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एक्सक्लूसिव: उत्तराखंड में शासनादेश में गलती के कारण लटका शिक्षकों का समायोजन 

Sun, 22 Nov 2020 11:23 AM IST
अलका त्यागी बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला, देहरादून
बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 22 Nov 2020 11:23 AM IST
सार

  • मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने की थी समायोजन की सिफारिश
  • कार्मिक विभाग ने शासनादेश में शिक्षकों का समायोजन स्कूलों में करने के बजाय विभागों में किया जाना लिखा

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Uttarakhand Exclusive: Adjustment of teachers stop due to mistake in mandate
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

उत्तराखंड में कई स्कूलों में मानक से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं। इन शिक्षकों के समायोजन के लिए समान श्रेणी के स्कूलों में पद उपलब्ध न होने के कारण दुर्गम से सुगम एवं सुगम से दुर्गम स्कूलों के खाली पदों पर समायोजन की मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की ओर से सिफारिश की गई है। इसके बावजूद इन शिक्षकों के समायोजन का मामला शासनादेश में की गई एक गलती के चलते पिछले दो महीने से लटका हुआ है।

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कार्मिक विभाग के उप सचिव महावीर सिंह की ओर से 23 सितंबर 2020 को प्रदेश के बेसिक स्कूलों में सरप्लस शिक्षकों के समायोजन की सिफारिश का शासनादेश जारी किया गया है, लेकिन इस शासनादेश में सरप्लस शिक्षकों का समायोजन आवश्यकतानुसार दूसरे स्कूलों में किए जाने की सिफारिश के बजाय दूसरे विभागों में किया जाना लिखा गया है।
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जिसे देख शिक्षा विभाग के अधिकारी भी हैरान हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सरप्लस शिक्षकों का समायोजन दूसरे विभागों में कैसे किया जा सकता है। यह संभव नहीं है। यही वजह है कि आदेश को संशोधन के लिए शासन को लौटा दिया गया है। शासनादेश में संशोधन के बाद ही सरप्लस शिक्षकों का दूसरे स्कूलों में समायोजन किया जा सकेगा।

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शिक्षा मंत्री ने दिए थे सरप्लस शिक्षकों के समायोजन के निर्देश

शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे की ओर से सरप्लस शिक्षकों के समायोजन के आदेश दिए गए थे । बताया गया था कि कई स्कूलों में इस तरह के शिक्षक हैं, जिनका समायोजन किया जाना है। तबादला एक्ट की धारा 27 के तहत इन शिक्षकों के मामले को शिक्षा निदेशालय की ओर से 13 दिसंबर 2019 को शासन को भेजा गया था।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी की ओर से 23 सितंबर 2020 को इन शिक्षकों के समायोजन की सिफारिश की गई। लेकिन मामला शासनादेश में हुई एक गलती के चलते लटक गया है। उधर एक शिक्षक ने आरोप लगाया कि शासनादेश में यह गलती जानबूझकर की गई है ताकि मामले को लंबे समय तक के लिए लटकाया जा सके।

शासनादेश में स्कूलों के बजाय अन्य विभाग में समायोजन लिखा गया है, जिसे संशोधन के लिए शासन को भेजा गया है। इसमें संशोधन के बाद ही सरप्लस शिक्षकों का समायोजन हो सकेगा।
-वीएस रावत, अपर निदेशक, बेसिक शिक्षा

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