Forest Fire: गढ़वाल रीजन में पांच गुना अधिक जंगल जले, 510 घटनाएं हुई दर्ज, 433 हेक्टेयर वन संपदा राख
वन विभाग ने जंगल की आग को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के दावे किए थे। बड़े अधिकारियों ने लगातार 12 से 15 दिनों तक क्षेत्र में निरीक्षण भी किया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तराखंड में जंगल की आग से गढ़वाल रीजन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यहां कुमाऊं मंडल की तुलना में करीब पांच गुना अधिक वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की गई हैं। राज्य में कुल 510 वनाग्नि की घटनाओं से 433 हेक्टेयर वन संपदा को क्षति पहुंची है।
वन विभाग ने जंगल की आग को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के दावे किए थे। बड़े अधिकारियों ने लगातार 12 से 15 दिनों तक क्षेत्र में निरीक्षण भी किया। इन कोशिशों के बाद भी वनाग्नि की 510 घटनाएं हो चुकी हैं। गढ़वाल मंडल में जंगल अधिक धधके हैं, यहां पर 373 घटनाएं हुई हैं।
इसमें आरक्षित वन क्षेत्र में 216 और सिविल सोयम में 157 घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं। इन घटनाओं में गढ़वाल रीजन में 320 हेक्टेयर क्षेत्रफल में वन संपदा को क्षति हुई है। वहीं, कुमाऊं मंडल में 82 घटनाओं में करीब 69 हेक्टेयर क्षेत्रफल में जैव विविधता प्रभावित हुई है। वन्यजीव क्षेत्र में 55 घटनाओं में 44 हेक्टेयर क्षेत्रफल में नुकसान हुआ। सर्दियों में नवंबर-2025 से 15 फरवरी तक 65 वनाग्नि के मामले रिपोर्ट हुए थे। इनमें सर्वाधिक 41 वन्यजीव क्षेत्र में और 24 गढ़वाल रीजन में हुए थे।
Uttarakhand News: प्रदेश में वनाग्नि का आंकड़ा पांच सौ पार, 15 फरवरी से शुरू हुआ फायर सीजन
अल्मोड़ा में कम घटनाएं
अल्मोड़ा वन प्रभाग में इस बार केवल दो वनाग्नि की घटनाएं हुई हैं। यह प्रभाग सामान्यतः जंगल की आग के प्रति खासा संवेदनशील रहता है। इस प्रभाग में शीतलाखेत मॉडल को शुरू किया गया था। इस मॉडल के कारण घटनाओं में कमी आने की संभावना है।
वनाग्नि के कारण और अध्ययन
मुख्य वन संरक्षक सुशांत पटनायक के अनुसार, वनाग्नि का एक बड़ा कारण मानवजनित भी होता है। गढ़वाल मंडल में पर्यटकों की अधिक संख्या लापरवाही से आग लगने का कारण बन सकती है। यहां के ढालदार पहाड़ों पर आग फैलने पर उसे बुझाने में अधिक समय लगता है, जिससे आग बढ़ जाती है। कुमाऊं मंडल में वनाग्नि की घटनाओं में कमी के कारणों का अध्ययन फायर सीजन के बाद होगा। बेहतर उपायों को अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने की योजना है।