Uttarakhand Congress: अंदर अनुशासन की घुट्टी, बाहर फिर वही तमाशा, प्रदेश प्रभारी को लेकर सामने आया विरोध
विधायक मदन बिष्ट ने कहा कि भाजपा चुनाव में माइक्रो मैनेजमेंट के साथ काम करती है, जबकि संगठन स्तर पर हमारी तैयारियां कहीं नहीं दिखाई देती हैं, उनका संगठन चुनाव लड़ाता है, जबकि कांग्रेस में प्रत्याशी खुद चुनाव लड़ रहा होता है। उन्होंने कहा वह फिर से मांग करते हैं कि प्रभारी को बदला जाना चाहिए।
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कांग्रेस भवन में बंद कमरे में केंद्रीय पर्यवेक्षक पीएल पुलिया ने नेताओं को अनुशासन की घुट्टी पिलाई, लेकिन बाहर इसका असर देखने को नहीं मिला। विधायक मदन बिष्ट ने तो बकायदा मीडिया के सामने बयान देकर फिर से प्रदेश प्रभारी को हटाने की मांग दोहरा दी। वहीं, प्रीतम इस मामले में कुछ भी खुलकर बोलने से बचते नजर आए।
मदन बिष्ट ने कहा कि प्रदेश प्रभारी को पार्टी नहीं बनना चाहिए था, वह पार्टी बनकर काम कर रहे हैं। जब चुनाव में हार के बाद पार्टी आलाकमान ने प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष को बदल दिया, फिर प्रभारी को क्यों नहीं हटाया गया। उनके अनुसार, संगठन में गलत के खिलाफ पहले भी आवाज उठाते रहे हैं और आगे भी उठाते रहेंगे।
अमर उजाला से बातचीत में बिष्ट ने कहा कि भाजपा चुनाव में माइक्रो मैनेजमेंट के साथ काम करती है, जबकि संगठन स्तर पर हमारी तैयारियां कहीं नहीं दिखाई देती हैं, उनका संगठन चुनाव लड़ाता है, जबकि कांग्रेस में प्रत्याशी खुद चुनाव लड़ रहा होता है। उन्होंने कहा वह फिर से मांग करते हैं कि प्रभारी को बदला जाना चाहिए।
प्रभारी के सवाल पर प्रीतम ने साधी चुप्पी
पर्यवेक्षक से बातचीत के बाद प्रीतम से मीडिया ने प्रभारी के संबंध में सवाल पूछे तो उन्होंने चुप्पी साध ली। जबकि इससे पहले वह खुलकर प्रभारी देवेंद्र यादव की खिलाफत करते रहे हैं। इस दौरान प्रीतम और तमाम विधायक कांग्रेस भवन के पास स्थित पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा के मकान में जुटे रहे। सूत्रों के अनुसार प्रीतम सहित तमाम विधायकों ने प्रभारी को बदले जाने और उनके मैनेजमेंट पर सवाल उठाए हैं। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक नेता ने कहा कि प्रभारी विधायकों का फोन भी उठाना उचित नहीं समझते हैं।
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हाजिरी लगाकर चले गए प्रभारी देवेंद्र यादव
प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव सुबह पर्यवेक्षक के साथ कांग्रेस भवन आए तो जरूर थे, लेकिन कुछ देर बाद यशपाल आर्य के साथ बैठकर कांग्रेस भवन से चले गए। बताया जा रहा है कि पर्यवेक्षक की तरफ से ही प्रदेश प्रभारी को संकेत दिए गए थे कि वह बैठक में मौजूद नहीं रहें। जबकि पहले कहा गया था कि जिलाध्यक्षों के साथ होने वाली बातचीत में प्रभारी भी मौजूद रहेंगे।