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Uttarakhand Election Results 2022: पंजाब में आप का करिश्मा पर उत्तराखंड में खाता भी नहीं खुला, पढ़िए क्यों नहीं चला झाड़ू का जादू

Thu, 10 Mar 2022 09:49 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Thu, 10 Mar 2022 09:49 PM IST
सार

उत्तराखंड की सियासत में केजरीवाल के लुभावने वादों का जादू नहीं चला। सीएम पद का चेहरा कर्नल अजय कोठियाल चुनाव नहीं जीत पाए।

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Uttarakhand Election Results 2022: Aam Aadmi Party Miracle in Punjab but Party could not even open account in Uttarakhand
ajay kothiyal, arvind kejriwal - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

उत्तराखंड की राजनीति में झाडू़ नहीं चल पाया। तीसरे विकल्प का दावा करने वाली आप की झोली में एक भी सीट नहीं आई। पहली बार आप ने 70 सीटों पर दमखम के साथ चुनाव लड़ा। मगर खाता नहीं खोल पाई। पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित कर्नल अजय कोठियाल (सेनि.) भी गंगोत्री विधानसभा सीट से चुनाव नहीं जीत पाए। 

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केजरीवाल के दिल्ली मॉडल के नाम पर आम आदमी पार्टी उत्तराखंड में कोई करिश्मा नहीं कर पाई है। उत्तराखंड नवनिर्माण का संकल्प लेकर चुनाव में उतरी आप कांग्रेस और भाजपा के दुर्ग को नहीं भेद सके। आप ने दिल्ली की तर्ज पर यहां सरकार बनाने का दावा किया था।

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दोनों दलों से मुकाबला करना आप के लिए थी बड़ी चुनौती

केजरीवाल ने युवाओं, महिलाओं, सैनिक वोटरों को साधने के लिए कई वादों की गारंटी दी। यहां तक मुफ्त बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं समेत महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपये सम्मान राशि, शहीदों के परिवार को एक करोड़ की आर्थिक सहायता देने का वादा किया था। 

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उत्तराखंड की सियासत में कांग्रेस और भाजपा का वर्चस्व रहा है। चुनाव में दोनों दलों से मुकाबला करना आप के लिए बड़ी चुनौती थी। प्रदेश में न तो पार्टी का मजबूत संगठनात्मक ढांचा था और न ही पंचायत और विधानसभा में प्रतिनिधित्व था। इसके बावजूद आप ने चुनाव में भाजपा व कांग्रेस से मुकाबला किया।

 

कर्नल अजय कोठियाल को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने के साथ ही आप ने सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारे। इसमें नए चेहरे पर आप ने ज्यादा दांव खेला था। जिन्हें राजनीति का कोई खास अनुभव नहीं था। खुद कर्नल कोठियाल पहली बार चुनाव मैदान में उतरे थे, लेकिन चुनाव नहीं जीते पाए। 

पंजाब पर ज्यादा रहा आप का फोकस 
आम आदमी पार्टी ने प्रदेश की राजनीति में दमदार तरीके से एंट्री की। जनहित के मुद्दों को लेकर सक्रिय भी रही, लेकिन चुनाव में आप के शीर्ष नेताओं का फोकस पंजाब चुनाव में ज्यादा नजर आया। चुनाव के अंतिम समय में केजरीवाल तीन दिन तक हरिद्वार में रहे लेकिन पार्टी प्रत्याशियों के प्रचार में नहीं गए। जबकि भाजपा व कांग्रेस के दिग्गजों ने अंतिम समय तक चुनाव प्रचार में पूरी ताकत लगाई। 

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