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उत्तराखंड चुनाव 2022: 'अपना वोट अपने गांव' अभियान का असर, सांसद अनिल बलूनी के गांव में बढ़े 175 प्रतिशत वोट
Tue, 04 Jan 2022 01:40 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Tue, 04 Jan 2022 01:40 PM IST
सार
अनिल बलूनी का गांव पौड़ी जिले में हैं, जहां पलायन सबसे गंभीर समस्या है। ईगास पर्व और अपना वोट अपने गांव अभियान से बलूनी पलायन की समस्या का भी समाधान तलाश रहे हैं।
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अनिल बलूनी
- फोटो : ANI FIle Photo
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विस्तार
राज्य सभा सांसद व भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी के पैतृक गांव नकोट में मतदाताओं की संख्या में 175 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके पीछे बलूनी का अपना वोट अपने गांव अभियान का हाथ है। जब बलूनी ने अपने गांव से अभियान की शुरुआत की थी, तब वहां सिर्फ 25 वोट थे। बलूनी की अपील पर गांव के 44 अन्य लोगों ने अपने वोट बनाए। इस सकारात्मक नतीजे से उत्साहित बलूनी विधानसभा चुनाव के बाद पूरे प्रदेश में इस अभियान को चलाने की सोच रहे हैं।
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अभियान से बलूनी पलायन की समस्या का भी समाधान तलाश रहे
बलूनी का गांव पौड़ी जिले में हैं, जहां पलायन सबसे गंभीर समस्या है। ईगास पर्व और अपना वोट अपने गांव अभियान से बलूनी पलायन की समस्या का भी समाधान तलाश रहे हैं। जानकारों का मानना है कि पहाड़ से हो रहे पलायन की वजह से भविष्य में वहां राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर होता जाएगा।
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राज्य पलायन आयोग की 2018 में आई रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तराखंड में 1700 गांवों पूरी तरह से खाली हो गए। इन्हें भुतहा गांवों की मिसाल दी जाने लगीं। 1000 गांव ऐसे मिले जहां 100 से भी कम आबादी थी। 2001-2011 के मध्य राज्य में 19.7 फीसदी आबादी बढ़ी, लेकिन पौड़ी और अल्मोड़ा जनपद की दशकीय आबादी बढ़ने के बजाय घट गई। इसका असर राज्य की विधानसभा सीटों के परिसीमन पर दिखा। जनसंख्या कम होने की वजह से राज्य ग्रामीण व पर्वतीय क्षेत्रों की सीटें 40 से घटकर 34 रह गई और शहरी क्षेत्रों में 30 से बढ़कर 36 पहुंच गई।
पर्वतीय व ग्रामीण क्षेत्रों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम होने से बचाने के लिए तीन साल पहले बलूनी ने अपना वोट अपने गांव अभियान की शुरुआत की। इस अभियान के साथ ईगास पर्व को जोड़ा ताकि शहरों में पलायन कर गया प्रवासी उत्तराखंडी उत्सव के बहाने ही सही अपने गांवों की ओर लौटे। प्रयास रंग लाते दिख रहे हैं और अब ईगास भी लोकोत्सव का रूप लेने लगा है। इन दोनों अभियान की शुरुआत बलूनी ने अपने गांवों से की थी। उन्होंने अपने पैतृक गांव सबसे पहले अपना वोट बनवाया। वहां के पन्ना प्रमुख बने और सोशल मीडिया व अपने संपर्कों से गांव के लोगों को अपना वोट बनाने के लिए प्रेरित किया।
आबादी के पलायन से यूं घटी विस सीटें
जनपद 2002 वर्तमान
उत्तरकाशी 03 03
चमोली 04 03
रुद्रप्रयाग 02 02
टिहरी 06 06
देहरादून 09 10
हरिद्वार 09 11
पौड़ी 08 06
पिथौरागढ़ 05 04
बागेश्वर 03 02
अल्मोड़ा 07 06
चंपावत 02 02
नैनीताल 05 06
ऊधमसिंह नगर 07 09
नोट : नैनीताल, उधमसिंह, देहरादून और हरिद्वार में सीटें बढ़ीं थीं। पौड़ी, अल्मोड़ा, बागेश्वर सीटें घटी।
मैंने कहा था कि ईगास और अपना वोट अपने गांव उत्तराखंड की हर समस्या का समाधान करेंगे। इस विस चुनाव के बाद उत्तराखंड के हर गांव में इस प्रकार का अभियान चलाया जाएगा।
- अनिल बलूनी, राज्यसभा सांसद व राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी, भाजपा