उत्तराखंड: खतरे में सरकार, पॉवर बैलेंस में जुटे सीएम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुख्यमंत्री हरीश रावत अपनी सरकार बचाने में जुट गए हैं। कांग्रेस पॉवर में रहे इसके लिए सीएम ने दस और विधायकों को पॉवरफुल बनाया है। नरेन्द्र मोदी की सुनामी में उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार ना उखड़े इसके इंतजाम कई दिनों से चल रहे हैं।
सरकार चला रहे कांग्रेस के 33 और सहयोगी 7 विधायकों में अब लगभग सभी को मंत्री, आयोग व परिषदों के अध्यक्ष, सभा सचिव, निगमों व बोर्ड के चेयरमैन की अतिरिक्त जिम्मेदारी बांटी गई हैं।
मुख्यमंत्री ने रविवार को दस अन्य विधायकों जिसमें कुछ के पास पहले से जिम्मेदारियां थीं उन्हें और ताकतवर बनाया गया है।
कांग्रेस के तीन खेमों में बंटे विधायकों में अब ऐसा कोई नहीं है जिसे महत्व ना मिला हो।
40 में से 39 विधायक हो गए दर्जाधारी
सरकार गिरने के संभावित खतरे और भाजपा नेताओं से मिल रही धमकियों का साफ असर सरकार की कार्यप्रणाली में दिखाई पड़ रहा है।
सरकार ने सभी सहयोगियों की शिकायतें दूर करने के साथ कांग्रेस के लगभग सभी विधायकों को कुछ ना कुछ अतिरिक्त पद दे दिए हैं। सरकार चला रहे सभी 40 विधायकों में 39 दर्जाधारी हो गए हैं।
अब एक मात्र विधायक सुबोध उन्नियाल हैं जिनके पास कोई अतिरिक्त जिम्मेदारी नहीं है। बहुगुणा खेमे के सुबोध उन्नियाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की जोड़-तोड़ चल रही है।
हर खेमें को मिली मलाई
बसपा में एक मात्र अलग-थलग पड़े विधायक सरवत करीम अंसारी को आवास विकास निधि परिषद के साथ गन्ना एवं चीनी उद्योग विकास बोर्ड भी सौंप दिया गया है।
बसपा के दो निलंबित विधायकों में सुरेन्द्र राकेश मंत्री हैं जबकि हरिदास को हरिद्वार और रुड़की विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाकर उन्हें और सरकार को मजबूती दी है।
विजय बहुगुणा गुट के विधायकों के साथ सतपाल महाराज कैंप के माने जाने वाले विधायकों को भी सरकार में विशेष महत्व देकर बांधे रखने की रणनीति बनाई गई है।
उनमें से दो दिन पहले कुछ को सभा सचिव बनाया गया था। नए पदों के वितरण में राजेन्द्र भंडारी, सुंदर लाल मन्द्रवाल और अनुसूया प्रयाद मैखुरी को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई हैं।
बसपा विधायक हो सकते हैं कांग्रेस में शिफ्ट
एग्जिट पोल के नतीजों ने हरीश रावत को सतर्क कर दिया था। 16 मई को नतीजे आने से पहले ही सात विधायकों को उन्होंने सभा सचिव बनाकर कैबिनेट मंत्री स्तर की सुविधाएं दे दी हैं।
हरीश रावत ने चुनाव से पहले ही बसपा के तीन विधायकों में से दो मंत्री सुरेन्द्र राकेश और हरीदास को लगभग कांग्रेस से ही जोड़ लिया है। जिसके चलते मायावती ने इन दोनों विधायकों को निलंबित कर दिया है।
हरिद्वार की जनसभा में मायावती स्पष्ट तौर पर कहकर गई हैं कि इन नेताओं को पार्टी का टिकट नहीं दिया जाएगा। ऐसे में साफ है कि इन दोनों विधायकों का शरणस्थली कांग्रेस ही होगी।
चुनावी नतीजों में जिस तरह यूपी में एक भी बसपा सांसद नहीं जीता है उससे बसपा विधायक सरवत करीब अंसारी को भी करीब लाने की जुगत भिड़ाई गई है। अंसारी के पास पहले से एक जिम्मेदारी थी जिन्हें एक और बोर्ड व परिषद की जिम्मेदारी दी गई है।
असंतुष्टों को मनाने के लिए मलाईदार पद
मंत्री इंदिरा ह्दयेश को औद्योगिक विकास विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंप पर ना सिर्फ उन्हें संतुष्ट किया गया है बल्कि उनके करीबी सहयोगी दल पीडीएफ के मंत्री हरीश दुर्गापाल को भी साधा गया है।
हरक सिंह रावत के समर्थकों को भी सभा सचिव और अन्य पदों के नवाजा गया है। यूकेडी मंत्री प्रीतम सिंह पंवार की पॉवर बढ़ाकर उन्हें हाउसिंग विभाग सौंपा गया है।
बदले समीकरणों में मंत्री प्रसाद नैथानी भी इन दिनों मुख्यमंत्री के करीब आ गए हैं। निर्दलीय विधायक दिनेश धनै लंबे समय से मंत्री पद पाने के लिए संघर्षरत हैं। ऐसे में अमृता रावत को अगर मंत्रिमंडल से हटाया जाता है तो यह पद उन्हें मिल सकता है।
ये लाभ हैं मलाईदार पदों से
सभा सचिवों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है। उन्हें एक मंत्री की तरह सरकारी गाड़ी, डेढ़ सौ लीटर तेल, सरकारी आवास, एक कार्यालय, कार्यालय के लिए संबंधित स्टाफ, सरकारी गेस्ट हाउस में नि:शुल्क सुविधाएं आदि मिलती हैं। चूंकि सभा सचिव विधायक ही बन सकते हैं लिहाजा विधायक वेतन और भत्ते (करीब साठ हजार)आदि अपने कोटे के ही लेते हैं।
आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, परिषदों के चेयरमैन आदि बनने पर किसी गैर विधायक को वेतन के तौर पर मात्र दस हजार रुपए मिलते हैं लेकिन सरकारी गाड़ी, कार्यालय, आवास और स्टाफ आदि की सुविधाएं उसे भी मिलती है। अगर यह जिम्मेदारी किसी विधायक को मिलती है तो एक वेतन के रूप में वह अपना ही लेता।
ये दस MLA बढ़ाएंगे सरकार का दम
1. नवप्रभात- राज्य अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास परिषद के अध्यक्ष बनाए गए हैं।
2. कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन- खनिज विकास परिषद के अध्यक्ष होंगे।
3. राजेन्द्र भंडारी- अभी बीस सूत्रीय कार्यक्रम के उपाध्यक्ष थे। अब अतिरिक्त जिम्मेदारी में राज्य स्तरीय जिला योजना अनुश्रवण कार्यक्रम क्रियान्वयन और आपदा पुर्ननिर्माण एवं अनुश्रमण समिति के अध्यक्ष भी होंगे।
4. नारायणराम आर्य- पहले समाज कल्याण योजना एवं अल्पसंख्यक समिति के अध्यक्ष थे। अब एससीएसटी एएसपी अधिनियम अनुपालन एवं अनुश्रमण समिति के भी अध्यक्ष होंगे।
5. सरवत करीम अंसारी- अभी तक आवास विकास परिषद के अध्यक्ष थे। अब उत्तराखंड आवास विकास निधि परिषद और गन्ना एवं चीनी उद्योग विकास बोर्ड के भी अध्यक्ष होंगे।
6. हरी दास- राज्य श्रम बोर्ड के अध्यक्ष थे। हरिद्वार एवं रुड़की विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष भी होंगे।
7. सुंदर लाल मन्द्रवाल - मुख्यमंत्री के समाज कल्याण सलाहकार पहले से हैं। अब राज्य सम्पत्ति विभाग में भी मुख्यमंत्री के सलाहकार बनाए गए हैं।
8. मयूख महर- राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष पहले से हैं। अब सीमांत क्षेत्र कार्यक्रम परिषद के भी अध्यक्ष होंगे।
9. अनुसूया प्रसाद मैखुरी- नवगठित गैरसैंण अवस्थावना विकास परिषद के अध्यक्ष बनाए जाएंगे।
10. मदन बिष्ट- दो दिन पूर्व सभा सचिव बनाए गए हैं अब नवगठित गैरसैंण अवस्थापना विकास परिषद में उपाध्यक्ष भी होंगे।