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Uttarakhand: प्रदेश की विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति जारी; आत्मनिर्भर उत्तराखंड को मिलेगा नया आधार

Wed, 10 Jun 2026 11:14 PM IST
Alka Tyagi अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Wed, 10 Jun 2026 11:14 PM IST
सार

नीति के तहत राज्य, क्षेत्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर हितधारकों के बीच सहयोग को मजबूत बनाने के लिए सहयोगात्मक तंत्र विकसित किया जाएगा। राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, निजी क्षेत्र की कंपनियां, स्टार्ट-अप्स में विज्ञान, प्रौद्योगिकी व नवाचार (एसटीआई) इकाइयों की स्थापना के लिए राज्य स्तरीय समन्वय समिति का गठन भी किया जाएगा।

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Uttarakhand Government released Science Technology and Innovation Policy of State
सीएम धामी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 जारी कर दी है। इसका उद्देश्य राज्य में विज्ञान, प्रौद्योगिकी आधारित विकास व नवाचार को बढ़ावा देने के साथ राज्य को विज्ञान, प्रौद्योगिकी व सूचना प्रौद्योगिकी के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है। इसके अलावा राज्य की आवश्यकता के अनुरूप पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक अनुसंधान व नवाचार से जोड़ा जाएगा।

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मुख्यमंत्री धामी की घोषणा पर सूचना प्रौद्योगिकी, सुराज एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग ने नीति जारी की है। इसमें अनुसंधान, नवाचार व वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करते हुए स्थानीय आवश्यकताओं व चुनौतियों के समाधान के लिए विज्ञान व तकनीक का प्रभावी उपयोग करने पर फोकस किया गया। नीति का लक्ष्य आर्थिक विकास, सामाजिक समावेशन और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए सतत विकास की दिशा में राज्य को आगे बढ़ाना है। नीति को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए राज्य स्तर पर एक सलाहकार निकाय का गठन किया जाएगा, जो नीति के कार्यान्वयन, अनुश्रवण व मूल्यांकन करेगा।
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नीति के तहत राज्य, क्षेत्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर हितधारकों के बीच सहयोग को मजबूत बनाने के लिए सहयोगात्मक तंत्र विकसित किया जाएगा। राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, निजी क्षेत्र की कंपनियां, स्टार्ट-अप्स में विज्ञान, प्रौद्योगिकी व नवाचार (एसटीआई) इकाइयों की स्थापना के लिए राज्य स्तरीय समन्वय समिति का गठन भी किया जाएगा। सार्वजनिक निधि से संचालित शोध कार्यों से प्राप्त डाटा का डिजिटल भंडारण किया जाएगा तथा इसे सभी हितधारकों तक सुरक्षित और सरल रूप से उपलब्ध कराया जाएगा। आत्मनिर्भर उत्तराखंड की अवधारणा को साकार करने के लिए तकनीक के स्वदेशीकरण व स्थानीयकरण को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा।
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स्थानीय आवश्यकता के अनुरूप समाधान
नीति में राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप स्थानीय तकनीकी समाधान विकसित किए जाएंगे। पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को भी आधुनिक अनुसंधान व नवाचार से जोड़ा जाएगा। शैक्षणिक संस्थानों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी व नवाचार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा। विद्यार्थियों, शोधार्थियों व शिक्षकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। शिक्षकों के कौशल विकास के लिए अत्याधुनिक शिक्षण अधिगम केंद्र स्थापित किए जाएंगे। राज्य में विज्ञान नगरी, विज्ञान केंद्र, तारामंडल, अटल टिंकरिंग लैब, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) प्रयोगशालाएं, खगोल अवलोकन संघ व उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों के बीच सहयोग
नीति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लॉकचेन, रोबोटिक्स, ड्रोन, संवर्धित वास्तविकता (एआर), आभासी वास्तविकता (वीआर) और मिश्रित वास्तविकता (एमआर) जैसी तकनीकों को विशेष महत्व दिया गया है। अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, नैनो प्रौद्योगिकी, डिजिटल तकनीक, खाद्य,जल, ऊर्जा सुरक्षा व आपदा प्रबंधन से जुड़े अनुसंधान व विकास कार्यों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच संवाद बढ़ाने के लिए कार्यशालाएं, संयुक्त शोध परियोजनाएं, फेलोशिप और छात्रवृत्तियां संचालित की जाएंगी। राज्य के वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक विशेष सहभागिता पोर्टल भी विकसित किया जाएगा।

चुनौतियों के समाधान पर जोर
राज्य में विज्ञान प्रसार के लिए नोडल एजेंसी के रूप में उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) कार्य कर रही है। यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत के अनुसार उत्तराखडं वर्तमान में प्राकृतिक आपदाओं, जलवायु परिवर्तन के साथ ही हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ते दबाव जैसी अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। नई नीति इन चुनौतियों के समाधान के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थानों, शोध संस्थाओं, शिक्षाविदों, उद्योगों और नवप्रवर्तकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी। प्रो दुर्गेश पंत के अनुसार यह नीति महिलाओं, ग्रामीण व दूरस्थ क्षेत्रों के निवासियों, सीमांत समुदायों और दिव्यांगजनों को समान अवसर प्रदान करते हुए विज्ञान व नवाचार के क्षेत्र में समावेशी और समान भागीदारी सुनिश्चित करेगी।

विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति राज्य को ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज है। हमारा उद्देश्य केवल विज्ञान व तकनीक का विस्तार करना नहीं, बल्कि उसे आम जनजीवन, सुशासन, आपदा प्रबंधन, शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और रोजगार सृजन से जोड़ना है। यह नीति युवाओं, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप, वैज्ञानिकों व जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों को एक साझा मंच प्रदान करेगी। पारंपरिक ज्ञान व आधुनिक तकनीक के समन्वय के माध्यम से आत्मनिर्भर और विकसित उत्तराखंड के निर्माण को नई गति मिलेगी।
-पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

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