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हाईकोर्ट ने पतंजलि आयुर्विज्ञान संस्थान की स्पेशल अपील की खारिज, पढ़ें अन्य फैसले...

Fri, 20 Mar 2020 09:08 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 20 Mar 2020 09:08 PM IST
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Uttarakhand high court rejects Patanjali Institute of Medical Sciences special Appeal
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

नैनीताल हाईकोर्ट ने आदेश के बाद भी बीएएमएस छात्रों से वसूली गई बढ़ी हुई फीस उन्हें नहीं लौटाने को बेहद गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने पतंजलि आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान हरिद्वार के प्रधानाचार्य डीएन शर्मा पर अवमानना के आरोप तय करने के लिए 24 मार्च की तिथि तय की थी।

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संस्थान को बीएएमएस छात्रों को करीब 15 करोड़ की राशि लौटानी है। एकलपीठ के इस आदेश को डीएन शर्मा ने स्पेशल अपील के माध्यम से चुनौती दी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। पतंजलि आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान हरिद्वार के प्रधानाचार्य डीएन शर्मा ने हाईकोर्ट में स्पेशल अपील दायर कर एकलपीठ के आदेश को चुनौती दी थी।
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पिथौरागढ़ निवासी शुभम पंत सहित 25 छात्रों ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की कहा था कि सरकार ने बीएएमएस की फीस 80 हजार से बढ़ाकर दो लाख 15 हजार कर दी थी। इस शासनादेश को कोर्ट खारिज करने के साथ ही छात्रों से वसूली गई बढ़ी हुई फीस लौटाने का आदेश पारित कर चुकी है लेकिन संस्थान द्वारा फीस नहीं लौटाई गई।
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संस्थान की ओर से आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए छह माह की मोहलत मांगी गई, जिसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया था। संस्थान ने इस आदेश के खिलाफ खंडपीठ में स्पेशल अपील दायर की जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।

बल्लीवाला फ्लाईओवर के गलत डिजाइन के मामले में सरकार से जवाब तलब

हाईकोर्ट ने गलत डिजाइन से बनाए गए बल्लीवाला फ्लाईओवर देहरादून पर तीन वर्ष में 12 दुर्घटनाएं होने और इन दुर्घटनाओं में 14 लोगों की मौत के मामले में सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। 

मामले के अनुसार देहरादून के एक पत्रकार ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर बताया है कि देहरादून में बल्लीवाला फ्लाईओवर का डिजाइन गलत बनाया गया है। इसके कारण अगस्त 2016 में इस फ्लाईओवर के उद्घाटन के बाद से अब तक 12 दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इन हादसों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है। आरोप लगाया गया कि फ्लाईओवर का डिजाइन बनाने वाले लोनिवि डोईवाला के तत्कालीन अधिशासी अभियंता अकुशल इंजीनियर हैं।

याचिकाकर्ता ने फ्लाईओवर का डिजाइन बनाने वाले इंजीनियर की डिग्री की जांच करवाने की मांग की है। इस पत्र को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

देवस्थानम बोर्ड में गंगोत्री धाम को शामिल करने पर सरकार से जवाब तलब

चारधाम देवस्थानम बोर्ड में गंगोत्री धाम को भी शामिल करने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने बोर्ड के सीईओ को नोटिस जारी कर सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए  20 अप्रैल की तिथि नियत की है। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। 

मामले के अनुसार गंगोत्री धाम मंदिर समिति ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि सरकार ने गंगोत्री धाम को चारधामों में शामिल कर दिया है, जो नियम विरुद्ध है। याची ने गंगोत्री धाम को चारधाम देवस्थानम बोर्ड में शामिल न करने की मांग की है। कोर्ट ने इस मामले को चारधाम देवस्थानम से जुड़ी सुब्रह्मण्यम स्वामी की जनहित याचिका के साथ समायोजित कर दिया है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 अप्रैल की तिथि नियत की।

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