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पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुविधा का मामला: हाईकोर्ट ने कोश्यारी को पक्षकार बनाने के दिए निर्देश
Fri, 13 Sep 2019 08:24 AM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
Published by: अलका त्यागी
Updated Fri, 13 Sep 2019 08:24 AM IST
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महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी
- फोटो : फाइल फोटो
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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को सुविधा देने के सरकार के अध्यादेश को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई की। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 सितंबर की तिथि नियत की है।
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कोर्ट में बहस के दौरान पूर्व सीएम और वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को पार्टी नहीं बनाने पर उन्हें भी पार्टी बनाने को कहा है। याचिकाकर्ता की ओर से राज्य सरकार के साथ ही पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक और विजय बहुगुणा को पार्टी बनाया गया है।
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मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार देहरादून की स्वयं सेवी संस्था रूरल लिटिगेशन एंड एंटाइटलमेंट केंद्र (रूलक) ने हाईकोर्ट में सरकार के अध्यादेश को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सरकार का यह कदम सुप्रीम कोर्ट के साथ ही हाईकोर्ट के इस मामले में दिए वसूली को आदेश की अवहेलना है।
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सरकार ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर यह अध्यादेश जारी किया है। सरकार का यह आदेश पूर्व मुख्यमंत्रियों को व्यक्तिगत लाभ व सेवा देने के लिए जारी किया गया है। साथ ही आम जनता से सरकार को प्राप्त राजस्व का दुरुपयोग है।
पूर्व में हाईकोर्ट ने नित्यानंद स्वामी व हरीश रावत को छोड़ अन्य सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को दी गई सुविधा को गलत ठहराया था और इनसे बाजार दर से वसूली के आदेश दिए थे।
पूर्व सीएम कोश्यारी और बहुगुणा ने इस पर पुनर्विचार याचिका दायर की थी। इसको भी हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। लेकिन, इस बीच सरकार ने अध्यादेश जारी कर पिछले मुख्यमंत्रियों को वसूली से छूट दे दी थी।
पूर्व में हाईकोर्ट ने नित्यानंद स्वामी व हरीश रावत को छोड़ अन्य सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को दी गई सुविधा को गलत ठहराया था और इनसे बाजार दर से वसूली के आदेश दिए थे।
पूर्व सीएम कोश्यारी और बहुगुणा ने इस पर पुनर्विचार याचिका दायर की थी। इसको भी हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। लेकिन, इस बीच सरकार ने अध्यादेश जारी कर पिछले मुख्यमंत्रियों को वसूली से छूट दे दी थी।