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उत्तराखंड कैबिनेट: अगले महीने से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा पर पशोपेश में सरकार, तीन राज्यों से होगी वार्ता 

Fri, 19 Jun 2020 12:21 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 19 Jun 2020 12:21 AM IST
सार

  • कोविड-19 के चलते अन्य राज्यों से कावंड़ियों के हरिद्वार आने पर नहीं बन रही सहमति

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uttarakhand cabinet meeting: Government will do talk to three stats for Kanwar yatra 2020
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

उत्तराखंड में अगले माह शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा को लेकर सरकार पशोपेश में है। यात्रा का स्वरूप कैसा रहेगा, यह अभी तय नहीं हो पाया है। मंत्रिमंडल ने बृहस्पतिवार कोे इस विषय पर लंबी चर्चा की। सरकार को कोविड-19 के चलते बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों से आने वाले कांवड़ियों को हरिद्वार आने की अनुमति देना संभव नहीं दिख रहा। ऐेसे में अब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत उत्तर प्रदेश और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों के साथ वार्ता कर रास्ता निकालेंगे। 

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प्रदेश में हर वर्ष कांवड़ यात्रा के लिए करोड़ों की संख्या में कांवड़िये दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से हरिद्वार आते हैं। यहां से गंगाजल कांवड़ में लेकर पैदल ही अपने गंतव्यों की ओर निकलते हैं। भारी भीड़ के चलते प्रशासन को हरिद्वार शहर बंद तक करना पड़ता है। सड़कों के किनारे जगह जगह पर कांवड़ियों के रुकने का इंतजाम होता है।
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हजारों की संख्या में लोग लंगर लगाने की व्यवस्था करते हैं। इतनी बड़ी तादात में कावंड़ियों के लिए कानून व्यवस्था का इंतजाम करने सहित कई अन्य व्यवस्थाएं बनानी पड़ती है। दिल्ली से हरिद्वार आने वाले रूट पर ट्रैफिक का संचालन तक ठप रहता है, लेकिन इस बार हालात बदले हैं।

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टैंकरों से हर राज्य में पहुंचाया जाए गंगा जल

कोविड-19 के चलते सरकार इतनी तादात में कांवड़ियों को राज्य में आने की अनुमति देने की स्थिति में नहीं है। धार्मिक आस्था के चलते यात्रा को रद्द भी नहीं किया जा सकता। ऐेसे में सरकार इसका समाधान तलाश रही है।

शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने बताया कि मंत्रिमंडल ने इसका समाधान तलाशने के लिए पड़ोसी राज्यों हरियाणा और उत्तर प्रदेश से वार्ता करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जल्द दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वार्ता कर आम राय बनाएंगे कि यात्रा को किस तरह से संचालित किया जाए। 

वहीं, सरकार के सामने एक विकल्प यह आया है कि टैंकरों के माध्यम से राज्यों में गंगा जल पहुंचाया जाए। स्थान तय कर दिए जाएं, जहां आकर लोग टैंकर से गंगा जल भरें और निकटवर्ती शिव मंदिर में जलाभिषेक कर सकें। यह व्यवस्था बनाना आसान नहीं हैं। मंत्रिमंडल में दूसरा विकल्प यह भी सुझाया गया कि कांवड़ के लिए हर राज्य में बनने वाली समितियों से संपर्क कर उन्हें गंगा जल मुहैया करवाया जाएगा। छोटे छोटे बर्तनों को वहां से लेकर यहां गंगा नदी में भर लिया जाए।

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