Exclusive: मानसून में आपदा और अतिवृष्टि से अन्नदाताओं पर टूटा दुखों का पहाड़, 2,355 हेक्टेयर फसल बर्बाद
प्रदेश में मलबा एवं अतिवृष्टि से फसलों को जो नुकसान हुआ है, उसने अन्नदाता की आर्थिक परेशानी बढ़ा दी है। पौड़ी, रुद्रप्रयाग, ऊधमसिंह नगर और चंपावत जिले में सिंचित और असिंचित क्षेत्र की फसल खराब हुई है।
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मानसून में आपदा और अतिवृष्टि ने उत्तराखंड के अन्नदाता के सिर पर मुसीबतों का पहाड़ गिरा दिया है। राज्य के कई जिलों में खेतों में खड़ी मंडुवा एवं धान की फसल चौपट हो गई है। कृषि विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस महीने 2,355 हेक्टेयर से अधिक फसलों को नुकसान हुआ है।
प्रदेश में मलबा एवं अतिवृष्टि से फसलों को जो नुकसान हुआ है, उसने अन्नदाता की आर्थिक परेशानी बढ़ा दी है। पौड़ी, रुद्रप्रयाग, ऊधमसिंह नगर और चंपावत जिले में सिंचित और असिंचित क्षेत्र की फसल खराब हुई है। सबसे अधिक नुकसान ऊधमसिंह नगर जिले में हुआ है। इस जिले के सात विकासखंडों खटीमा, सीतारगंज, रुद्रपुर, गदरपुर, बाजपुर, काशीपुर एवं जसपुर में अतिवृष्टि से फल, सब्जी एवं धान की 2345 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है।
पौड़ी जिले के जयहरीखाल में मंडुवे की .3 हेक्टेयर, रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि में धान की .04 हेक्टेयर फसल को नुकसान हुआ है। इसके अलावा चंपावत में धान की पांच हेक्टेयर फसल खराब हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया कि तीन जुलाई को रुद्रप्रयाग के अगस्त्यमुनि में बादल फटने और आठ जुलाई को पौड़ी के जयहरीखाल में अतिवृष्टि से फसलों को नुकसान हुआ है। विस्तृत क्षति के आकलन के लिए कृषि, उद्यान एवं राजस्व विभाग की ओर से सर्वे का काम किया जा रहा है।
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मुआवजे का मरहम लगे तो मुसीबतें हों कुछ कम
प्रदेश में आपदा और अतिवृष्टि से फसलें खराब होने से अन्नदाता जहां आर्थिक परेशानी से जूझ रहे हैं, वहीं, कृषि विभाग का कहना है कि प्रभावितों को अभी मुआवजे का मरहम नहीं लग पाएगा। कृषि विभाग के निदेशक केसी पाठक बताते हैं कि फसलों को हुए नुकसान का विस्तृत सर्वे कराया जा रहा है। विभाग को अभी जो रिपोर्ट मिली है, उसमें फसलों की क्षति 33 प्रतिशत से कम है, जबकि केंद्र सरकार का मुआवजे को लेकर मानक 33 फीसदी से अधिक के नुकसान का है।
इन जिलों में नहीं हुआ अभी कोई नुकसान
कृषि विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, टिहरी, उत्तरकाशी और चमोली प्रदेश के ऐसे जिले हैं, जिनमें आपदा और अतिवृष्टि से अभी कोई नुकसान नहीं हुआ। आपदा और अतिवृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। 33 फीसदी से अधिक के नुकसान पर प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। जिनका बीमा है, उन्हें संबंधित कंपनी बीमा राशि देगी, जबकि अन्य प्रभावितों की किस तरह से मदद की जा सके, इसके लिए रास्ता निकाला जाएगा। -गणेश जोशी, कृषि मंत्री
रामपुर गांव के खेतों में आया मलबा
रुद्रप्रयाग। अगस्त्यमुनि ब्लॉक के बच्छणस्यूं पट्टी के मध्य क्षेत्र के गांवों को जोड़ने वाले निर्माणाधीन दैजीमांडा-पौड़ीखाल मोटर मार्ग के मलबे से रामपुर गांव की खेती चौपट हो गई है। साथ ही पेयजल लाइन भी लंबे समय से क्षतिग्रस्त है। ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग से मलबे से पटे खेतों की सफाई और नियमित पेयजल आपूर्ति करने की मांग की है। वर्ष 2018 में बच्छणस्यूं के ग्राम पंचायत खांकरा, निषणी और बंगोली के रामपुर, मरगांव, पौड़ीखाल, पणधारा, कलेथ आदि गांवों को यातायात सुविधा से जोड़ने को दैजीमांडा-पौड़ीखाल मोटर मार्ग का निर्माण शुरू किया गया। रामपुर गांव निवासी राजेंद्र प्रसाद, वेद प्रकाश, रामकृष्ण रतूडी, चंद्रमोहन रौथाण, बसंत सिंह बिष्ट, बादर सिंह, रमेश सिंह, जगत सिंह, देवेंद्र सिंह बिष्ट आदि का कहना है कि लोक निर्माण विभाग ने सड़क कटान का मलबा गदेरे में डंप किया, जो वर्ष 2021 की बरसात में भारी अतिवृष्टि से उनके खेतों तक पहुंच गया था।