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Uttarakhand News: तीन विभागों में तालमेल गड़बड़ाने से लटक गए 300 करोड़ रुपये, पहली किस्त 50 फीसदी खर्च नहीं

Thu, 14 Sep 2023 11:01 AM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Thu, 14 Sep 2023 11:01 AM IST
सार

पिछले करीब दो साल में तीनों विभाग 25 से 30 प्रतिशत ही खर्च कर पाए। नतीजा यह है कि 50 प्रतिशत खर्च का उपयोगिता प्रमाणपत्र (यूसी) न मिलने से केंद्र ने दूसरी किस्त भी जारी नहीं की। 

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Uttarakhand Government 300 crore rupees were lost due to lack of coordination between three departments
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

स्वास्थ्य, पंचायतीराज और शहरी विकास विभागों के बीच तालमेल न होने से राज्य सरकार के 307.72 करोड़ रुपये केंद्र में लटक गए। 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत केंद्र सरकार ने गांवों, कस्बों और शहरों में स्वास्थ्य सेवाओं को उच्चीकृत करने और सुधार लाने के लिए वर्ष 2020-21 में 150.12 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी की।

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50 प्रतिशत धनराशि खर्च करने पर दूसरी किस्त जारी होनी थी, लेकिन पिछले करीब दो साल में तीनों विभाग 25 से 30 प्रतिशत ही खर्च कर पाए। नतीजा यह है कि 50 प्रतिशत खर्च का उपयोगिता प्रमाणपत्र (यूसी) न मिलने से केंद्र ने दूसरी किस्त भी जारी नहीं की। स्थानीय शहरी निकायों व पंचायती राज संस्थाओं और स्वास्थ्य विभाग के जरिये धनराशि खर्च होनी है, लेकिन तीनों विभागों के बीच में समन्वय नहीं बन पा रहा है।

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ये स्थिति तब है, जब वित्त विभाग ने तीनों विभागों को खर्च समय पर करने के संबंध में सात बार पत्र जारी किए। चार समीक्षा बैठकें भी कीं। मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधु ने विभागीय हीलाहवाली के लिए संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार माना और उन्हें समय पर यूसी देने को कहा। कुल मिलाकर तीनों विभागों की ढिलाई का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ा है, जिसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र औश्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण और सुधार से फायदा मिलता।

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पांच साल में राज्य को मिलने 797 करोड़

15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र के सुधार के लिए पांच साल में 797.09 करोड़ रुपये जारी होने हैं। स्वास्थ्य विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने 2022-23 का वर्क प्लान केंद्र को भेज दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति ने वर्क प्लान मंजूर भी कर दिया है, लेकिन 50 प्रतिशत खर्च का प्रमाण प्राप्त न होने से 150. 12 करोड़ की दूसरी किस्त जारी नहीं हुई, जबकि विभाग से समय से खर्च करते तो राज्य को 157.60 करोड़ की तीसरी किस्त भी मिल चुकी होती।

समन्वय के अभाव में खर्च समय पर नहीं हो पाया है। वित्त विभाग की ओर से तीनों विभागों को लगातार निर्देश जारी किए जा रहे हैं। मुख्य सचिव ने भी पिछले दिनों एक बैठक में खर्च में देरी की स्थिति पर चिंता जाहिर की है। वित्त विभाग की ओर से फिर बैठक की जाएगी। - दिलीप जावलकर, सचिव (वित्त)

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15वें वित्त आयोग की स्वास्थ्य के लिए मिली धनराशि तीन विभागों को खर्च करनी है। स्वास्थ्य विभाग को जो धनराशि प्राप्त हुई थी, उसका उपयोग कर लिया गया है, उसका उपयोगिता प्रमाणपत्र भी जमा कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर इसमें कोई ढिलाई नहीं बरती गई। - डॉ. आर. राजेश कुमार, सचिव (स्वास्थ्य)

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