Uttarakhand: कैबिनेट के फैसले से अब छठवीं से 12वीं तक के मेधावी छात्र-छात्राओं को हर महीने मिलेगी छात्रवृत्ति
Chief Minister Medhavi Student Scholarship Scheme: उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं परीक्षा में 80 प्रतिशत और इससे अधिक अंक लाने वाले छात्र-छात्राओं को यह छात्रवृत्ति 12वीं की पढ़ाई तक निश्चित तौर पर मिलती रहेगी।
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उत्तराखंड के सरकारी और अशासकीय स्कूलों के छठवीं से 12वीं कक्षा तक के मेधावी छात्र-छात्राओं को सरकार हर महीने 600 से 1200 रुपये तक छात्रवृत्ति देगी। मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है।
उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं परीक्षा में 80 प्रतिशत और इससे अधिक अंक लाने वाले छात्र-छात्राओं को यह छात्रवृत्ति 12वीं की पढ़ाई तक निश्चित तौर पर मिलती रहेगी। वहीं, पांचवीं में एक प्रतियोगी परीक्षा कराई जाएगी जिसमें श्रेष्ठ 10 प्रतिशत छात्र-छात्राओं को छठवीं, सातवीं और आठवीं में छात्रवृत्ति मिलेगी। इसी तरह आठवीं में फिर एक प्रतियोगी परीक्षा होगी जिसमें पास हुए श्रेष्ठ 10 प्रतिशत छात्र-छात्राएं नौवीं और 10वीं में छात्रवृत्ति पाने के पात्र होंगे। यह पात्रता छात्र-छात्रा की 75 प्रतिशत उपस्थिति की शर्त पर मिलेगी।
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योजना के तहत विकासखंड स्तर पर कक्षा पांचवीं और आठवीं उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं की प्रतियोगी परीक्षा के आधार पर कुल प्रतिभागी छात्रों में से 10 प्रतिशत श्रेष्ठ छात्र-छात्राओं को यह छात्रवृत्ति दी जाएगी। कक्षा छह के पात्र छात्र-छात्राओं को अधिकतम एक वर्ष तक हर महीने 600 रुपये छात्रवृत्ति दी जाएगी। जबकि, कक्षा सात के पात्र छात्रों को अधिकतम एक साल तक हर महीने 700 रुपये और आठवीं के पात्र छात्रों को हर महीने 800 रुपये छात्रवृत्ति दी मिलेगी।
शिक्षा सचिव रविनाथ रमन के मुताबिक कक्षा नौवीं और 10वीं के पात्र छात्रों को हर महीने 900 रुपये छात्रवृत्ति दी जाएगी। उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं की परीक्षा में 80 प्रतिशत या इससे अधिक अंक लाने वाले छात्र-छात्राओं को कक्षा 12वीं तक हर महीने 1200 रुपये छात्रवृत्ति दी जाएगी। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत बताते हैं कि जूनियर और माध्यमिक स्तर के बाद उच्च स्तर पर भी इस छात्रवृत्ति व्यवस्था को लागू किया जाएगा।
छात्रवृत्ति के लिए ये अनिवार्यताएं होंगी
योजना का लाभ लेने के लिए छात्र-छात्राओं को राज्य में चल रहे राजकीय, राजकीय सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं (केंद्रीय और आवासीय विद्यालयों को छोड़कर) से कक्षा पांच संस्थागत रूप से उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। वर्तमान में कक्षा छह में संस्थागत छात्र-छात्रा के रूप में अध्ययनरत होना भी अनिवार्य है। कक्षा छह एवं सात में प्रत्येक कक्षा में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति 75 प्रतिशत एवं 60 प्रतिशत अंक प्राप्त किया जाना अनिवार्य होगा। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र-छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षा और वार्षिक परीक्षा में पांच प्रतिशत अंक की छूट दी जाएगी। इस छात्रवृत्ति के लिए किसी भी छात्र-छात्रा को राज्य सरकार की अन्य छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभार्थी नहीं होना चाहिए। छात्र के माता-पिता या अभिभावक की वार्षिक आय की कोई बाध्यता नहीं होगी। छात्रवृत्ति परीक्षा का आयोजन एससीईआरटी उत्तराखंड देहरादून की ओर से किया जाएगा।
आकलन
राज्य के 95 विकासखंडों में कक्षा पांचवीं उत्तीर्ण करने वाले छात्र-छात्राओं की कुल संख्या 79532 है। अगर सभी छात्र प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होते हैं तो छात्रवृत्ति के लिए अर्ह 10 प्रतिशत छात्र-छात्राओं की संख्या 7953 होगी। इस छात्रवृत्ति को शुरुआत में प्रथम वर्ष में कक्षा छह में अध्ययनरत चयनित छात्रों को प्रदान किया जाएगा, जिसे अगले वर्षों में निर्धारित पात्रता के अनुसार कक्षा आठवीं तक दिया जाएगा।
ये होंगे छात्रवृत्ति के लिए पात्र
| कक्षा | दर | पात्रता |
| छह | 600 | ब्लॉक स्तर पर कक्षा पांच पास छात्रों के बीच प्रतियोगी परीक्षा के आधार पर श्रेष्ठ 10 प्रतिशत को |
| सात | 700 | 700 कक्षा छह में 75 प्रतिशत उपस्थिति के साथ ही 60 प्रतिशत अंक अनिवार्य |
| आठ | 800 | 800 कक्षा सात में 75 प्रतिशत उपस्थिति एवं 60 प्रतिशत अंक अनिवार्य |
| नौंवी | 900 | 900 ब्लॉक स्तर पर कक्षा आठ पास छात्रों के बीच प्रतियोगी परीक्षा के आधार पर श्रेष्ठ 10 प्रतिशत को |
| 10 वीं | 900 | 900 नौंवी में 75 प्रतिशत उपस्थिति एवं 70 प्रतिशत अंक अनिवार्य |
| 11 वीं | 1200 | 1200 उत्तराखंड बोर्ड की 10 वीं परीक्षा में 80 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर |
| 12 वीं | 1200 | 1200 कक्षा 11 में 75 प्रतिशत उपस्थिति एवं 75 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य |
प्रदेश के करीब 55 हजार से अधिक छात्र यह छात्रवृत्ति पाएंगे। इनमें छह से आठवीं तक के 24 हजार, नौंवी से 10वीं तक 15 हजार और 11वीं व 12वीं के 16 हजार से अधिक छात्र-छात्रवृत्ति पाएंगे। - बंशीधर तिवारी, शिक्षा महानिदेशक