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Uttarakhand: पीसीएस परीक्षा में महिलाओं को 30 फीसदी आरक्षण देने के सरकार के आदेश पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

Wed, 24 Aug 2022 08:55 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 24 Aug 2022 08:55 PM IST
सार

सरकार ने कुछ साल पहले प्रदेश की मूल निवासी महिला अभ्यर्थियों को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने का शासनादेश जारी किया था। 

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Uttarakhand High Court stayed the order of government to give 30 percent reservation to women
नैनीताल हाईकोर्ट - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

नैनीताल हाईकोर्ट ने उत्तराखंड राज्य लोक सेवा आयोग की सम्मिलित राज्य (सिविल) प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा में उत्तराखंड मूल की महिला अभ्यर्थियों को 30 फीसदी क्षैतिज आरक्षण देने के 2006 के शासनादेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाकर्ताओं को परीक्षा में बैठने की अनुमति भी दे दी है। सरकार और लोक सेवा आयोग को सात अक्तूबर तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। 

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मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष हरियाणा की पवित्रा चौहान सहित अन्य की याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में कहा गया है कि राज्य लोक सेवा आयोग की ओर से डिप्टी कलेक्टर सहित अन्य पदों के लिए आयोजित उत्तराखंड सम्मिलित (सिविल) प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा में उत्तराखंड मूल की महिलाओं को अनारक्षित श्रेणी में 30 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। इस कारण वह (याचिकाकर्ता) परीक्षा से बाहर हो गई हैं।
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याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता कार्तिकेय हरिगुप्ता ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से जारी 18 जुलाई 2001 और 24 जुलाई 2006 के शासनादेश के अनुसार, उत्तराखंड मूल की महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जाना संविधान के अनुच्छेद 14, 16, 19 और 21 के खिलाफ है। संविधान के अनुच्छेद-15 व 16 के अनुसार आवास के आधार पर कोई राज्य आरक्षण नहीं दे सकता, यह अधिकार केवल संसद को है। राज्य केवल आर्थिक रूप से कमजोर व पिछड़े तबके को आरक्षण दे सकता है। सरकार की ओर से कहा गया कि राज्य की महिलाओं को आरक्षण दिया जाना संविधान सम्मत है।
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अनारक्षित श्रेणी की दो कट ऑफ लिस्ट निकाली
याचिका में कहा गया है कि परीक्षा में अनारक्षित श्रेणी की दो कट ऑफ लिस्ट निकाली गईं। उत्तराखंड मूल की महिला अभ्यर्थियों की कट ऑफ 79 थी, जबकि उन्हें (याचिकाकर्ताओं को) 79 से अधिक अंक के बावजूद अयोग्य घोषित कर दिया गया। 

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