चुनाव 2022: आप नेता की फिसली जुबान तो हरीश रावत और मदन कौशिक ने छोड़े बयानी बाण
Uttarakhand Election 2022: सोशल मीडिया पर वायरल आम आदमी पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष भूपेश उपाध्याय के बयान पर फिलहाल सियासत गरमा गई है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आम आदमी पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष भूपेश उपाध्याय की एक टीवी चैनल की डिबेट में जुबान फिसली तो पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने आम आदमी पार्टी पर बयानी बाण छोड़ने शुरू कर दिए।
भूपेश ने उत्तराखंड की छवि के बारे में ऐसी बात कही कि जिसे भाजपा और कांग्रेस ने तूल दे दिया है और आप से माफी मांगने की मांग कर डाली है। मामला एक टीवी चैनल में डिबेट से जुड़ा है। उस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल भी मंचासीन थे। भूपेश ने कहा कि पहाड़ के आदमी की ऐसी छवि बनी हुई है कि कहते हैं कि घर के लिए नौकर भेज देना। ड्राइवर भेज देना। उनके इस बयान पर मंच पर बैठे भाजपा और कांग्रेस के अध्यक्षों ने विरोध शुरू कर दिया।
उत्तराखंड चुनाव 2022: तीन साल से एक जगह तैनात अधिकारी हटाएं, दिसंबर में लग सकती है आचार संहिता
हरीश रावत ने कहा, माफी मांगे आम आदमी पार्टी
अब सोशल मीडिया पर आप नेता का बयान वायरल हो रहा है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपनी फेसबुक वॉल पर पोस्ट लिखी है। उन्होंने लिखा है कि कि आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष ने उत्तराखंड वासियों पर एक बहुत ही अपमानजनक टिप्पणी की। उन्होंने लिखा, आप नेता यह भूल गए कि दिल्ली और देश में उत्तराखंड का मतलब गोविंद बल्लभ पंत भी है। सीडीएस जनरल बिपिन रावत भी है। उसका अर्थ वीरता और शौर्य की दुनिया में आज भी प्रतीक माने जाने वाले जसवंत सिंह रावत से भी है। उसका अर्थ कई ऐसे शीर्ष पदों पर विद्यमान उत्तराखंडी भी हैं। सीमाओं के रक्षक व राष्ट्र निर्माण में लगे हुए उत्तराखंडी भी हैं। हमें गर्व है कि हमको लोग एक भरोसे के लायक समझकर अपने घरों में भी स्थान देते हैं और अपनी सुरक्षा भी सौंपते हैं। लेकिन जिस रूप में आप पार्टी के अध्यक्ष ने कहा उसके लिए आम आदमी पार्टी को उत्तराखंड के लोगों से क्षमा मांगनी चाहिए।
आप नेताओं से डिबेट का बायकॉट करेगी भाजपा
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने आप नेता उपाध्याय के बयान के बहाने आम आदमी पार्टी पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि आप का यही चरित्र है। आप ने सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाकर भी देश और सैनिकों का अपमान किया था। आप नेता का बयान बेहद अफसोसजनक है। इसके लिए आम आदमी पार्टी को भी माफी मांगनी होगी। पार्टी ने तय किया है कि आप यदि माफी नहीं मांगेंगी तो भाजपा का कोई नेता उनके साथ डिबेट में शामिल नहीं होगा। यानी माफी न मांगने पर भाजपा आप नेताओं के साथ होने वाली डिबेट का बायकॉट करेगी।
उत्तराखंडवासियों से माफी मांगे भूपेश उपाध्याय : दसौनी
प्रदेश कांग्रेस गढ़वाल मंडल मीडिया प्रभारी गरिमा दसौनी ने भी आप के कार्यकारी अध्यक्ष भूपेश उपाध्याय से माफी मांगने की मांग की। कहा कि सारे दलों में अपना वजूद तलाशने के बाद मुश्किल से चार दिन पहले आप में शामिल हुए भूपेश उत्तराखंड और उत्तराखंड के गौरवशाली पुरुष और महिलाओं का इतिहास क्या जानें।
सोशल मीडिया पर भूपेश का ये बयान हो रहा वायरल
पहाड़ के आदमी की आज की तारीख में जो वेल्यू बनी हुई है, लोग कहते हैं कि मेरे घर के लिए नौकर भेज देना। लोग कहते हैं कि मेरे घर के लिए ड्राइवर भेज देना।
कांग्रेस-भाजपा के निक्कमेपन पर उठाया था सवाल : भूपेश
भूपेश उपाध्याय का कहना है कि मैंने उत्तराखंड की अस्मिता नहीं, बल्कि कांग्रेस व भाजपा के 20 सालों के निक्कमेपन के शासन पर सवाल उठाए थे। मेरी बात का गलत मतलब निकाल कर दोनों दल मुद्दा बना कर आप पार्टी की आवाज को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।
भूपेश उपाध्याय ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस ने पिछले 21 सालों से इस प्रदेश के युवाओं से खिलवाड़ किया। देहरादून से पहाड़ों तक नौकरियां, पेट्रोल पंप, खनन पर नेताओं और उनके परिजनों व रिश्तेदारों का वर्चस्व है। उत्तराखंड के लिए शहादत देने वाले परिवारों, पहाड़ के गरीब मां-बाप के बच्चों को मजबूरन रोजगार के लिए पलायन करना पड़ रहा है। मैंने कहा था कि आम आदमी पार्टी उत्तराखंड को लेकर ऐसा मॉडल बनाना चाहती, जहां बच्चे डॉक्टर व इंजीनियर बनें, उनके जो सपने हों वो पूरे हों।
ऐसा सपनों का उत्तराखंड हम बनाना चाहते हैं। इन दोनों पार्टियों के पास न उत्तराखंड के लिए विजन है न रोजगार देने की योजना है। मैंने ऐसी कोई बात नहीं कही, जिससे उत्तराखंड अपमानित हुआ है। दोनों दलों ने 20 सालों तक उत्तराखंड में राज किया। उनके राज के निक्कमेपन और नकारापन पर सवाल उठाया था, जिसका खामियाजा उत्तराखंड के युवा भुगत रहे हैं।