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गन्ना किसानों पर उत्तराखंड सरकार हुई मेहरबान
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 01 Dec 2016 08:45 AM IST
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- फोटो : Getty
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आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार गन्ना किसानों पर मेहरबान हो गई है।
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पिछले दो सालों से गन्ना मूल्य में वृद्धि नहीं करने वाली सरकार ने चालू पेराई सीजन के लिए गन्ना मूल्य में 27 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा किया है। प्रदेश में गन्ना का रेट अब पड़ोसी राज्य यूपी के मुकाबले दो रुपये अधिक है। इस वृद्धि एक मकसद यह भी है कि उत्तराखंड का गन्ना यूपी ना जाने पाए।
गौरतलब है कि प्रदेश दो जिलों हरिद्वार और उधमसिंह नगर में मुख्य रूप से गन्ने की खेती होती है। इन दोनों जिलों में विधानसभा की लगभग 20 सीट हैं। इन सीटों पर गन्ना किसान निर्णायक स्थिति में है। प्रदेश में गन्ने की पेराई शुरू हो चुकी है और इसका राज्य परामर्शी मूल्य (एसएपी) घोषित नहीं किया गया था।
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किसान संगठन प्रदेश सरकार पर गन्ना मूल्य बढ़ाने का दबाव बनाए हुए थे। गन्ना मूल्य निर्धारण परामर्श समिति ने भी अपने सुझाव से प्रदेश सरकार को अवगत कर दिया था। कुछ दिन पहले यूपी ने गन्ना मूल्य में 25 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि कर दी थी।
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इसके बाद राज्य सरकार भी इस बात के लिए दबाव था कि वह गन्ना मूल्य को कम से कम यूपी के बराबर रखे। बुधवार को हुई कैबिनेट की मीटिंग में गन्ने का रेट सामान्य प्रजाति के लिए 307 और अगेती प्रजाति के लिए 317 रुपये प्रति क्विंटल घोषित कर दिया गया। एक अनुमान के मुताबिक प्रदेश सरकार के इस फैसले से लगभग 100 करोड़ रुपये का बोझ खजाने पर पड़ेगा।
पिछले बकाये पर नहीं हो सका फैसला
कैबिनेट की बुधवार को हुई मीटिंग में पिछले साल के गन्ना बकाये के भुगतान के मुद्दे पर कोई फैसला नहीं हो सका। पिछले सीजन का लगभग 72 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान बकाया है। जिसमें से सरकारी क्षेत्र की चीनी मिलों पर लगभग 44 करोड़ रुपये बकाया है।
किसानों के साथ-साथ चीनी मिलों द्वारा भी सरकार से इस बात की मांग की जाती रही है कि पिछले साल के बकाये का जल्द से जल्द भुगतान कर दिया जाए। उम्मीद थी कि बुधवार को होने वाली कैबिनेट मीटिंग में गन्ना मूल्य के साथ-साथ पिछले बकाये पर भी फैसला लिया जाएगा, लेकिन इस मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।