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Uttarakhand Election 2022: तो इस बार टूटेगा दून से महिला विधायक नहीं बनने का तिलिस्म 

Fri, 11 Feb 2022 01:59 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरीश कंडारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरीश कंडारी Published by: रेनू सकलानी Updated Fri, 11 Feb 2022 01:59 PM IST
सार

आजादी के बाद से आज तक देहरादून जिले की विधानसभा सीटों से कोई भी महिला प्रत्याशी विधानसभा नहीं पहुंची है। हालांकि इस बार चुनावों में देहरादून की अलग-अलग सीटों से महिला प्रत्याशियों की बड़ी संख्या देखकर संभावना जताई जा रही है कि शायद यह मिथक इस बार टूट जाए।

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Uttarakhand Election 2022 : No female candidate reached the assembly from the assembly seats of Dehradun
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : i stock

विस्तार

जनपद की आधी आबादी (महिलाओं) का क्या इस बार विधान सभा नहीं पहुंचने का तिलिस्म टूटेगा या फिर वही कहानी दोहराई जाएगी। यह अहम सवाल हर किसी के जेहन में तैर रहा है। दरअसल, आजादी के बाद से आज तक देहरादून जिले की विधानसभा सीटों से कोई भी महिला प्रत्याशी विधानसभा नहीं पहुंची है।

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हालांकि इस बार चुनावों में देहरादून की अलग-अलग सीटों से महिला प्रत्याशियों की बड़ी संख्या देखकर संभावना जताई जा रही है कि शायद यह मिथक इस बार टूट जाए। जनपद में गांव की प्रधान से लेकर नगर पंचायत, नगर पालिका, नगर निगम, राज्यसभा और लोकसभा में महिलाएं प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
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इन सीटों पर किसी भी महिला ने जीत का स्वाद नहीं चखा
वर्तमान में कई महिलाएं इस समय प्रतिनिधित्व कर भी रही हैं लेकिन देहरादून का चुनावी इतिहास बताता है कि वर्ष 1952 से शुरू हुई विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया के बाद से अब तक यहां कोई भी महिला विधायक नहीं चुनी गई।
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ऐसा नहीं कि विधायक बनने के लिए महिलाएं सियासी मैदान में भाग्य आजमाने नहीं उतरी। राज्य गठन के बाद हुए चार विधानसभा चुनावों में हर बार किसी न किसी सीट से महिलाएं जरूर अपनी दावेदारी पेश करती आई हैं लेकिन यहां से किसी भी महिला ने जीत का स्वाद नहीं चखा है।

यह सिलसिला 2002 से लेकर 2017 तक बदस्तूर जारी है। जबकि सुशीला बलूनी जैसी महिला राज्य आंदोलनकारी खुद चुनावी मैदान में उतर चुकी हैं। वर्ष 2007 और 2017 में मधु चौहान जीत के करीब पहुंची जरूर थीं लेकिन दोनों ही बार उन्हें प्रीतम सिंह से शिकस्त मिली।

इसी तरह मसूरी सीट पर भाजपा के प्रत्याशी गणेश जोशी के मुकाबले मैदान में उतरी कांग्रेस प्रत्याशी गोदावरी थापली को काफी मतों के अंतर से हार मिली। बार-बार मिलने वाली हार के इस तिलिस्म को मिटाने के लिए अबकी चुनाव में जिले की दस सीटों पर 13 महिला प्रत्याशी मैदान में खड़ी हैं। लेकिन यह तिलिस्म टूटता है या नहीं यह देखने की वाली बात होगी। हालांकि इस बार राजनीतिक विशेषज्ञ इस तिलिस्म के टूटने का दावा कर रहे हैं। 

तिलिस्म तोड़ने को जनपद से 13 महिलाएं मैदान में

दशकों का सूखा मिटाने इस बार जिले के अंतर्गत आने वाली दस में से आठ विधानसभा सीटों पर 13 महिला प्रत्याशी मैदान में डटी हुई हैं। सबसे अधिक तीन महिला प्रत्याशी रायपुर विस सीट से खड़ी हैं। इनमें बसपा की सरमिस्टा परिलियान, राष्ट्रीय समाज दल की सुमन कर्णवाल व न्याय धर्म सभा की प्रीति डिमरी शामिल है।

मसूरी सीट से भी कांग्रेस की गोदावरी थापली व यूकेडी की प्रत्याशी शकुंतला रावत भाग्य आजमा रही है। इसके अलावा ऋषिकेश सीट से रक्षा मोर्चा की बबली देवी व निर्दलीय ऊषा रावत मैदान में है। कैंट सीट से भाजपा प्रत्याशी सविता कपूर व निर्दलीय गीता चंदोला, राजपुर रोड सीट से आम आदमी पार्टी की डिंपल सिंह, सहसपुर सीट से निर्दलीय कल्पना बिष्ट व विकासनगर से यूकेडी प्रत्याशी प्रीति थपलियाल मैदान में खड़ी है। डोईवाला व चकराता विस सीट पर कोई महिला प्रत्याशी नहीं है।

1936 में शर्मदा त्यागी जीती थीं चुनाव
वर्ष 1952 में पहली बार शुरू हुई विधानसभा चुनाव प्रक्रिया के दौरान देहरादून जनपद में सिर्फ दो विस क्षेत्र दून और चकराता हुआ करते थे। तब नरदेव शास्त्री दून क्षेत्र से और शांति शर्मा चकराता क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। वर्ष 1955 परिसीमन होने के बाद यहां तीन विस क्षेत्र बनाए गए।

बात अगर इससे पूर्व के साढ़े छह दशक की करें तो मोंटेगूथैम्सफोर्ड सुधारों वर्ष 1920 में प्रांतीय लेजिस्लेटिव कौंसिल का गठन हुआ था। तक पूरे देहरादून जिले में एक ही सीट थी। वर्ष 1936 में हुए प्रांतीय कौंसिल के चुनाव में कांग्रेस पार्टी की शर्मदा त्यागी की जीत हुई थी।

उन्होंने रामचंद्र कुकरेती को पराजित किया था। हालांकि 1937 में शर्मदा त्यागी के आकस्मिक निधन के बाद खाली हुई सीट पर महावीर त्यागी कौंसिल के सदस्य बने। देश आजाद होने तक उन्होंने नौ साल तक इस सीट का प्रतिनिधित्व किया।

ग्राम प्रधान से लेकर लोकसभा तक रहा है महिलाओं का प्रतिनिधित्व 

जिले के अंतर्गत आने वाली छह विस सीटें चकराता, विकासनगर, सहसपुर, कैंट, राजपुर व मसूरी टिहरी संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं, जिसका प्रतिनिधित्व मौजूदा समय में सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह कर रही हैं। कांग्रेस की दिवंगत नेत्री मनोरमा डोबरियाल शर्मा राज्यसभा सांसद रह चुकी है। इससे पहले वह दो बार नगर निगम देहरादून की महापौर भी रही थी। वहीं जिला पंचायत की अध्यक्ष मधु चौहान तो ऋषिकेश नगर निगम में वर्तमान में अनीता ममगाईं मेयर है। 100 वार्डों वाले नगर निगम देहरादून में भी वर्तमान में तीस से अधिक महिला पार्षद हैं। जिले के अंतर्गत आने वाली छावनी परिषदों में भी महिला सभासदों का पूरा प्रतिनिधित्व रहता है। यही नहीं आधे से अधिक गांवों में महिलाएं प्रधान भी हैं। लेकिन विधायकी अब भी महिलाओं की पहुंच से दूर है।

किस सीट पर कितनी महिला मतदाता 
विस, महिला मतदाता, टोटल 
चकराता, 47871, 105064
विकासनगर, 51659, 107308
सहसपुर, 83572, 171762
धर्मपुर, 95492, 206737
रायपुर, 84732, 177176
राजपुर रोड, 56807, 119301
देहरादून कैंट, 64101, 134911
मसूरी, 62856, 131816
डोईवाला, 80999,165776
ऋषिकेश,  80468, 167924

 कुल -708557, 1487775

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