फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarakhand: Drug trade increases in state

उत्तराखंडः प्रदेश में बढ़ता गया नशे का कारोबार, मद्य निषेध भूली सरकार

Wed, 15 Jan 2020 11:54 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 15 Jan 2020 11:54 AM IST
सार

  • राज्य गठन के बाद मद्य निषेध अधिकारी का पद सृजित ही नहीं हुआ
  • अविभाजित उत्तरप्रदेश में समाज कल्याण का मद्य निषेध अहम विंग होता था

विज्ञापन
Uttarakhand: Drug trade increases in state
शराब - फोटो : pexels.com

विस्तार

उत्तराखंड में युवा पीढ़ी को खोखला कर रहा नशे का वैध और अवैध कारोबार बड़ी चिंता का सबब है। राजभवन से लेकर उच्च न्यायालय तक नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर अपनी चिंता जाहिर कर चुके हैं।

विज्ञापन


प्रदेश सरकार भी यह दिखाती आई है कि वह नशाखोरी के खिलाफ बेहद सख्त है। लेकिन प्रदेश की सत्ता पर काबिज रही सरकारों की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। इसका अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि राज्य गठन के 20 सालों में शराब का कारोबार तो खूब फला फूला लेकिन मद्य निषेध करना सरकार भूल गई।
विज्ञापन


अविभाजित उत्तरप्रदेश के समय से नशाखोरी के खिलाफ जागरूकता को लेकर मद्य निषेध अधिकारी का जो प्रावधान होता था, उत्तराखंड गठन के बाद सरकार पद तक सृजित नहीं कर पाई। राज्य गठन के बाद समाज कल्याण विभाग को मद्य निषेध के नाम पर जो पद हिस्से में आए, वे पिछले दो दशकों में एक एक करके खत्म होते गए और आज वे विभाग में इस विंग का अस्तित्व मिट जाने के कगार पर है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जबकि नशे की बढ़ती प्रवृत्ति के खिलाफ जन जागरूकता को लेकर सरकार के स्तर पर जो प्रयास किए जाने की बातें हो रही हैं, वे सभी मद्य निषेध विंग के माध्यम से संचालित हो सकती थीं। लेकिन अधिकारियों, कर्मचारियों और संसाधनों के अभाव में विभाग की ओर से चाहकर भी जन जागरूकता के गंभीर प्रयास नहीं हो सके।

हालांकि विभाग के निदेशक विनोद गिरी गोस्वामी का कहना है कि मद्य निषेध अधिकारी का पद न होने के बावजूद विभागीय स्तर पर नशाखोरी के खिलाफ बनाए गए कार्यक्रमों को समाज कल्याण अधिकारी के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। 

मद्य निषेध विभाग होता तो...

मद्य निषेध विभाग होता तो वह प्रचार माध्यमों, गोष्ठियों, कार्यशालाओं और नुक्कड़ नाटकों के जरिये नागरिकों और युवाओं में नशाखोरी के खिलाफ जागरूक करता। जानकारों की मानें तो उत्तरप्रदेश समय नशे के खिलाफ जन जागरूकता अभियान चलाने में मद्य निषेध विभाग की अहम भूमिका होती थी।  


मद्य निषेध अधिकारी के पद सृजित नहीं हुए। ये विंग समाज कल्याण का अहम टूल होता था। विभाग के स्तर पर मद्य निषेध को लेकर कार्य जारी रहेगा। अब ये जिम्मेदारी जिला समाज कल्याण अधिकारी निभा रहे हैं। विभागीय स्तर पर जो संसाधन है, उन्हीं से नशे के खिलाफ मद्य निषेध के कार्य किए जाएंगे। 
- विनोद गिरी गोस्वामी, निदेशक, समाज कल्याण विभाग

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed