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उत्तराखंड: हाईकोर्ट ने हरिद्वार जिले के पुराण ओसपुर में सरकारी भूमि से कब्जा हटाने का आदेश

Thu, 26 Nov 2020 11:58 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 26 Nov 2020 11:58 PM IST
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Uttarakhand High Court orders to removal of possession from government land in Puran Ospur of Haridwar district
- फोटो : फाइल फोटो

नैनीताल हाईकोर्ट ने हरिद्वार के लक्सर तहसील के ओसपुर में 700 बीघा सरकारी जमीन से कब्जा हटाने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने डीएम हरिद्वार और एसडीएम लक्सर को दो माह के भीतर अतिक्रमण हटाने व जमीन पर कब्जा लेने को कहा है  साथ ही कहा है कि आगे इस भूमि पर कब्जा ना हो। 

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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ एवं न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार हरिद्वार निवासी विरेंद्र ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर  कहा था कि हरिद्वार के लक्सर तहसील के ओसपुर पुराना गांव में बाणगंगा नदी के पश्चिम में 700 बीघा जमीन पर अवैघ रूप से कब्जा कर उसमें खेती की जा रही है।
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याचिका में कहा कि इस स्थान पर पहले जंगल था, जिसको खत्म कर खेत बना दिए गए हैं। याचिका में सरकारी जमीन से कब्जा हटाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए दो माह के भीतर कब्जा हटाने का आदेश डीएम हरिद्वार को जारी किए हैं।

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जिन्हें स्टे नहीं मिला, उनके अतिक्रमण हटाए प्रशासन

हाईकोर्ट ने खटीमा पालिका क्षेत्र में अतिक्रमण मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद प्रशासन को निर्देश दिए दिए हैं कि जिन अतिक्रमणकारियों को हाईकोर्ट से स्टे नहीं मिला है उनके अतिक्रमण हटाकर इसकी एक सप्ताह में प्रगति रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें।

सुनवाई के दौरान प्रशासन की ओर से शपथपत्र पेश कर कहा गया कि नगर पालिका परिक्षेत्र में लगभग 460 अतिक्रमण चिह्नित हैं, जिसमे से करीब 400 अतिक्रमणकरियों को हटा दिया गया है। 60 अतिक्रमणकारियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं जो कि लंबित है। इस पर कोर्ट ने कहा कि जिन याचिकाओं में स्टे नहीं है, उनका अतिक्रमण हटाया जाए।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ एवं न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।  मामले के अनुसार खटीमा निवासी कवींद्र सिंह कफलटिया ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि खटीमा में लोगों ने सार्वजनिक स्थानों, सड़कों और गलियों में अतिक्रमण किया हुआ है, जिसके कारण वहां चलने तक का रास्ता नहीं रह गया है। इसकी शिकायत कई बार पालिका व प्रशासन से की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। याचिकाकर्ता ने खटीमा को अतिक्रमण मुक्त करने की प्रार्थना की थी।

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