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देहरादून: विरोध के बीच तोड़े 262 अवैध कब्जे, चारों जगह टीमों को करना पड़ा विरोध का सामना

Sat, 17 Oct 2020 12:30 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 17 Oct 2020 12:30 AM IST
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Uttarakhand : encroachment removing campaign fourth day
- फोटो : AMAR UJALA

हाईकोर्ट के आदेश पर जिला प्रशासन का अतिक्रमण हटाने का अभियान शुक्रवार को भी जारी रहा। विरोध के बीच प्रशासन की चार टीमों ने डीएल रोड से आर्य नगर, जीएमएस रोड पर शिमला बाईपास से ट्रांसपोर्ट नगर, कांवली रोड और मेहूंवाला में अतिक्रमण हटाया। इस दौरान अतिक्रमण कर बनाई गई बाउंडीवाल, छज्जों व नालियों के ऊपर बने स्लैब को टीम ने तोड़ दिया गया। सभी जगह टीमों को लोगों के विरोध का भी समाना करना पड़ा, लेकिन टीम ने अभियान जारी रखा। इस दौरान कुल 262 अवैध कब्जे हटाए गए।

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 एक टीम ने डीएल रोड से आगे आर्य नगर तक अभियान चलाया। इन दौरान कई लोगों ने सड़क तक दुकानें, बाउंड्रीवाल आदि बना रखे थे। जिन्हें टीम ने तोड़ दिया। डीएल रोड पर कई जगह लोगों की टीम के साथ तीखी नोक-झोंक भी हुई लेकिन विरोध को दरकिनार करते हुए टीम ने आर्यनगर तक सड़क किनारे बने बाउंड्रीवाल, नालियों पर बने स्लैब, छज्जों को तोड़ डाला।
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विधायक और पार्षद के विरोध के बाद भी नहीं रुका अभियान

अभियान में जनप्रतिनिधियों का विरोध भी काम नहीं आ रहा है। डीएल रोड पर अतिक्रमण हटाने के दौरान आर्यनगर नगर पार्षद टीम का विरोध करने लगे। उनका कहना था कि आर्यनगर का हिस्सा अभियान में शामिल नहीं था, लेकिन इसके बाद भी यहां तोड़-फोड़ की जा रही है। काफी देर तक हंगामा करने के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। इसी बीच मसूरी विधायक गणेश जोशी भी मौके पर पहुंचे, उन्होंने भी  स्थानीय लोगों के पक्ष में अधिकारियों से बातचीत की लेकिन अधिकारियों ने उनकी भी नहीं सुनी और अभियान जारी रखा। जिसके बाद वह वहां से लौट गए। 
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बिजली न होने पर महिला ने किया हंगामा

अतिक्रमण के दौरान कोई हादसा न हो, इसलिए क्षेत्र की बिजली काटी गई थी। बिजली न होने से एक महिला ने अभियान के दौरान हंगामा कर दिया। महिला का कहना था कि इस समय बच्चों के एग्जाम चल रहे हैं। ऐसे में बिजली नहीं है। उन्होंने इस पर टीम के समक्ष नाराजगी जताई। बाद में किसी तरह से महिला को समझाया गया।

जीएमएस रोड से टीपीनगर पर भी किए अतिक्रमण ध्वस्त 

अभियान के दौरान एक टीम ने जीएमएस रोड पर शिमला बाईपास से ट्रांसपोर्ट नगर तक अतिक्रमण हटाया। इस दौरान टीम को लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन विरोध को दरकिनार कर यहां भी अतिक्रमण तोड़ने के खिलाफ अभियान जारी रहा। इस दौरान यहां अतिक्रमण कर बनाई गई बाउंड्रीवाल, दुकानें, नालियों पर बने स्लैब और छज्जे तोड़े गए। 

मेहूंवाला में स्कूल की दीवार ढहाई, कई जगह छोड़ा अतिक्रमण  

मेहूंवाला में टीम ने सरकारी स्कूल की दीवार को ढहा दिया। साथ ही तेलपुर चौक पर मिठाई की दुकान का कुछ हिस्सा अतिक्रमण की चपेट में आ रहा था। विरोध होने के कारण टीम ने दुकानदार को खुद ही अतिक्रमण हटाने की चेतावनी दी। वहीं मेहूंवाला में कई जगह ऐसी हैं जहां अभी भी लाल निशान लगाए गए हैं, लेकिन टीम ने इन्हें छेड़ने की हिम्मत नहीं दिखाई दी। कांवली रोड पर बस स्टैंड के साथ ही नालियों और सड़क घेरकर बनाए गए स्लैब को टीम ने ध्वस्त कर दिया। 

प्रेमनगर में नहीं चलेगा बुल्डोजर, हाईकोर्ट से मिला स्टे

प्रेमनगर में अब अतिक्रमण हटाने का अभियान नहीं चलेगा। स्थानीय व्यापारियों ने अभियान के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिस पर कोर्ट में स्टे दे दिया है। स्टे मिलने के बाद प्रेमनगर के व्यापारियों में खुशी की लहर है। व्यापारियों ने मिठाई बांटकर एक दूसरे को बधाई दी। 

बता दें कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद एक साल बाद प्रशासन ने फिर से दून में सड़कों पर अतिक्रमण के खिलाफ अभियान शुरू किया है। अतिक्रमण हटाने के लिए मंगलवार को प्रशासन की टीम प्रेमनगर पहुंची थी। व्यापारियों के विरोध के कारण प्रशासन ने उन्हें तीन दिन का समय दिया था। व्यापारियों का कहना था कि हाईकोर्ट ने सड़कों से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है, न कि भूमि से।

उनका कहना था कि जहां पर प्रेमनगर में दुकानें बनाई गई थी, वह जमीन ग्राम समाज की है, जिस पर व्यापारी काबिज हैं। जिस पर प्रशासन ने उन्हें बेदखली का नोटिस दिया था। उनका कहना था कि व्यापारी अतिक्रमणकारियों की श्रेणी में नहीं आते हैं। इसको लेकर व्यापारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 

प्रेमनगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजीव पुंज ने बताया कि हाईकोर्ट में उन्होंने यह बात विस्तार से रखी थी कि वह अतिक्रमण की श्रेणी में नहीं आते हैं, वह ग्राम समाज की भूमि पर कई सालों से काबिज हैं। इसलिए उन्हें अतिक्रमणकारी मानकर नहीं हटाया जा सकता है। कोर्ट ने उनकी बात मानकर उन्हें स्टे दिया है। उधर, एडीएम प्रशासन अरविंद पांडेय का कहना है कि हाईकोर्ट ने जो आदेश दिया है, जिला प्रशासन उसका पूरा पालन करेगा। 

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