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Uttarakhand Election 2022: सियासी मैदान में 22 से ज्यादा दलों ने उम्मीदवार उतारे लेकिन बूथों पर लोगों को खली गैर मौजूदगी
Tue, 15 Feb 2022 02:27 PM IST
रेनू सकलानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: रेनू सकलानी
Updated Tue, 15 Feb 2022 02:27 PM IST
सार
विधानसभा चुनाव में 20 से ज्यादा दलों ने अपने प्रत्याशी उतारे हुए थे। मतदान शुरू हुआ तो कोई इनका नाम लेने वाला नजर नहीं आया। बसपा-सपा भले ही हरिद्वार जिले में दम दिखा रही हों, लेकिन देहरादून या अन्य जिलों में उन्हें बस्ते संभालने वाले भी नहीं मिले।
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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
विस्तार
उत्तराखंड के सियासी मैदान में वैसे तो 22 से ज्यादा दलों ने अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन बूथों पर उनकी गैर मौजूदगी लोगों को खलती रही। जिन विधानसभा सीटों पर निर्दलीय मजबूत थे, वहां उनके बस्तों पर भी उनके कार्यकर्ता मजबूती से डटे नजर आए। तीन पार्टियों को छोड़ दें तो बस्तों पर उपस्थिति के मामले में दल काफी पीछे थे।
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विकासनगर, सहसपुर, चकराता, धर्मपुर से लेकर कैंट तक वैसे तो 20 से ज्यादा दलों ने अपने प्रत्याशी उतारे हुए थे, लेकिन सोमवार को जब मतदान शुरू हुआ तो कोई इनका नाम लेने वाला नजर नहीं आया। बूथों के बाहर या तो भाजपा, कांग्रेस, आप के बस्ते थे या फिर उस विधानसभा में मजबूत निर्दलीय प्रत्याशी के। बसपा-सपा भले ही हरिद्वार जिले में दम दिखा रही हों, लेकिन देहरादून या अन्य जिलों में उन्हें बस्ते संभालने वाले भी नहीं मिले। अब दस मार्च को आने वाले नतीजों से ही इन दलों के वोट प्रतिशत की स्थिति भी साफ होगी।
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इन दलों ने मैदान में उतारे थे उम्मीदवार
कांग्रेस, भाजपा, आप, बसपा, सपा, सीपीआई, सीपीआई एम, सीपीआई एमएल-लिबरेशन, एआईएमआईएम, न्याय धर्मसभा, उत्तराखंड जनता पार्टी, उत्तराखंड जनएकता पार्टी, आरएलडी, आजाद समाज पार्टी(कांशीराम), उत्तराखंड क्रांति दल, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी, जय महाभारत पार्टी, सैनिक समाज पार्टी, राष्ट्रीय समाज दल(आर), भारतीय जन जागृति पार्टी, राष्ट्रीय आदर्श पार्टी, पिपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया(डेमोक्रेटिक)।
बस्तों पर भीड़ की परंपरा भी टूटी
वैसे तो आमतौर पर चुनावों में पार्टी प्रत्याशी के बस्ते पर होने वाली भीड़ को देखकर चुनाव के रुझान का कयास लगाया जाता रहा है लेकिन इस बार के चुनाव में यह भीड़ अपेक्षाकृत कम नजर आई। कई बस्तों पर तो केवल कार्यकर्ता बैठे थे। कम भीड़ वाले बस्तों में भाजपा-कांग्रेस भी शामिल है।
इसके पीछे एक वजह तो यह मानी जा रही है कि बीएलओ के स्तर से समय से मतदाताओं की पर्चियां घर-घर पहुंचा दी गई थी। दूसरा इस बार ऑनलाइन विकल्प भी कई थे। एक ओर भाजपा ने हर विधानसभा का अलग ऐप तैयार करके मतदाताओं को जानकारी दी थी तो दूसरी ओर चुनाव आयोग ने भी एप व वेबसाइट के माध्यम से पर्ची की जरूरत को पूरा किया। लिहाजा, लोग घर से ही पर्ची लेकर बूथ में सीधे वोट डालने वाले ज्यादा दिखे।