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देवभूमि में देवी देवता भी निभा रहे हैं वन संरक्षण में भूमिका

Tue, 22 May 2018 08:08 PM IST
सतीश जोशी ‘सत्तू’, अमर उजाला, चंपावत
सतीश जोशी ‘सत्तू’, अमर उजाला, चंपावत Updated Tue, 22 May 2018 08:08 PM IST
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uttarakhand god and goddess save trees
forest

देवभूमि में देवी-देवता सिर्फ आध्यात्मिक ताकत ही नहीं दे रहे हैं, बल्कि वन संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जैव विविधता को बनाए रखने के लिए जिले में दो दर्जन से अधिक वन पंचायतों ने अपने पंचायती वनों को विभिन्न मंदिरों और देवी देवताओं को समर्पित किया है। जंगलों को ईश्वर के आसरे रखने से अवैध कटान और अन्य तरह का नुकसान भी कम हुआ है, साथ ही जंगल भी काफी फले-फूले हैं।

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 चंपावत वन प्रभाग के तहत 65980.12 हेक्टेयर आरक्षित, 34375.95 सिविल और 22815.70 हेक्टेयर पंचायती वन हैं। अमोड़ी के सरपंच दीपक बोहरा का कहना है कि वनों को बचाने के लिए एक दर्जन से अधिक जंगलों को देवी को चढ़ाया जा चुका है। इन इलाकों में दो से पांच साल तक के लिए जंगलों को मां हिंग्लादेवी, इंसाफ के देव गोरलदेव, नागनाथ देव, भगवती देवी को समर्पित किया गया। इसके अलावा बापरू, बाराकोट, सेलाखोला, छतकोट, खर्ककार्की, पवेत, बाजरीकोट, चौकी, कोट अमोड़ी, सिमल्टा के जंगल देवी-देवताओं को सौंपे गए हैं। देवी-देवताओं को चढ़ाने के बाद ये जंगल वर्तमान में काफी फल-फूल रहे हैं।
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सेलाखोला के सरपंच कैलाश सिंह अधिकारी के अनुसार लोगों की मान्यता है कि एक बार समर्पित कर देने के बाद इस जंगल से किसी भी चीज का दोहन करने से देवी-देवता के कोप का भाजन बनना पड़ता है। बहरहाल इन इलाकों में देवी के आशीर्वाद से जंगल अधिक सुरक्षित हो रहे हैं। जिससे उनका विस्तार भी तेजी से हो रहा है।  
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लगातार बढ़ रहा है बांज वनों का क्षेत्रफल 
चंपावत जिले में मुख्यतया चीड़, साल, देवदार और बांज के वन क्षेत्र उपलब्ध हैं। वनों में प्रमुख प्रजाति बांज है, इसके अलावा कहीं- कहीं बांज के साथ बुरांश, काफल आदि प्रजातियां भी पाई जाती हैं, जो पानी की पोषक मानी जाती हैं। लेकिन गांव कस्बों के समीपवर्ती बांज वनों में अत्यधिक पातन के कारण बांज के वृक्ष झाड़ीनुमा अथवा शाखारहित हो गए हैं। जैविक दबाव वाले बांज के वनों में प्राकृतिक पुनर्जनन न आकर घिंघारू, किल्मोड़ा, हिंशालु आदि की झाड़ियों के साथ ही चीड़ की प्रजाति आ रही है। बावजूद इसके बांज के नए वनों का क्षेत्रफल लगातार बढ़ रहा है। जिले में 2145 हैक्टेयर में बांज वन स्थित है। प्रभागीय वनाधिकारी केएस बिष्ट के अनुसार वन विभाग की नर्सरियों में लगातार चौड़ी पत्ती वाले पौधों विशेषकर बांज के पौधों को उगाकर बांज वनों के क्षेत्रफल को लगातार विस्तारित किया जा रहा है। उनका कहना है कि जिले में सर्वाधिक बांज वन चंपावत रेंज के तहत आते हैं। जिसमें क्रांतेश्वर, हिंग्लादेवी, ललुवापानी, पुनाबे, भगानाभंडारी, डुगंरासेठी, सल्ली, छतकोट आदि इलाकों में बांज वनों का लगातार विस्तार किया जा रहा है। 

चंपावत जिले में विभिन्न वनों की स्थिति (हेक्टेयर में) 
रेंज का नाम        चीड़       बांज      देवदार    मिश्रित वन    
चंपावत           3873      2145     114     2815 
लोहाघाट          2532      36.55    165      336 
काली कुमाऊं     1336        -        9.86     799 
देवीधुरा           9604      1646     53       375 
भिंगराड़ा           8817      1645     16      1370 
बूम                924        260      -       16502 
दोगाड़ी             26          12       -        6498

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