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उत्तराखंड सत्ता-संग्राम 2022: उत्तर प्रदेश विधान सभा में देवप्रयाग से दो बार विधायक चुनी गईं विनय लक्ष्मी सुमन

Tue, 30 Nov 2021 04:03 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 30 Nov 2021 04:03 PM IST
सार

Uttarakhand Election 2022: अविभाजित उत्तर प्रदेश के दौर में हुए 13 विधानसभा चुनावों में सात महिलाएं विधानसभा पहुंची। इनमें तीन महिलाएं ऐसी हैं जो अपने सियासी कौशल से दो-दो बार उत्तरप्रदेश की विधानसभा के लिए निर्वाचित हुईं।

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Uttarakhand Election 2022: Vinay Laxmi Suman elected twice as MLA in up Assembly from Devprayag
चुनाव - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

विधान सभा चुनाव में राजनीतिक दल महिलाओं को उम्मीदवार बनाने में कंजूसी दिखाते रहे हैं। लेकिन उत्तराखंड का चुनावी इतिहास गवाह है कि जब-जब महिलाओं को अवसर मिला, उन्होंने साबित किया कि वे भी सियासी दांवपेच में पुरुषों से कम नहीं।

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अविभाजित उत्तर प्रदेश के दौर में हुए 13 विधानसभा चुनावों में सात महिलाएं विधानसभा पहुंची। इनमें तीन महिलाएं ऐसी हैं जो अपने सियासी कौशल से दो-दो बार उत्तरप्रदेश की विधानसभा के लिए निर्वाचित हुईं। देवप्रयाग विधानसभा से दो बार चुनाव जीतने वाली विनय लक्ष्मी सुमन महिला विधायक के तौर पर अकेली ऐसी नेता हैं जिन्हें उत्तर प्रदेश की विधानसभा में गढ़वाल का प्रतिनिधित्व करने का गौरव प्राप्त हुआ। कुमाऊं मंडल से जरूर ज्यादा महिलाएं यूपी विधान सभा में पहुंची।  
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उस दौर में जब महिलाएं मतदान के प्रति पुरुषों की तुलना में कम जागरूक थीं। रुढ़िवादी सोच हॉवी थी। गृहस्थी के दबाव के बीच चुनाव लड़ना तो दूर राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होना भी सहज नहीं था। उन कठिन परिस्थितियों में भी उत्तराखंड की महिलाओं ने अपने सियासी कौशल का डंका बजाया। देवप्रयाग से दो बार चुनाव जीतने वाली विनय लक्ष्मी सुमन का सबसे प्रमुख उदाहरण है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 1951 में पहली विधान सभा चुनाव हुए।


तब से 1996 तक 13 विधान सभा चुनावों में गढ़वाल से विनय लक्ष्मी सुमन को ही चुनाव जीतने का गौरव प्राप्त है। वह गढ़वाल से अकेली महिला रहीं जिन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा में दो बार प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्राप्त हुआ। 1957 में पहली बार वह भारतीय कांग्रेस पार्टी के टिकट पर देवप्रयाग विधानसभा से चुनाव में उतरीं। उन्हें चुनौती देने वाला कोई नहीं था। वह निर्विरोध निर्वाचित हुईं। 1962 में फिर विधानसभा चुनाव हुए। एक बार फिर विनय लक्ष्मी कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित हुईं। उन्होंने निर्दलीय उम्मीद ज्ञान सिंह को 3927 मतों से हराया। तब विनय लक्ष्मी को 9901 वोट प्राप्त हुए थे।

शहीद श्रीदेव सुमन की पत्नी थीं विनय लक्ष्मी
विनय लक्ष्मी सुमन शहीद श्रीदेव सुमन की पत्नी थीं। श्रीदेव सुमन ने टिहरी रियासत के खिलाफ सत्याग्रह छेड़ा था। टिहरी को राजशाही से आजाद कराने के लिए उन्होंने 84 दिन तक अनवरत भूख हड़ताल की और खुद न्योछावर कर दिया। 25 जुलाई 1944 को उनका निधन हुआ।

चुनाव          पुरुष मत प्रतिशत     महिला मत प्रतिशत
2017             61.11                        68.72
2012             64.41                        68.12
2007             58.95                        59.45
2002             55.95                        52.64

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