा फैसला लिया। कहा कि हम लोग बूढ़ी दिवाली मनाते हैं, लेकिन नई पीढ़ी कहीं न कहीं भूलती जा रही थी। आज फिर संस्कृति से जुड़ने का हमें मौका मिला है। मैं स्वयं उत्तराखंड के किसी न किसी क्षेत्र में रहकर धूमधाम से बूढ़ी दिवाली मनाऊंगा।
छठ पूजा पर अवकाश तो इगास पर छुट्टी कोई बड़ी बात नहीं : त्रिवेंद्र
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश में जब छठ पूजा की छुट्टी हो सकती है तो इगास की छुट्टी घोषित होना कोई बड़ी बात नहीं है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। मीडियाकर्मियों ने इगास पर सार्वजनिक अवकाश घोषित होने के संबंध में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की भी प्रतिक्रिया मांगी। इस पर उन्होंने कहा कि जब पूजा पर अवकाश है अब इगास पर भी हो गया तो कोई बड़ी बात नहीं है।