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उत्तराखंड: नीति आयोग की इस रिपोर्ट से लगा राज्य सरकार को झटका, खुली पोल

Fri, 11 Oct 2019 10:12 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 11 Oct 2019 10:12 AM IST
सार

  • एनएचएम का पूरा बजट भी खर्च नहीं कर पाता उत्तराखंड
  • केंद्र के मानकों के अनुसार नहीं खुले हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर 
  • स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट में उत्तराखंड का स्वास्थ्य

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Uttarakhand government shocked by this report of NITI Aayog on health

विस्तार

नीति आयोग की स्वास्थ्य क्षेत्र में उत्तराखंड के खराब प्रदर्शन की रिपोर्ट त्रिवेंद्र सरकार के लिए बड़ा झटका है। रिपोर्ट वर्ष 2017-18 की होने से सरकार की चिंता और बढ़ गई है। एक तरफ सरकार दावे कर रही है प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार आया है, लेकिन पोल खोलती रिपोर्ट में उत्तराखंड के अंकों में तेजी से गिरावट आई है।

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असलियत यह है कि केंद्र से हर साल एनएचएम के तहत मिलने वाले करोड़ों रुपये के बजट को स्वास्थ्य महकमा खर्च नहीं कर पाता है। इससे स्वास्थ्य योजनाओं को लागू करने के लिए उच्च अधिकारियों की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत सभी राज्यों की हेल्थ सिस्टम स्ट्रेंथिंग कंडिशनली रिपोर्ट जारी की है।
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नीति आयोग की रिपोर्ट समेत सात मानकों पर राज्यों में स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए कार्यों के आधार पर नंबर दिए गए हैं। जिसमें उत्तराखंड का प्रदर्शन बहुत खराब रहा। प्रदेश में डॉक्टरों की भारी कमी है। करीब 700 पद खाली पड़े हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट में यह पाया गया कि प्रदेश में 2700 सृजित पदों में से मात्र 900 डॉक्टर ही तैनात हैं।
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वहीं, एनएचएम के तहत हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर खोलने और मानकों के अनुरूप संचालित करने, सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ तैनाती, सूचना तंत्र विकसित करने में प्रदेश का प्रदर्शन सबसे खराब आंका गया। स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट से प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं के दावे करने वाले सिस्टम को झटका लगा है।

स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के बाद अधिकारियों को समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट एक साल पुरानी है, इसके बाद प्रदेश में डॉक्टरों की नियुक्ति की गई। वर्तमान में 22 सौ डॉक्टर तैनात हैं। टीकाकरण में भी उत्तराखंड की प्रगति 103 प्रतिशत है। इसके बाद अंकों में कटौती की गई।
- नितेश झा, सचिव, स्वास्थ्य विभाग
 

एनएचएम का पूरा बजट नहीं होता खर्च

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रदेश में हर साल करीब चार सौ करोड़ का बजट मिलता है, लेकिन इसमें तीन सौ करोड़ ही खर्च हो पाता है। केंद्र की गाइड लाइन के अनुसार एनएचएम का 85 प्रतिशत बजट खर्च करने के बाद ही शेष 15 प्रतिशत बजट दिया जाता है। लेकिन स्वास्थ्य क्षेत्र में खराब प्रदर्शन पर अब केंद्र बजट में कटौती करेगा।

इन सात मानकों के आधार पर मिले अंक

मानक                             निर्धारित अंक        
नीति आयोग                         40
हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर            20
एचआरआईएस                        15
जिला अस्पताल ग्रेडिंग                10
गैर संक्रमित रोग                        05
टीकाकरण                                05
पीएचसी में चिकित्सा सुविधा        05 

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